रूरल स्टूडेंट्स 3 तरीकों से कॉम्पिटिटिव एग्जाम क्रैक करें
रूरल स्टूडेंट्स 3 तरीकों से कॉम्पिटिटिव एग्जाम क्रैक करें:ऑनलाइन कोचिंग करें, सही मार्गदर्शन जरूर लें
मोनिका कुमार की रचना नकोदर-होशियारपुर अप-डाऊन से ….
‘रोज एक ही सड़क और लगभग एक ही बस में चार वर्षों तक दो घंटे सुबह और दो घंटे शाम को बैठने से धैर्य बढ़ता है। रोज जाने अनजाने चेहरे पढ़ने से आपके भीतर ऐसी प्रज्ञा जन्म ले सकती है जैसे आप इस दुनिया के सारे चेहरे पढ़ चुके हैं। पचपन लोगों के साथ अकेले सफर करने के बाद आप पांच सौ, पांच हजार और पांच लाख तक की संख्या तक के सहयात्रियों के साथ अकेले लेकिन निडर होकर यात्रा कर सकते हैं।
अत्यधिक आबादी वाले देश में सार्वजनिक स्थानों को रोने जैसे बेहद निजी कामों के लिए इस्तेमाल करने का गुण अर्जित करना अब कोई दूर की बात नहीं। वर्जित जो भी है अधीर के लिए वर्जित है। संसार को रोज चलती हुई बस के बाहर के पेड़ों की तरह आगे पीछे छोड़ने से यह एक दिन स्थिर हो जाएगा। आप संसार से दुख पाना बंद कर देंगे। जबकि संसार में अब अधिक नहीं बचा देखने के लिए लेकिन सौभाग्यवश संसार की इच्छा का अंत जीवन के संघर्ष और सुख का अंत नहीं है।’
ग्रामीण छात्रों की स्थिति का सटीक वर्णन
मोनिका कुमार की उपरोक्त रचना भारत के लाखों ग्रामीण विद्यार्थियों के संघर्ष में छुपे अध्यात्म और दर्शन को उजागर करती हैं।
सबको पता है भारत में कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स में सफलता असमान रूप से देश के सबसे अच्छे कॉलेजों तक सीमित है। चुनौतीपूर्ण घरेलू वातावरण, कम संसाधन वाले स्कूल, कोचिंग संस्थानों में दाखिला लेने के लिए धन की कमी और बढ़िया मार्गदर्शन कर सकने वालों की कमी, रूरल स्टूडेंट्स के लिए प्रॉब्लम बन जाते हैं।
क्योंकि ये चुनौतियां आज भी बनी हुईं हैं, इसलिए असमानता भी बनी हुई है। लेकिन अब वक्त बदल रहा है।
आज हम बात करेंगे कैसे भारत के ग्रामीण स्टूडेंट्स कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स की तैयारी बेहतर कर सकते हैं। ये लेख उनके लिए नहीं जो शहर जा चुके हैं या जाने वाले हैं, बल्कि उनके लिए तो गांव में ही रहकर तैयारी करने वाले हैं।
ग्रामीण छात्रों के लिए 3 सटीक सुझाव
1.. मजबूत नींव चाहिए:
A. ग्रामीण स्टूडेंट्स के लिए कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स में सफल ना हो पाने का एक बड़ा कारण कमजोर स्कूली शिक्षा के बेसिक आधार का कमजोर होना है।
B. इसको ठीक करने का प्रयास पेरेंट्स और बड़े लोगो की तरफ से आना होगा और प्रयास ये हों कि वे बच्चों को गांव के आस-पास स्थित सबसे अच्छे स्कूल में ही पढ़वायें।
C. स्कूल मैनेजमेंट से अच्छे टीचर्स की डिमांड करें।
D. जवाहर नवोदय विद्यालय (जेएनवी): इस चुनौती को 1985 में जवाहर नवोदय विद्यालय (जेएनवी) की स्थापना करके संबोधित किया गया था। ये भारत में मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों से प्रतिभाशाली छात्रों के लिए केंद्रीय विद्यालयों की एक प्रणाली है।
नवोदय विद्यालय समिति, नई दिल्ली द्वारा संचालित, स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग के तहत एक स्वायत्त संगठन है। देश के लगभग हर जिले में स्थित ये आवासीय विद्यालय प्रत्येक जिले में इन स्कूलों में प्रवेश पाने के लिए, प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले 1% छात्रों को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान करते हैं।
2 .. सही दृष्टिकोण:
A . ग्रामीण स्टूडेंट्स के लिए अच्छी शिक्षा वाले क्षेत्रों से दूरी और लोकल स्तर पर मार्गदर्शन में कमी से उनके समय और ऊर्जा दोनों की बर्बादी होती है। तो अब सही दृष्टिकोण आवश्यक हो जाता है।
B. ग्रामीण क्षेत्र के छात्र सबसे पहले अपनी पसंदीदा कॉम्पिटिटिव एग्जाम के पाठ्यक्रम का अवलोकन कर लें।
C. उसके बाद विश्वसनीय अध्ययन सामग्री से अध्ययन करना शुरू करें। अध्ययन सामग्री शहरों से मंगवायी जा सकती है।
D. परीक्षा हेतु मार्गदर्शन के लिए छात्रों को अपने किसी सीनियर या किसी कोचिंग संस्थान से संपर्क में रहना बेहतर होगा।
E. यदि बेसिक्स कमजोर हैं तो शुरुआत सरल किताबों से करनी चाहिए। उस विषय-सम्बंधित बेसिक (आधारभूत) समझ डेवेलप करने के बाद विषय की विश्वसनीय बुक्स का अध्ययन करना चाहिए।
3 … ऑनलाइन एजुकेशन:
A . तकनीक और इंटरनेट के फैलाव का लाभ उठाएं। अब ग्रामीण स्टूडेंट्स को कोचिंग क्लासेज में जाने के लिए रोज कई किलोमीटर का सफर तय करने की जरूरत नहीं, और घर-बैठे ऑनलाइन एजुकेशन प्राप्त कर सकते हैं।
B ..एक अच्छे इंटरनेट कनेक्शन में इन्वेस्ट करें, और आसानी से अपनी तैयारी शुरू करें।
C .. चूंकि कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स की तैयारी के लिए इंटरनेट अध्ययन सामग्री से भर गया है, इसलिए छात्र ऑफलाइन महंगी कोचिंग कक्षाओं की मदद के बिना प्रभावी रूप से तैयारी कर सकते हैं।
D ..ऑनलाइन एजुकेशन लेने से स्टूडेंट का समय और पैसा बचता है, और स्टूडेंट अपने गांव और घर से ही कॉम्पिटिटिव एग्जाम की तैयारी कर सकता है।
E ..खतरा एक ही है: यदि स्टूडेंट में सेल्फ-डिसिप्लिन नहीं है तो बात नहीं बनेगी।
F ..और यदि छात्र ऑनलाइन कोचिंग करने में असमर्थ है तो उसे निराश होने की आवश्यकता नहीं है, उन्हें पत्राचार पाठ्यक्रम का लाभ उठाना चाहिए (कॉरेस्पोंडेंस कोर्स)।
एक सलाह
ग्रामीण पृष्टभूमि के छात्रों को कभी भी अपने आप को किसी अन्य शहरी प्रतियोगी से कम नहीं आंकना चाहिए। अपने आत्मविश्वास और गंभीर अध्यन के बल पर ग्रामीण पृष्टभूमि के छात्र भी इस परीक्षा में सफल हो सकते हैं।