दिल्ली

क्या लोकसभा में पीएम मोदी को खतरा था ??

क्या लोकसभा में पीएम मोदी को खतरा था
स्पीकर बिरला ने क्यों टाली उनकी स्पीच; किस ‘अप्रत्याशित घटना’ का संकेत दिया

22 साल बाद प्रधानमंत्री की गैरमौजूदगी में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पास हुआ। 4 फरवरी को बजट सत्र के 7वें दिन विपक्ष के हंगामे के बीच लोकसभा में पीएम मोदी नहीं पहुंचे।

आज स्पीकर ओम बिरला ने बताया कि लोकसभा में पीएम मोदी के साथ अप्रत्याशित घटना हो सकती थी। इसलिए कल उनकी स्पीच टालनी पड़ी। हालांकि आज पीएम राज्यसभा में भाषण देने पहुंचे, जिसके बाद विपक्ष ने वॉक आउट कर दिया।

आखिर लोकसभा में ऐसा क्या हुआ कि स्पीकर ने पीएम को भाषण न देने की सलाह दी और उन्हें क्या होने की आशंका थी

सवाल-1: लोकसभा में क्या हुआ और स्पीकर ने क्या कहा?

जवाब: 4 फरवरी को पीएम मोदी को लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देना था। शाम 5 बजे जब सदन की कार्यवाही शुरू हुई, तो विपक्ष की महिला सांसदों ने सत्ताधारी नेताओं की कुर्सियां घेर लीं। इनमें पीएम मोदी की कुर्सी भी थी।

हंगामा बढ़ने के बाद सदन की कार्यवाही प्रधानमंत्री के भाषण के बिना ही स्थगित कर दी गई। आज 5 फरवरी को कार्रवाई फिर शुरू हुई। इस दौरान स्पीकर ओम बिरला ने एक दिन पहले सदन स्थगित करने और पीएम का भाषण टालने का कारण बताया। उन्होंने कहा, ‘जब सदन के नेता पीएम मोदी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर जवाब देना था तो विपक्षी सांसद प्रधानमंत्री की सीट के पास पहुंचकर कोई अप्रत्याशित घटना कर सकते थे।’

बिरला ने आगे कहा, ‘अगर ये घटना हो जाती, तो लोकतंत्र की परंपरा तार-तार हो जाती। इसे टालने के लिए मैंने पीएम से सदन में न आने का आग्रह किया। पीएम ने मेरे सुझाव को माना।’

बिरला ने महिला सांसदों का पीएम की कुर्सी तक जाना मर्यादा के खिलाफ बताया। उन्होंने विपक्षी सांसदों से कहा, ‘आप पोस्टर लेकर आएंगे तो सदन नहीं चलेगा। जिस तरह से महिला सदस्य पीएम की सीट तक पहुंचीं, उसे देश ने देखा। ये उचित नहीं था। ये सदन की गरिमा के अनुकूल भी नहीं था।’

सवाल-2: विपक्ष ने ऐसा क्या किया कि स्पीकर ने पीएम को भाषण न देने की सलाह दी?

जवाब: स्पीकर ओम बिरला ने 4 फरवरी को लोकसभा में हुई घटना का जिक्र करते हुए पीएम को भाषण न देने की सलाह दी।

  • पीएम मोदी का भाषण शुरू होने से करीब 15 मिनट पहले विपक्षी सांसदों ने छोटे-छोटे ग्रुप बनाए और आपस में पोस्टर बांटे। विपक्ष की महिला सांसद ये पोस्टर लेकर सदन के वेल में आ गईं और प्रदर्शन करने लगीं।
  • इसके बाद वो ट्रेजरी बेंच यानी सत्ता पक्ष की सीटों की तरफ बढ़ीं और पीएम की कुर्सी को घेर लिया। महिला सांसदों के हाथ में बड़े-बड़े बैनर भी थे, जिन पर लिखा था- ‘जो उचित लगे वो करो।’
  • इस विरोध में केसी वेणुगोपाल, अभिषेक बनर्जी, कल्याण बनर्जी, डिंपल यादव, जेनीबेन नागाजी ठाकोर, वर्षा गायकवाड़, प्रतिभा सुरेश धनोरकर, ज्योतिमणि, रंजीता कोल जैसे सांसद शामिल थे।
  • बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने दावा किया कि वरिष्ठ मंत्रियों के बार-बार कहने पर भी महिला सांसद अपनी सीट पर नहीं गईं। वे प्रधानमंत्री के बैठने की जगह पर चढ़ गए। उन्होंने खूब हंगामा किया। वे प्रधानमंत्री पर हमला भी कर सकते थे।
  • हालांकि कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने इन आरोपों पर कहा कि यह पूरी तरह से झूठ और गलत है कि महिलाएं पीएम पर हमला करने वाली थीं।

सवाल-3: स्पीकर बिरला को संसद में क्या होने की आशंका थी?

