कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स से सबक ….!
कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स से 4 बड़े सबक …..पॉजिटिव एटीट्यूड बनाए रखें, अपना बेस्ट दें…लेकिन प्लान-B भी तैयार रखें
भारत के कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स अन्य देशों में आयोजित होने वाले कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स से कई मायनों में अलग हैं। प्रस्तुत है एक कम्पेरेटिव एनालिसिस जो हमें कई लेसन दे सकती है।
भीड़, और भीड़ के सपने
दुनिया में किसी भी देश में (शायद चीन को छोड़कर) ऐसे दृश्य नहीं दिखते…

रेलगाड़ियां इतनी भरी हुईं कि लोग डिब्बों के जुड़ने के स्थानों पर बैठ कर सफर करें, शहर से दूर किसी सेंटर से वापस लौटते वक्त बस में ना बैठाने पर भीड़ बस ड्राइवर की पिटाई कर दे, रेलवे स्टेशन पर कहीं पांव रखने की जगह नहीं हो, ठण्ड के दिन मफलर लपेटे और गर्मी के दिन पसीने से तरबतर कैंडिडेट्स चलते चले जा रहे हों।
फिर सेंटर के बाहर हाथों में ट्रैवेलिंग बैग और किताब लिए हुए कैंडिडेट्स नाश्ता कर रहे हैं। ये लोग आधी रात और बिलकुल सुबह से ही एक कॉम्पिटिटिव एग्जाम देने के लिए अपने-अपने सेंटर के बाहर आ खड़े हुए हैं। शाम या शायद देर रात तक ये सभी एग्जाम देकर एक बड़ी भीड़ के रूप में अपने घर लौट जाएंगे।
ये सभी दृश्य भारत के अनेक शहरों में किसी कॉम्पिटिटिव एग्जाम के होने पर आम-तौर पर दिखाई देते हैं।
भारत के कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स अपने स्केल और वॉल्यूम, डिफिकल्टी लेवल, सिलेबस और एग्जाम पैटर्न, कंडक्ट आदि कई मायनो में विश्व में होने वाले दूसरे कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स से एकदम अलग हैं। आइए देखते हैं इन एग्जाम्स के 3 सबसे महत्वपूर्ण कैरेक्टर्स का एनालिसिस-
1 स्केल और वॉल्यूम (Scale and Volume)

भारत विश्व की दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाला देश है और इसलिए कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स में शामिल होने वाले उम्मीदवारों की संख्या भी काफी अधिक होती है।
उदाहरण के लिए, 2021 में इंजीनियरिंग कॉलेजों के एंट्रेंस टेस्ट संयुक्त प्रवेश परीक्षा (JEE) मेन में लगभग 10 लाख छात्र शामिल हुए। यह अन्य देशों की तुलना में भारतीय प्रतियोगी परीक्षाओं को अधिक कॉम्पिटिटिव और चैलेंजिंग बनाता है। प्रायः लाखों छात्र बहुत कम सीटों (जिनकी संख्या कभी-कभी तो सैकड़ों में होती है) के लिए संघर्ष कर रहे होते हैं। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) परीक्षा, जो विभिन्न सिविल सेवाओं में भर्ती के लिए आयोजित की जाती है, में प्रत्येक वर्ष लगभग दस लाख आवेदक होते हैं।
इन हालात में कैंडिडेट्स को टाइम मैनेजमेंट, प्रायोरिटी ऑर्डर, स्टडी की तकनीक, सेल्फ-रेग्युलेशन, स्ट्रेस मैनेजमेंट के अलावा जिस चीज की सबसे अधिक आवश्यकता है वह है पॉजिटिव एट्टीट्यूड। सभी कैंडिडेट्स यह हमेशा ध्यान रखें कि आप ‘एक्सट्रीम कंडीशंस’ में जीवित हैं और भारत में भी ऐसा इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ है।
इसलिए सफल ना होने पर निराश होने की कोई बात नहीं हैं, हमेशा प्लान-B रेडी रखें।
2 डिफिकल्टी लेवल (Difficulty and toughness levels)

