दिल्ली

अमेरिका को आखिर किस दिशा में लेकर जा रहे हैं ट्रम्प?

अमेरिका को आखिर किस दिशा में लेकर जा रहे हैं ट्रम्प?

ट्रम्प की रणनीतियों के चलते यह समझना मुश्किल है कि अधिनायकवाद की ओर अमेरिका की फिसलन में निर्णायक मोड़ कब आ सकता है। कुछ लोग कह सकते हैं कि यही इस रणनीति का उद्देश्य है- लोगों के अधिकारों और संस्थागत नियंत्रण पर धीरे-धीरे अतिक्रमण कर लेना। लेकिन हम मान सकते हैं कि मिनियापोलिस में इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (आईसीई) एजेंटों द्वारा दो अमेरिकी नागरिकों की हत्या शायद वही निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है।

सत्तावादी सरकारों की एक प्रमुख पहचान यह होती है कि वे अपने विरोधियों के विरुद्ध अत्यधिक बलप्रयोग करने पर आमादा हो जाती हैं। यों तो तकरीबन हर सरकार पुलिसिंग के जरिए किसी न किसी रूप में दमन के उपाय अपनाती ही है, लेकिन इसकी स्पष्ट सीमाएं भी होती हैं।

मसलन, ब्रिटेन की सरकार कुछ स्थानों से प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए मामूली बलप्रयोग कर सकती है। लेकिन यह कल्पना करना भी असंभव है कि ब्रिटेन में पुलिस अंधाधुंध तरीके से प्रदर्शनकारियों की हत्या कर देगी, जैसा कि अमेरिका में हुआ है।

अरब स्प्रिंग के दौरान जब विरोध-प्रदर्शन शुरू हुए थे, तब बशर अल-असद की हिंसक प्रतिक्रिया ने किसी को भी चकित नहीं किया। क्योंकि अधिकांश लोग यह जानते और समझते हैं कि अधिनायकवादी सरकारें विपक्ष, स्वतंत्र मीडिया और नागरिक समाज के अन्य स्तम्भों के विरुद्ध इसी तरह का बलप्रयोग करती हैं।

लोकतांत्रिक या व्यापक रूप से गैर-अधिनायकवादी समाजों में किसी भी प्रतिरोध के विरुद्ध इस प्रकार के हिंसात्मक दमन को कई बाधाओं का सामना करना पड़ता है। अव्वल तो खुद सरकार के दूसरे विभागों और सिविल सोसायटी की ओर से इसका कड़ा विरोध किया जा सकता है।

दूसरे, सरकार यह भी सुनिश्चित नहीं कर सकती कि उसके सुरक्षा बल ऐसे आदेश का पालन करेंगे ही। मसलन, ट्रम्प के पहले कार्यकाल के दौरान ही अमेरिकी सैन्य नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया था कि वे ऐसे आदेशों को नहीं मानेंगे। लेकिन आईसीई ने 2025 के दौरान अपने विस्तार को काफी बढ़ाया है और तमाम संकेतों से लगता है कि उसने ऐसे युवा कर्मियों को भर्ती किया है जो ट्रम्प के एजेंडे के प्रति सहानुभूति रखते हैं।

उन्हें ऐसे तौर-तरीकों के इस्तेमाल की अनुमति दी गई है, जो पहले किसी संघीय एजेंसी के लिए असम्भव माने जाते थे। न्याय विभाग ने भी आईसीई की अवैध मानी जाने वाली कार्रवाइयों के लिए अटूट समर्थन दिखाया है, यहां तक कि उन्हें जांच के दायरे में लाने से भी इनकार किया है।

मिनेसोटा में हुई घटनाओं का प्रतीकात्मक महत्व निर्विवाद है। आईसीई दो निर्दोष नागरिकों की हत्या कर चुका है : रेने गुड, तीन बच्चों की एक मां, जिन्हें अपने बेटे को स्कूल छोड़ आने के बाद गोली मार दी गई, और एलेक्स प्रेट्टी, एक गहन चिकित्सा नर्स, जो आईसीई के एक छापे की रिकॉर्डिंग कर रही थीं।

ये संघीय एजेंट अकसर उनकी गतिविधियों को दर्ज करने वाले विरोधियों को धमकाते हैं और उनसे हिंसात्मक तरीकों से निपटते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ट्रम्प प्रशासन ने आईसीई एजेंटों को व्यावहारिक रूप से प्रतिरक्षा प्रदान करके उन्हें अपनी हिंसात्मक रणनीतियां तेज करने की हरी झंडी दे दी है।

यदि इस हिंसा पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो यह वास्तव में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि यह उन अन्य सुरक्षा बलों के लिए एक नजीर कायम कर देगी, जो ट्रम्प के अधिक निकट हैं, ताकि वे किसी भी प्रकार के विरोध-प्रदर्शन के विरुद्ध निरंकुश बलप्रयोग कर सकें। ऐसी स्थिति में अधिनायकवादी शासन की ओर फिसलन को पलटना कठिन हो जाएगा, क्योंकि बढ़ते दमन के सामने नागरिक समाज निष्क्रिय होता जाएगा और लोकतांत्रिक मानदंड धीरे-धीरे क्षीण होते चले जाएंगे।

पहले ही, सरकार की वे दो शाखाएं जिन्हें राष्ट्रपति की शक्ति पर अंकुश लगाना चाहिए था- कांग्रेस और सुप्रीम कोर्ट- ट्रम्प के एजेंडे के प्रति असाधारण रूप से सहानुभूतिपूर्ण साबित हुई हैं। उतना ही महत्वपूर्ण यह है कि संस्थागत संतुलन भी कमजोर पड़ चुका है, विशेष रूप से इसलिए क्योंकि राष्ट्रपति को अपने सहयोगियों और वफादारों को निर्णायक पदों पर नियुक्त करने की खुली छूट मिल गई है।

ट्रम्प का उद्देश्य एक ऐसे निरंकुश, साम्राज्यवादी राष्ट्रपति पद का निर्माण करना है जिस पर प्रभावी नियंत्रण न हो- और यही वह रास्ता है जिसके जरिये अधिनायकवाद को संस्थागत रूप दिया जाता है। हंगरी से लेकर इक्वाडोर, मैक्सिको, निकारागुआ, तुर्की और वेनेजुएला तक के समकालीन उदाहरण इस प्रक्रिया को स्पष्ट रूप से दिखाते हैं।

सत्तावादी सरकारों की एक प्रमुख पहचान यह है कि वे अपने विरोधियों के विरुद्ध अत्यधिक बलप्रयोग करने पर आमादा हो जाती हैं। विपक्ष, मीडिया और नागरिक समाज के अन्य स्तम्भों के विरुद्ध दमन की नीति अपनाई जाने लगती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *