पति है कैलेंडर नहीं, बदलने की कोशिश मत कीजिए और जो ज्यादा है उसे बांट दीजिए
आज 2021 का आखिरी दिन है। नए साल की शुरुआत होने जा रही है। उत्साह और जश्न तो जरूरी है, लेकिन हमें यह भी देखना होगा कि गुजरा साल हमें क्या कुछ सिखा गया। इस साल हमने क्या गलत किया, जिसका हमें एहसास देर से हुआ और वो गलतियां आने वाले साल में हम न दोहराएं। महिलाओं के लिए 2022 कैसे खुशहाल बनें, यह बात लाइफ कोच पीयूष भाटिया बता रही हैं।
पति है, कैलेंडर नहीं, उसे बदलने की कोशिश मत कीजिए – लाइफ कोच पीयूष बताती हैं कि उनके पास कई ऐसी महिलाएं आती हैं, जिनकी शिकायत होती है कि उनका पति कम एक्सप्रेसिव है। वो अपने प्यार का इजहार नहीं करते, जिसकी वजह से पत्नी बुरा महसूस करती हैं। अपने पति को बदलने की कोशिश मत कीजिए। हर रिश्ता एडजस्टमेंट मांगता है, व्यक्ति रातों-रात नहीं बदल सकता। इसलिए हर रिश्ते को खूबसूरती से निभाएं।
सिर्फ शादी हुई है, जिंदगी नहीं बीती, खुद का ख्याल रखें – कई लड़कियां शादी के बाद खुद पर ध्यान देना बंद कर देती हैं। आने वाले साल में ये गलती न करें। घर-परिवार में मेल-जोल बढ़ाना अच्छी बात है, लेकिन इस सबके बीच खुद को न भूलें। सेहत को नजरअंदाज न करें, फिटनेस को आदत बनाएं, खुश रहें और दूसरों को भी खुश रखें।

बराबरी की बातें नहीं अब काम करने की बारी है – पुरुष और महिला दोनों बराबर हैं। नए साल में महिलाओं के हक के लिए होने वाली बहस की भीड़ बनने की बजाय उदहारण बनने की कोशिश करें। बीते साल तक जो ख्वाहिशें दिल में रह गईं, उन्हें पूरा करने के रास्ते ढूंढें। बराबरी चाहती हैं तो, जिम्मेदारियों और खुशियों को बराबर से बांटें। एक दूसरे का सपोर्ट सिस्टम बने और ख्याल रखें।
कुदरत से सीख लीजिए, जो ज्यादा हो बांट दीजिए – कोविड ने हमें बहुत कुछ सिखाया है। आने वाले साल में दूसरों के दुखों को समझें और एक दूसरे के काम आएं। जरुरतमंदों की मदद करने आगे आएं और विनम्र बनें। नए साल में खुद से ये वादा करें कि अपनी क्षमता के अनुसार किसी बच्चे या परिवार की मदद करेंगे।
मुश्किलों ने सिखाया है डटकर खड़े रहना – 2021 में हमने समय का वो भयानक चेहरा देखा, जो पीढ़ियां याद रखेंगी।कोरोना की पहली और दूसरी लहर में कई लोगों ने अपने करीबियों को खोया और उनके बिना जीना सीखा। यह साल हमें यह सिखा गया कि हमारा आत्मबल ही हमें मुश्किलों से पार दिलाती है। इन शक्तियों को हम मुसीबतों का सामना करने के दौरान ही पहचान पाते हैं। हमारे अंदर का हौंसला ही हमारी ताकत है।
अपने पैसों को खुद ही संभालने की जिम्मेदारी लीजिए – लाइफ कोच पीयूष ये भी कहती हैं कि महिलाएं इस डर में जीती हैं कि वह पैसे नहीं संभाल पाएंगी। मनी इंवेस्टमेंट से जुड़ी बातें समझने से बचती हैं और सारी जिम्मेदारी घर के पुरुषों को सौंप देती हैं। 2021 तक की जाने वाली इस गलती से सीख लीजिए और कोशिश कीजिए फाइनेंस के हर वो दांव-पेंच समझने की, जिससे अब तक बचती आई हैं। जो कभी नहीं किया उसकी शुरुआत नए साल के पहले दिन से करना शुरू कर दें।