यूपी में भाजपा के टारगेट पर फर्जी यादव-मुस्लिम वोटर ????
एसआईआर का दूसरा चरण 6 जनवरी से शुरू हो रहा। इसे लेकर सियासी दल चौकन्ना है। सपा, भाजपा हो या फिर बसपा और कांग्रेस। सभी दल अपने-अपने वोटर को संजोने के लिए रणनीतियां बना रहे। पहले चरण की प्रक्रिया समाप्त होने के बाद माना जा रहा है कि भाजपा कार्यकर्ताओं में सक्रियता कम रही। यहां तक कि भाजपा के लोग भी मान रहे कि पहले चरण में समाजवादी पार्टी ने अधिक सक्रिय होकर काम किया है और अपने वोटर को बचाने की हर कोशिश की।
वहीं, बसपा का भी पूरा जोर पहले चरण में अपने वोटरों को बचाने पर रहा। प्रमुख दलों में कांग्रेस इस मामले में सबसे कमजोर रही। ऐसे में सभी पार्टियां दूसरे चरण के लिए क्या रणनीति अपनाने जा रहीं? भाजपा अब इतना सक्रिय क्यों हुई है? क्या सच में सपा ने पहले चरण में अपना काम कर लिया है ? बसपा और कांग्रेस पहले चरण में कहां नजर आईं? इन सभी सवालों के जवाब इस खबर में तलाशने की कोशिश करेंगे।
भाजपा का फोकस ज्यादा से ज्यादा आपत्तियों पर
राजनीतिक जानकारों की मानें तो एसआईआर के दूसरे चरण में भाजपा का पूरा फोकस अधिक से अधिक आपत्तियां दर्ज कराकर मुस्लिम व यादव बाहुल्य बूथों पर फर्जी नाम कटवाने का है। इसमें बाहरी और संदिग्ध वोटर्स को चिन्हित कर आपत्ति दर्ज की जाएगी। भाजपा ने पार्टी की बूथ कमेटियों के साथ इस काम में लगे कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करने की योजना बनाई है। पार्टी के प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह ने सभी जिलाध्यक्षों को कार्ययोजना पर समयबद्ध काम पूरा कराने के निर्देश दिए हैं।

भाजपा क्या-क्या करेगी?
- प्रत्येक बूथ स्तर पर बीएलए-2 और बूथ अध्यक्ष के साथ मिलकर उन नामों की सूची बनाई जाएगी, जो अपेक्षित वोटर्स नहीं हैं।
- ऐसे वोटर्स के नाम कटवाने के लिए फॉर्म-7 भरे जाएंगे।
- फॉर्म-7 भरवाने की पूरी जिम्मेदारी संबंधित भाजपा विधायक या विधानसभा प्रत्याशी 2022 को दी गई है।
- फॉर्म-7 पर बीएलए-2 के हस्ताक्षर कराकर प्रमाण सहित बीएलओ को जमा कराना होगा। चुनाव आयोग के बीएलओ से उसकी रिसीविंग प्राप्त करनी है।
- चुनाव आयोग की ओर से ड्राफ्ट मतदाता सूची 2025 का मतदाता सूची से मिलान करना है। ताकि पता चल सके कि पार्टी की ओर से भरे गए सभी गणना फॉर्म, फॉर्म-6 और फॉर्म-7 की सभी इंट्री सही हैं।
- यदि ड्राफ्ट सूची में गलती मिलती है तो उसके लिए भी आपत्ति दर्ज कराई जाएगी।

ड्राफ्ट सूची का मुख्यालय स्तर से सत्यापन भी कराएगी भाजपा
भाजपा की ओर से एसआईआर की ड्राफ्ट मतदाता सूची का भाजपा मुख्यालय स्तर से सत्यापन भी किया जाएगा। इसके लिए एक एक बूथ की मतदाता सूची जांची जाएगी। इसके लिए ये किया जाएगा…
- हर बूथ की ड्राफ्ट मतदाता सूची का मूल्यांकन किया जाएगा।
- अनुपस्थित एवं शिफ्टेड वोटर्स का सत्यापन किया जाएगा।
- अनुपस्थित, शिफ्टेड, डेथ और डुप्लीकेट सूची में से कितने लोग बूथ पर हैं। लेकिन जिनके गणना फॉर्म नहीं भरे गए हैं, उनकी सूची बनाई जाएगी।
- छूट गए लोगों की सूची में अगर भाजपा के समर्थक मतदाता का नाम है तो उसके लिए फॉर्म- 6 भरा जाएगा।