जवाब: स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि संसद में कुछ अप्रत्याशित हो सकता था, जिससे लोकतंत्र की परंपरा तार-तार हो जाती। स्पीकर बिरला के मुताबिक, 4 फरवरी को विपक्ष के कई संसदों ने उनके चैंबर का भी घेराव किया था।

ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि संसद में दो तरह की ‘अप्रत्याशित घटना’ हो सकती थी- राजनीतिक विवाद या सुरक्षा पर खतरा।

सदन में इससे पहले हुई अप्रत्याशित घटनाओं से समझते हैं कि लोकसभा में राजनीतिक या सुरक्षा की नजर से क्या अप्रत्याशित हो सकता था…

सदन में हुई अप्रत्याशित राजनीतिक घटनाएं

1988: तमिलनाडु विधानसभा में पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा

  • 1987 में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. जी. रामचंद्रन का निधन हो गया। जनवरी 1988 में उनकी पत्नी जानकी और राज्यसभा सांसद जे. जयललिता के समर्थकों के बीच विवाद हो गया।
  • विधायकों ने एक-दूसरे पर कुर्सियां और माइक फेंके। एक घंटे तक हंगामा चलता रहा। आखिरकार पुलिस को सदन में आकर लाठीचार्ज करना पड़ा। 20 से ज्यादा विधायक घायल हुए और 100 से ज्यादा माइक तोड़े गए।
सदन में विवाद के बाद पुलिस लाठीचार्ज करते हुए।
सदन में विवाद के बाद पुलिस लाठीचार्ज करते हुए।

1989: जे. जयललिता की साड़ी खींची

  • 1989 में बजट सेशन के दौरान एक बार फिर तमिलनाडु विधानसभा में हंगामा हो गया। इसमें DMK और जे. जयललिता के समर्थक आपस में भिड़ गए।
  • मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री करुणानिधि ने जैसे ही बजट भाषण पढ़ना शुरू किया, कांग्रेस के एक विधायक खड़े होकर बोलने लगे कि मुख्यमंत्री पुलिस के जरिए जयललिता को परेशान कर रहे हैं। जयललिता भी खड़ी होकर विरोध करने लगीं।
  • करुणानिधि जवाब देते इससे पहले एक विधायक उनके तरफ दौड़ा, जिससे वे गिर गए और उनका काला चश्मा टूट गया।
  • इसके बाद जयललिता बाहर जाने लगीं, लेकिन विधायकों ने उनका रास्ता रोक लिया। उनके बाल और साड़ी का पल्लू खींचा।
सदन में हंगामे के बाद जयललिता विधानसभा से रोती हुई बाहर आती दिखीं। उनके बाल भी बिखरे हुए थे।
सदन में हंगामे के बाद जयललिता विधानसभा से रोती हुई बाहर आती दिखीं। उनके बाल भी बिखरे हुए थे।

1997: उत्तर प्रदेश में विधायकों ने कुर्सियां और माइक फेंके

  • 22 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे कार्यवाही शुरू होते ही अफरा-तफरी मच गई । कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रमोद तिवारी सदन के विभाजन की मांग करते हुए अंदर आए।
  • उनके पीछे बहुजन समाज पार्टी के विधायकों का एक समूह भी था। रिपोर्ट्स के मुताबिक एक विधायक ने अध्यक्ष की कुर्सी पर एक छोटा लाउडस्पीकर फेंक दिया।
  • इससे झड़प शुरू हो गई और उसके बाद हुई हाथापाई में सदन के सदस्यों ने एक-दूसरे पर हमला करने के लिए माइक्रोफोन स्टैंड, पेपरवेट, कांच के टुकड़े और फर्नीचर का जमकर इस्तेमाल किया।
उत्तर प्रदेश विधानसभा में हुए हंगामे के दौरान विधायकों ने अपनी सीट पर लगे माइक फेंके। कई विधायक घायल भी हुए।
उत्तर प्रदेश विधानसभा में हुए हंगामे के दौरान विधायकों ने अपनी सीट पर लगे माइक फेंके। कई विधायक घायल भी हुए।