यदि आप गौर से देखें तो भारत में होने वाले कॉम्पिटिटव एग्जाम्स, चाहे वो सिविल सर्विसेज एग्जाम्स हों या कॉमन एडमिशन टेस्ट या जेईई, ये बाकी दुनिया में होने वाले इनके समकक्ष एग्जाम्स से ज्यादा कठिन होते हैं।
ऐसा केवल इसलिए नहीं कि इनमें कम सीटों के लिए अधिक कैंडिडेट्स अपीयर होते हैं। बल्कि इसलिए भी कि इनमें वास्तव में कठिन प्रश्न पूछे जाते हैं। इन प्रश्नों को सॉल्व करने के लिए विषय की गहरी समझ, वैचारिक समझ और पर्टिक्युलर स्किल्स की आवश्यकता होती है।
उदाहरण के लिए, आईआईटी में प्रवेश के लिए JEE हो या चार्टेड अकाउंटेंसी का एग्जाम, भारत में कई एग्जाम्स में सफलता दर 1% या उससे भी कम है।
3 सिलेबस और एग्जाम पैटर्न (Syllabus and exam pattern)

भारत के कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स का सिलेबस और एग्जाम पैटर्न भी अन्य देशों से अलग है। आमतौर पर सिलेबस विशाल होता है और इसमें विषयों की एक विस्तृत शृंखला जैसे मैथ्स, साइंस, लैंग्वेज, सामान्य ज्ञान, करंट अफेयर्स, इतिहास, भूगोल, समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र आदि शामिल होती है।
इसके उलट, अन्य देशों में परीक्षाएं विशिष्ट विषयों या अध्ययन के क्षेत्रों पर अधिक केंद्रित होती हैं। उदाहरण के लिए, USA में स्कॉलास्टिक असेसमेंट टेस्ट (SAT) मुख्य रूप से छात्रों के पढ़ने, लिखने और गणित कौशल का परीक्षण करता है।
परीक्षा पैटर्न भी कैंडिडेट्स के गहन ज्ञान का परीक्षण करने के लिए डिजाइन किया जाता है।
इसके अलावा भारत में आज भी, अधिकांश भारतीय कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स का अंग्रेजी में होना, अधिकतर कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स का ऑफलाइन मोड में होना भी इसे दूसरे देशों से अलग बनाता है।
अब देखिए, इस एनालिसिस से आपके लिए 4 बड़े सबक क्या हैं?
4 बड़े सबक
1 पहला, पॉजिटिव एट्टीट्यूड बनाए रखें, भारत में कॉम्पिटिशन की यह स्थिति अभूतपूर्व, ऐतिहासिक और एक्स्ट्राऑर्डिनरी है।
2 दूसरा, कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स की तैयारी में एक्सपर्ट्स और अनुभवी व्यक्तियों से प्रॉपर गाइडेंस ले क्योंकि इस स्तर पर यह केवल आपकी प्रतिभा को परखने का मामला नहीं है बल्कि यह एक युद्ध है – बैटल ऑफ ब्रेन्स। हां, बेवजह लोड न लें, अपना बेस्ट देना है इतना तय करें।
3 तीसरा, अपना कॉन्फिडेंस बनाए रखें, यदि आप भारत के कॉम्पिटिटिव एग्जाम के माहौल में सफल हो चुके हैं तो आपके पास विश्व के सबसे अच्छे ब्रेन्स में से एक है। तो कॉन्फिडेंट रहें।
4 सबसे बड़ी बात – इन परीक्षाओं में सफल न होने पर अनेकों अन्य वोकेशनल कोर्सेज और अपना बिजनेस करने का मौके हो सकते हैं, उन्हें तलाशें। मौके बहुत हैं, करने वाले चाहिए! मैंने करिअर फंडा सीरीज में ही बहुत सारे ऑप्शंस बताएं हैं। पढ़ें।