भाजपा अब इतनी सक्रिय क्यों?
राजनीतिक विश्लेषक राम दत्त त्रिपाठी कहते हैं कि शुरुआत में भाजपा के सक्रिय न रहने की कई वजहें हैं। जैसे प्रदेश अध्यक्ष को लेकर एक अनिश्चितता का माहौल था। यही वजह थी कि संगठन बहुत सक्रिय नहीं था। दूसरा अहम कारण भाजपा कार्यकर्ताओं के अंदर की निराशा है, उसे एसआईआर प्रक्रिया में दिलचस्पी नहीं है। तीसरा सबसे अहम कारण भाजपा के वोटरों को इस बात का विश्वास था उनका नाम नहीं कटेगा। यही वजह रही कि भाजपा शुरुआत में इतनी सक्रिय नहीं दिखी। लेकिन जब आंकड़े सामने आने लगे तो भाजपा की बेचैनी बढ़नी स्वाभाविक थी और मुख्यमंत्री को खुद सामने आना पड़ा।
वरिष्ठ पत्रकार अशोक त्रिपाठी का कहना है कि भाजपा शहरी क्षेत्रों में खुद को मजबूत मानती रही है। लेकिन एसआईआर प्रक्रिया के दौरान सबसे अधिक नाम शहरी क्षेत्रों की मतदाता सूची से कम हुए हैं। इसका प्रमुख कारण ये है कि बड़ी संख्या में ऐसे वोटर हैं जो शहर और गांव दोनों जगह थे। लेकिन एसआईआर के दौरान उन्होंने गांव में अपना नाम रखने काे वरीयता दी। इसे लेकर भाजपा चिंतित है। यही वजह है कि अब पार्टी के नेता और खुद मुख्यमंत्री इसके लिए अतिरिक्त सजग दिखाई दे रहे हैं।

भाजपा की सक्रियता से सपा भी सतर्क
पहले चरण के अंत में जिस तरह से भाजपा एसआईआर को लेकर सक्रिय हुई है, उसको लेकर समाजवादी पार्टी भी सतर्क हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयानों का हवाला देकर सपा सुप्रीमो सरकार के साथ-साथ आयोग पर भी हमला बोल रहे हैं।
सपा का मानना है कि एसआईआर के पहले चरण में जिन वोटर्स की छंटनी हुई है, उसमें अधिकतर वोट भाजपा के हैं। यही चिंता भाजपा की भी है। अब इसकी रिकवरी के लिए मुस्लिम और यादव बाहुल्य बूथों पर अधिक से अधिक आपत्तियां दर्ज कराने की बात कही जा रही है।
अखिलेश यादव सीधे आरोप लगा रहे हैं कि मुख्यमंत्री ने जब 4 करोड़ वोट कटने की बात कही थी, उसी समय उन्होंने अधिकारियों को बेईमानी करने का संदेश दिया था। आखिर सरकार के आंकड़े और आयोग के आंकड़े में इतना फर्क कैसे है? इस समय अधिकारी और चुनाव आयोग की विश्वसनीयता का सवाल है। कहीं सरकार अधिकारियों पर हेराफेरी का दबाव तो नहीं बना रही है।