2014: कांग्रेस सांसद ने चलाया मिर्ची स्प्रे

  • 13 फरवरी 2014 को जैसे ही गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने आंध्र प्रदेश पुनर्गठन विधेयक पेश करने की कोशिश की, तभी हंगामा होने लगा।
  • विजयवाड़ा से कांग्रेस सांसद लगडापति राजगोपाल लोकसभा के बीचों-बीच ‘वेल’ में आ गए। उन्होंने जेब से मिर्ची स्प्रे निकाला और चारों तरफ छिड़कना शुरू कर दिया।
  • सदन में तीखी गंध और जलन फैल गई। सांसद खांसने लगे, उनकी आंखों में पानी आने लगा और सांस लेना मुश्किल हो गया। कई सांसद बाहर की तरफ भागे।
  • रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ सांसदों के बीच धक्का-मुक्की हुई। एक सांसद पर आरोप लगा कि उन्होंने कांच का गिलास तोड़ा और चाकू दिखाया। बाद में कहा गया कि ये माइक था।
  • तब स्पीकर मीरा कुमार ने संसद स्थगित की। एंबुलेंस बुलाई और तीन सांसदों को अस्पताल भेजा गया। स्पीकर ने लगडापति राजगोपाल समेत 16 सांसदों को सदन से सस्पेंड कर दिया।
सदन में पेपर स्प्रे छिड़कने के बाद सांसद आंख मलते हुए सदन से बाहर आए।
सदन में पेपर स्प्रे छिड़कने के बाद सांसद आंख मलते हुए सदन से बाहर आए।

2016: विधायक ने मंत्री पर जूता फेंका

  • 14 सितंबर 2016 को पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान कांग्रेस विधायक, अकाली दल-बीजेपी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की मांग कर रहे थे।
  • इसी दौरान कांग्रेस विधायक तरलोचन सिंह सूंध ने राजस्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया पर गुस्से में जूता फेंक दिया ।
  • बिक्रम सिंह मजीठिया खड़े हुए और जूता उठाकर सदन को दिखाया। सदन को कुछ ही देर में स्थगित कर दिया गया।
पंजाब सरकार में तब संसदीय कार्यमंत्री रहे मदन मोहन मित्तल ने कांग्रेस विधायक तरलोचन सिंह सूंध का फेंका जूता दिखाया और घटना का विरोध किया।
पंजाब सरकार में तब संसदीय कार्यमंत्री रहे मदन मोहन मित्तल ने कांग्रेस विधायक तरलोचन सिंह सूंध का फेंका जूता दिखाया और घटना का विरोध किया।

सदन की सिक्योरिटी अप्रत्याशित घटनाएं

1994: विजिटर गैलरी से एक आदमी कूद गया

  • अप्रैल 1994 में प्रेमपाल सिंह नाम का एक व्यक्ति संसद की विजिटर गैलरी में बैठा था। अचानक उसने रेलिंग लांघी और सदन के फर्श पर कूद गया।
  • तब संसद चल रही थी। सुरक्षाकर्मियों ने उसे तुरंत दबोच लिया। उसके पास कोई हथियार नहीं था। वह केवल विरोध करना चाहता था।
  • इस घटना के बाद दर्शक दीर्घा की ऊंचाई और वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों की संख्या बढ़ाई गई, ताकि कोई दोबारा कूद न सके।

2001: संसद भवन पर आतंकी हमला

  • 13 दिसंबर 2001 को लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के 5 आतंकियों ने AK-47 और ग्रेनेड से हमला किया।
  • सिक्योरिटी फोर्सेस ने पांचों आतंकियों को मार गिराया। इस हमले में दिल्ली पुलिस के 5 जवान, CRPF की 1 महिला कांस्टेबल और संसद के 2 सुरक्षा सहायक शहीद हुए।
  • इसी हमले के बाद संसद की सुरक्षा बढ़ाई गई और पार्लियामेंट ड्यूटी ग्रुप यानी PDG बना।
हमले से आधे घंटे पहले संसद के दोनों सदन स्थगित कर दिए गए थे। हालांकि करीब 100 से ज्यादा सांसद हमले के समय अंदर मौजूद थे।
हमले से आधे घंटे पहले संसद के दोनों सदन स्थगित कर दिए गए थे। हालांकि करीब 100 से ज्यादा सांसद हमले के समय अंदर मौजूद थे।

2002: ओडिशा विधानसभा में बजरंग दल, विहिप का हंगामा

  • 22 मार्च 2002 को बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के करीब 500 कार्यकर्ता अयोध्या में राम मंदिर बनाने के नारे लगाते हुए ओडिशा विधानसभा परिसर में घुस गए।
  • भीड़ ने सुरक्षा घेरा तोड़ दिया और सदन के भीतर जमकर तोड़फोड़ की। फर्नीचर, टेलीफोन और खिड़कियों के शीशे तोड़े। तब सदन की कार्यवाही चल रही थी।
  • कई विधायकों को जान बचाने के लिए इधर-उधर छिपना पड़ा। अटल बिहारी वाजपेयी ने इस घटना को कलंक कहा। बाद में इस मामले में करीब 67 गिरफ्तारियां हुईं।

2023: संसद में घुसे 2 युवक, पीले धुएं वाले कैनिस्टर छोड़े

  • 13 दिसंबर 2023 को शून्य काल के दौरान 2 युवक सागर शर्मा और मनोरंजन डी विजिटर गैलरी से सीधे सांसदों के बैठने वाली जगह पर कूद गए।
  • उन्होंने जूतों में छिपाकर रखे कलर स्मोक कैनिस्टर निकाले और पीला धुआं फैलाया। नारेबाजी की। उसी समय संसद के बाहर भी उनके दो साथियों नीलम और अमोल ने धुआं छोड़ा।
  • हनुमान बेनीवाल, मलूक नागर जैसे सांसदों ने खुद हिम्मत दिखाते हुए सागर और मनोरंजन को पकड़ा और सुरक्षाकर्मियों के हवाले किया।
  • इस घटना के बाद संसद की सुरक्षा CISF को सौंप दी गई। अब जूतों की भी स्कैनिंग की जाती है और प्रोटोकॉल भी सख्त किए गए हैं।
आरोपियों ने 2001 संसद हमले के 22 साल होने पर संसद में घुसपैठ की थी।
आरोपियों ने 2001 संसद हमले के 22 साल होने पर संसद में घुसपैठ की थी।

सवाल-4: अगर हंगामा बढ़ता या कुछ अप्रत्याशित होता, तो फिर क्या होता?

जवाब: संसद में अगर कोई अप्रत्याशित घटना या बहुत ज्यादा हंगामा होता है, तो सिक्योरिटी प्रोसिजर और प्रोटोकॉल तुरंत एक्टिव हो जाता है…

1. सदन की कार्यवाही रोकना

  • जैसे ही हंगामा कंट्रोल से बाहर होता है या कोई सुरक्षा खतरा दिखता है, लोकसभा स्पीकर या राज्यसभा के सभापति तुरंत सदन की कार्यवाही को स्थगित कर देते हैं।
  • उन्हीं के आदेश पर मार्शल और सुरक्षा अधिकारी संसद में आते हैं और सुरक्षा घेरा बनाते हैं।
  • मार्शल्स के ही जिम्मे सदन की व्यवस्था और सुरक्षा होती है। अगर कोई सांसद या विजिटर हंगामा करता है और सदन की मर्यादा तोड़ता है, तो स्पीकर के आदेश पर मार्शल उन्हें बाहर निकाल सकते हैं।

2. सांसदों और मंत्रियों की सुरक्षा

  • पार्लियामेंट सिक्योरिटी सर्विस यानी PSS और सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स यानी CISF के जवान तुरंत प्रधानमंत्री, मंत्रियों, विपक्ष के नेताओं और सांसदों को सुरक्षित रास्तों से बाहर निकालते हैं।
  • सुरक्षा के लिहाज से सदन के सभी एंट्री और एग्जिट गेट लॉक कर दिए जाते हैं, ताकि कोई बाहरी व्यक्ति अंदर न आ सके और संदिग्ध बाहर न भाग सके।

3. सुरक्षा चूक पर लॉकडाउन

  • अगर 2001 या 2023 जैसी कोई गंभीर घटना होती है, तो CISF और दिल्ली पुलिस की बाहरी टीमें पूरे परिसर को चारों तरफ से सील कर देती हैं।
  • पास में ही तैनात पार्लियामेंट ड्यूटी ग्रुप यानी PDG और जरूरत पड़ने पर नेशनल सिक्योरिटी ग्रुप यानी NSG कमांडो को अलर्ट पर रखा जाता है।
  • किसी भी रिमोट कंट्रोल डिवाइस या मोबाइल सिग्नल को रोकने के लिए जैमर्स को हाई-पावर मोड पर डाल दिया जाता है।

4. कानूनी सख्त कार्रवाई

  • हंगामा करने वाले सांसदों को नियम 373 या 374 के तहत स्पीकर या सभापति सदन से निलंबित कर सकते हैं।
  • अगर कोई बाहरी व्यक्ति जैसे- विजिटर हंगामा करता है, तो उसे तुरंत हिरासत में लेकर संसद पुलिस स्टेशन को सौंप दिया जाता है। यहां उस पर गैर-जमानती धाराओं के तहत मामला दर्ज होता है।

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