धर्म से जुड़ी राजनीतिक पार्टियों के नाम पर सुनवाई ..?
दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र से चार हफ्ते में जवाब मांगा, कांग्रेस के झंडे से भी याचिकाकर्ता को आपत्ति
याचिका में हिंदू सेना, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग जैसे राजनीतिक दलों का उदाहरण दिया गया।
दिल्ली हाई कोर्ट ने धर्म से जुड़ी राजनीतिक पार्टियों का रजिस्ट्रेशन रद करने की याचिका पर केंद्र को अपना पक्ष बताने के लिए चार हफ्ते का समय दिया है। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने दिया है। कोर्ट का कहना है 2019 में जनहित याचिका पर नोटिस जारी करने के बावजूद केंद्र सरकार ने अभी तक जवाब दाखिल नहीं किया है। मामले की अगली सुनवाई 9 अगस्त को होगी।
जानिए 4 साल पुराने इस केस में अब तक क्या-क्या हुआ…
कब का है मामला चार साल पहले वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय ने उन राजनीतिक दलों के खिलाफ कोर्ट में केस किया था जिनका नाम धर्म या जाति से जुड़ा है। याचिका में हिंदू सेना, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग जैसे राजनीतिक दलों का उदाहरण दिया गया था।
याचिका में क्या कहा गया था याचिका में कहा गया है, ऐसी पार्टियां जिनके नाम से किसी विशेष धर्म या जाति की पहचान होती हो, तो चुनाव आयोग में रजिस्टर्ड ऐसे पॉलिटिकल पार्टियों की समीक्षा करनी चाहिए और अगर ये सही पाया जाता है तो उन्हें इसे बदलने का आदेश देना चाहिए। अगर पार्टियां तीन महीने के भीतर पार्टी का नाम नहीं बदलती हैं तो उनका रजिस्ट्रेशन रद हो जाना चाहिए।
चुनाव आयोग ने क्या जवाब दिया कोर्ट में जब यह मामला पहुंचा तो अदालत ने चुनाव आयोग से भी जवाब मांगा था। 2019 में दायर अपने जवाब में, चुनाव आयोग ने कहा था कि 2005 में उसने एक नीतिगत निर्णय लिया था कि किसी भी राजनीतिक दल का नाम धार्मिक अर्थों में दर्ज नहीं किया जाएगा और उसके बाद ऐसी कोई पार्टी रजिस्टर्ड नहीं की गई है।

तब इलेक्शन कमीशन ने यह भी कहा था कि 2005 से पहले जिन पार्टियों के नाम में धर्म की पहचान होती है तो उनका रजिस्ट्रेशन रद नहीं किया जाएगा।
कांग्रेस के तिरंगे वाले झंडे पर क्या है आपत्ति
याचिका कर्ता ने कांग्रेस के तिरंगे वाले झंडे पर भी आपत्ति जताई थी। याचिका में कहा गया था कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस सहित कई राजनीतिक दल हैं, जो राष्ट्रीय ध्वज के समान ध्वज का उपयोग करते हैं, जो कि रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपुल एक्ट (RPA), 1951 का उल्लंघन है।
इस पर इलेक्शन कमीशन ने जवाब देते कहा था, कांग्रेस द्वारा प्रतीक के रूप में राष्ट्रीय ध्वज के उपयोग का मुद्दा पहले ही सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किया जा चुका है, जिसने देखा था कि पार्टी लंबे समय से इसका इस्तेमाल कर रही है।
चुनाव आयोग ने यह भी कहा कि उसने सभी मान्यता प्राप्त पार्टियों को अलग से निर्देश दिया है कि वे धर्म या जाति के आधार पर वोट न मांगने के सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ध्यान दें और इसका सख्ती से पालन सुनिश्चित करें। धर्म या जाति के आधार पर वोट मांगना भी आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन होगा।