क्या है सपा की रणनीति?
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अमीक जामेई कहते हैं कि पार्टी भाजपाई साजिशों से पूरी तरह से सतर्क है। जिस तरह पीडीए प्रहरी ने पहले चरण में काम किया है, उसी तरह दूसरे चरण को लेकर भी पीडीए प्रहरी पूरी तरह से चौकन्ना हैं। चिंता इस बात की है कि जो मतदाता खाड़ी देशों में या विदेशों में मेहनत मजदूरी करते हैं, साल में उनका आना-जाना भी होता है, ऐसे लोग वंचित न रह जाएं। इसके लिए ऐसे लोगों के फॉर्म 6-ए भरवाने के लिए बूथ स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है।
सपा कार्यकर्ता क्या-क्या करेंगे?
- विदेशों में रह रहे मतदाताओं को तलाश कर उनके परिजनों से फॉर्म 6-ए भरवाएंगे, ताकि उनका नाम छूटने न पाए।
- ये सुनिश्चित करेंगे कि किसी भी वैध व्यक्ति का नाम भाजपा के लोगों के इशारे पर न कटने पाए।
- जिन लोगों के नाम दस्तावेज न होने की वजह से शामिल नहीं किए गए हैं, उनके सही दस्तावेज के साथ नाम शामिल कराएंगे।
- भाजपा अगर दूसरे राज्यों के लोगों को यहां का मतदाता बनाने की कोशिश करती है, तो बूथ स्तर पर इसे चिन्हित कर साजिश काे नाकाम करने को कहा गया है।
- ड्राफ्ट सूची में ये सुनिश्चित करेंगे कि हमारे सभी लोगों के नाम आ गए हैं।
- जिन लोगों के नाम शामिल नहीं हो सके हैं, उनका कारण पता करके नामों को शामिल कराएंगे।

क्या सच में समाजवादी पार्टी ने पहले चरण में अपना काम कर लिया
पहले चरण में क्या सपा अपने मतदाताओं का नाम वोटर लिस्ट में शामिल कराने में कामयाब रही? इसे लेकर वरिष्ठ पत्रकार अशोक त्रिपाठी कहते हैं कि समाजवादी पार्टी ने अपने वोटरों खासकर मुस्लिम वोटरों को ये संदेश देने की कोशिश कि ये एसआईआर प्रक्रिया नागरिकता का प्रमाण है। यानी एसआईआर को एनआरसी के तौर पर पेश किया।
इसका परिणाम ये रहा कि लगभग 98 प्रतिशत मुस्लिमों ने अपने नाम सही करा लिए। बहुत से ऐसे लोग जो विदेशों में थे, उन्होंने भी आकर अपना नाम वोटर लिस्ट में दर्ज कराया। वहीं, समाजवादी पार्टी के लोगों को ये चिंता भी थी कि एसआईआर के बहाने उनके पक्ष के मतदाताओं को निशाना बनाया जा सकता है, इसलिए उसने शुरू से ही सक्रियता दिखाई। यहां तक कि उनके नेता लगातार आयोग को पत्र लिखकर जहां-जहां खामियां रहीं, उन्हें उजागर करते रहे और आयोग का ध्यान दिलाते रहे।
रामदत्त त्रिपाठी कहते हैं कि सपा के कार्यकर्ताओं में जोश इस बात का भी था कि उन्हें सत्ता में वापसी का प्रयास करना है, इसलिए भी उनके लोगों ने इस प्रक्रिया के दौरान अधिक मेहनत की है।

SIR में कटे वोट की मानिटरिंग के लिए कांग्रेस ने बनाई कमेटी
कांग्रेस ने डिलीटेड लिस्ट की मॉनिटरिंग के लिए हर जिले में अध्यक्षों के सहयोग से वरिष्ठ नेताओं की कमेटी का गठन किया है। ये कमेटी एसआईआर की गतिविधियों एवं कार्यकर्ताओं को मार्गदर्शन कर काटे हुए नामों का भौतिक सत्यापन करेगी। साथ ही यह सुनिश्चित करेंगी कि किसी भी वैध मतदाता का नाम न कटे और फर्जी कोई नाम ना जुड़ सके।
प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि ‘हमारे नेता राहुल गांधी जी ने तथ्यात्मक आंकडों के साथ साबित किया है कि भाजपा और चुनाव आयोग के नापाक गठजोड़ से बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, हरियाणा में वोट चोरी हुई। ऐसी स्थिति में उत्तर प्रदेश सभी वर्ग के वोट की रक्षा करनी है।’
हालांकि, शुरुआत में कांग्रेस और बसपा की सक्रियता कम थी। इन दोनों दलों की सक्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आयोग ने जब बीएलए नियुक्त करने की बात कही थी, उस समय भी इन दोनों दलों के बीएलए की संख्या सपा और भाजपा के मुकाबले काफी कम थी।

