ग्वालियर नगर निगम में प्रतिनियुक्ति पर जमे कर्मचारियों के खिलाफ प्रदर्शन !
ग्वालियर नगर निगम की बैठक में सोमवार को प्रतिनियुक्ति पर आए अधिकारियों और कर्मचारियों के मुद्दे पर जोरदार हंगामा हुआ। एक टेलीफोन ऑपरेटर के जोनल ऑफिसर के पद पर कार्यरत होने का खुलासा होने के बाद भाजपा पार्षदों ने विरोध प्रदर्शन किया। हंगामे के चलते परिषद की बैठक स्थगित कर दी गई।
निगम में बीते तीन सालों से प्रतिनियुक्ति पर आए अधिकारी और कर्मचारी मलाईदार पदों पर जमे हुए हैं। इन्हें मूल विभाग और पद पर वापस भेजने के आदेश पहले भी हो चुके हैं, लेकिन वे ‘जुगाड़’ के जरिए यहीं बने हुए हैं।
बैठक के दौरान भाजपा पार्षदों ने सभापति से इन कर्मचारियों को उनके मूल विभाग में भेजने की मांग की। निगम आयुक्त की ओर से मिले जवाब से असंतुष्ट होकर पार्षद बृजेश श्रीवास, देवी सिंह राठौर और मनोज यादव सभापति की कुर्सी के सामने धरने पर बैठ गए।

भाजपा के बाकी पार्षदों ने छोड़ा साथ
निगम की बैठक समाप्त होने के बाकी पार्षद चले गए। जबकि वार्ड 21 के भाजपा पार्षद बृजेश श्रीवास चार घंटे बीतने के बाद भी देर रात तक धरने पर बैठे हैं। पूरा हॉल खाली हो गया। उनका कहना है कि क्रांति का बिगुल हमेशा अकेले बजाया जाता है। जैसे-जैसे रात बढ़ती जाएगी, साथी और भी आएंगे। अभी अगर मांग पूरी नहीं होती है तो इसका अगला चरण भी सामने आएगा।
पांच बिंदुओं पर सिमटी बैठक
बैठक हंगामे के चलते पांच बिंदुओं पर सिमट गई। लगभग 6 बजे तक चली इस बैठक में स्थगित होने के बाद भी हंगामा जारी रहा धरने पर बैठे पार्षद बृजेश श्रीवास को उठाने के लिए उनके दल के कई पार्षद गण आए यहां तक की सभापति द्वारा भी उन्हें उठाने का पूरा प्रयास किया गया लेकिन वे अपने बात पर आड़े रहे जिसके चलते सदन में काफी देर तक माहौल कुछ लग रहा।
बता दें, पहले भी बृजेश श्रीवास ने दंडवत यात्रा निकाली थी। जिसमें वे क्षेत्र में गंदे पानी और अन्य समस्याओं को लेकर दंडवत करते हुए परिषद कार्यालय तक पहुंचे थे।

दरअसल, ग्वालियर नगर निगम में बड़ी संख्या में ऐसे अधिकारी और कर्मचारी हैं, जो अन्य विभागों से प्रतिनियुक्ति पर आकर सुविधाजनक पदों पर तैनात हैं। नगरीय प्रशासन विभाग ने 2015 में सभी नगर निगमों के लिए पदों का स्पष्ट सेटअप निर्धारित किया था। तत्कालीन आयुक्त अनय द्विवेदी ने 2016 में इसका कड़ाई से पालन कराया था, लेकिन उनके स्थानांतरण के बाद निगम फिर पुरानी व्यवस्था पर लौट आया।
सभापति और निगम आयुक्त ने जल्द ही व्यवस्था सुधारने का आश्वासन दिया है। इस दौरान दो जोनल अधिकारी प्रगति गोस्वामी और तनुजा वर्मा के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
परिषद की बैठक से आदेश दिए गए हैं कि इन दोनों अधिकारियों ने जहां-जहां पदस्थ रहते हुए कितने बिल बनाए हैं, उनकी पुस्तिका की जांच निगमायुक्त स्वयं या संबंधित अधिकारी से कराएं। जांच पूरी होने तक दोनों का वेतन रोकने के भी आदेश दिए गए हैं।

कर्मचारियों को मूल विभाग में भेजने के आदेश
ग्वालियर नगर निगम में वर्तमान में स्थिति यह है कि सब इंजीनियरों को उपायुक्त, क्लर्क और मीटर रीडरों को जोनल ऑफिसर, कर संग्रहकों को भवन शाखा का प्रभारी और निरीक्षक बना दिया गया है। पीएचई स्टाफ, जिसे पानी वितरण व्यवस्था देखनी चाहिए, वह भी निगम में अच्छे पदों पर जमे हुए हैं।
यह स्थिति तब है, जब मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच पहले ही ग्वालियर नगर निगम में 61 से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों को उनके मूल विभाग में भेजने और खाली पदों को भरने के आदेश दे चुकी है।

