ग्वालियर,  हजीरा थाना प्रभारी मनीष धाकड़ की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। हाई कोर्ट की एकल पीठ ने एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई के दाैरान टिप्पणी करते हुए कहा कि थाना प्रभारी को कानून का प्राथमिक ज्ञान नहीं है। भिंड से एक नाबालिग को बरामद किया जाता है, उसके बयान के बाद पता लगाने की कोशिश नहीं की गई कि वह भिंड कैसे पहुंची। जिस मकान में किराए से रह रही थी, उस मकान मालिक से पूछताछ की भी कोशिश नहीं की गई। ऐसा लगता है कि किसी को बचाने की कोशिश है। यह टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने पुलिस अधीक्षक अमित सांघी को पूरे मामले की 17 जून तक स्टेट्स रिपोर्ट मांगी है।

हाईकोर्ट में एक महिला ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की। उसकी ओर से तर्क दिया कि उसकी 15 साल की नाबालिग बेटी घर से गायब हो गई है। पुलिस में भी शिकायत की, लेकिन पुलिस उसकी कोई मदद नहीं कर रही है। हाई कोर्ट से पुलिस को नोटिस जारी होने के बाद 9 जून 2022 को भिंड से नाबालिग काे बरामद कर लिया। धारा 164 के तहत बयान दर्ज कर नारी निकेतन में भेज दिया। सोमवार को पुलिस ने नाबालिग को न्यायालय में पेश किया, उसने अपनी मां के साथ जाने की सहमति दी। हालांकि पुलिस ने इस मामले में आगे कोई जांच नहीं की। नाबालिग को कौन साथ लेकर गया था और कैसे भिंड पहुंची, इसका कोई खुलासा नहीं किया। मामला अज्ञात ही बना हुआ था। जब संबंधित पुलिसकर्मी से कोर्ट ने यह सवाल किए तो वह जवाब नहीं दे सके। हाई कोर्ट ने लंच के बाद पुलिस अधीक्षक अमित सांघी व थाना प्रभारी मनीष धाकड़ को तलब कर लिया। मनीष धाकड़ भी इस संबंध में जवाब नहीं दे सके। कोर्ट ने पाया कि इन्हें कानून का प्राथमिक ज्ञान नहीं है। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि इस मामले को खुद देखेंगे। रिपोर्ट पेश करेंगे।

-भिंड में माधव दंडौतिया ने नाबालिग को किराए पर मकान दिया था। क्या मकान मालिक को पता था कि लड़की नाबालिग है। उसके खिलाफ पुलिस ने क्या कार्रवाई की। उसे किस आधार पर मकान किराए पर दिया।

-नाबालिग के बरामद होने के बाद उसका चिकित्सकीय परीक्षण कराया नहीं। यह पता नहीं किया गया कि वह किसी के बहकावे में तो नहीं गई।

– इस पूरे मामले की पड़ताल पुलिस अधीक्षक कराएंगे। 17 जून को इस मामले की सुनवाई कोर्ट में फिर होगी, जिसके चलते केस डायरी के जांच अधिकारी व थाना प्रभारी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।