Delhi Air Pollution: पढ़िए, वायु प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने उठाए हैं कौन से 5 बड़े कदम, आखिर क्यों फेल हो रही है रणनीति

सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषण के बढ़ते प्रदूषण पर चिंता जाहिर करते हुए केंद्र सरकार को जमकर फटकार लगाई. वहीं, कोर्ट ने सरकार को प्रदूषण से निपटने के लिए 2 दिन का लॉकडाउन लगाने की सलाह भी दी.

दिल्ली में प्रदूषण का कहर लगातार जारी है. इसी बीच शनिवार को दिल्ली के बढ़ते प्रदूषण की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सुनवाई की. इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषण के बढ़े हुए स्तर पर चिंता जाहिर करते हुए केंद्र सरकार को जमकर फटकार लगाई. वहीं, कोर्ट ने सरकार को प्रदूषण से निपटने के लिए तत्काल उपाय के तौर पर 2 दिन का लॉकडाउन (Lockdown) लगाने की सलाह भी दी. कोर्ट ने ऐसे हालातों में स्कूल खोलने पर भी चिंता जाहिर की.

दरअसल, अब सवाल उठता कि आखिर हर साल इसी समय पर दिल्ली-NCR में प्रदूषण की समस्या होती है. तो इसको लेकर पहले से क्या कदम उठाए जाते हैं और उनकी असफलता का कारण क्या है. हालांकि सुप्रीम कोर्ट में अब इस मामले की अगली सुनवाई 15 नवंबर को होगी. साथ ही कोर्ट ने केंद्र से वायु प्रदूषण को कंट्रोल करने की दिशा में उठाए गए कदमों के बारे में सूचित करने को कहा गया है.

दिल्ली सरकार ने प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए उठाए 5 बड़े कदम और फैसले

1- दिल्ली में खुले में कूड़ा जलाने पर रोक लगाई. साथ ही 11 नवंबर से 11 दिसंबर तक एंटी ओपन बर्निंग कैम्पेन लॉन्च किया गया. इसके तहत 10 विभागों की टीमें गठित की गई, जिसमें 550 लोगों की टीम बनाई गई है जो दिन और रात में दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में ओपन बर्निंग की जांच के लिए पेट्रोलिंग करेंगी.

2- एंटी डस्ट कैम्पेन का दूसरा फेज 12 नवंबर से 12 दिसंबर तक के लिए शुरू किया गया. इसके साथ ही सभी विभाग एंटी डस्ट सेल बनाएंगे. दिल्ली प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के साथ दिल्ली सरकार के सभी विभाग आपस में एक साथ सामंजस्य स्थापित कर काम करेंगे. हालांकि अब तक एंटी डस्ट कैम्पेन के तहत 450 से ज्यादा साइट्स पर नियमों का उलंघन पाए जाने पर 1 करोड़ 23 लाख रुपए से ज्यादा का जुर्माना लगाया जा चुका है.

3- दिल्ली में GRAP सिस्टम लागू है, जिसके तहत डीजल जनरेटर सेट का इस्तेमाल रोकने, पार्किंग फीस बढ़ाने, मेट्रो और बस की फ्रीक्वेंसी बढ़ाने के अलावा RWA को हीटर बांटने के निर्देश भी विभागों को दिए गए हैं, जिससे सिक्योरिटी गार्ड ठंड से बचने के लिए लकड़ी या कोयला ना जलाएं.

4- दिल्ली NCR में प्रदूषण की एक बड़ी वजह पराली का जलाना भी है, इसे रोकने के लिए दिल्ली सरकार की ओर से दिल्ली के अंदर 2300 एकड़ खेत में बायो डि-कंपोजर घोल का छिड़काव किया जा चुका है. वहीं, 20 नवंबर तक इसे बढ़ाकर 4000 एकड़ करने का टारगेट तय किया गया है.

5- वायु प्रदूषण को काबू पाने के लिए जगह जगह पानी का छिड़काव किया जा रहा है, जिसमें PWD के 100 से ज्यादा पानी के टैंकर और वाटर स्प्रे मशीन लगाई गई है, इसके लिए MCD, DSIDC और कंटेनमेंट बोर्ड की भी मदद ली जा रही है.

जानिए क्यों फेल हो रहे हैं दिल्ली सरकार के उपाय?

1-  दिल्ली में कृषि योग्य भूमि बहुत कम है, कम एरिया में खेती होती है इसलिए दिल्ली सरकार की पराली के निपटान की योजना का असर भी सीमित है, पराली का प्रदूषण मुख्य रूप से पंजाब और हरियाणा से आता है.

2- दिल्ली में प्रदूषण पर काबू पाने और हवा को स्वच्छ बनाने के लिए दिल्ली सरकार की तरफ से दिल्ली में कुछ जगहों पर स्मॉग टावर लगाने की योजना बनाई गई है, जिसके तहत कनाट प्लेस में भी ऐसे ही स्मॉग टावर का निर्माण कराया है. लेकिन इन स्मॉग टावर्स की क्षमता बेहद सीमित होती है.

3-  प्रदूषण पर काबू पाने के लिए दिल्ली सरकार के असफल होने का एक बड़ा कारण दिल्ली का घटता हरित क्षेत्र भी है, हालांकि दिल्ली सरकार वृक्षारोपण का काम करती रहती है, लेकिन जमीनी स्तर पर उसका उतना असर नहीं दिखता.

4- दिल्ली सरकार की ओर से निर्माण स्थलों पर एंटी डस्टिंग गन लगाना अनिवार्य कर दिया है, लेकिन इसके दायरे में बड़े बड़े निर्माण क्षेत्र भी आते हैं.ऐसे में छोटी छोटी जगहों पर बड़ी संख्या में बिना नियमों के पालन के निर्माण कार्य चलता रहता है और हवा में PM 2.5 और PM 10 की मात्रा का स्तर बढ़ता रहता है.

5-दिल्ली-NCR में चल रहे उद्योगों से निकलने वाला प्रदूषण भी है. हालांकि दिल्ली की हवा को स्वच्छ रखने के लिए दिल्ली के सभी प्रदूषणकारी उद्योगों को दिल्ली से बाहर निकाल दिया गया था लेकिन दिल्ली से सटे नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद और गुरुग्राम में स्थापित में चल रहे उद्योगों की मार अभी भी दिल्ली की आबोहवा में देखने को मिलती है.

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