अवैध शराब के कारोबार के शिकंजे में भारत ?
अवैध शराब के कारोबार के शिकंजे में भारत; उत्तर से लेकर दक्षिण तक मरते लोग
भारत में जहरीली शराब पीने से होने वाली मौतें आम बात हो गई है. गरीब लोग महंगी शराब नहीं खरीद पाते हैं तो सस्ती के चक्कर में अक्सर जहरीली शराब खरीद लेते हैं.
अवैध शराब पीना सेहत के लिए बहुत खतरनाक साबित हो सकता है. अक्सर ये खबरें आती रहती हैं कि कैसे अवैध शराब पीने से लोगों की तबीयत बिगड़ जाती है और फिर कुछ लोगों की मौत भी हो जाती है. हाल ही में तमिलनाडु के कालकुड़ी जिले में जहरीली शराब पीने से कम से कम 34 लोगों की मौत हो गई और करीब 100 लोग अस्पताल में भर्ती हैं.
ये हादसा बुधवार (19 जून) को हुआ. अधिकारियों ने बताया कि मरने वालों की संख्या बढ़ने का अंदेशा है. अभी तक इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है. सीएम एमके स्टालिन ने मामले की गहन जांच के लिए सीबीआई-सीआईडी से जांच कराने का आदेश दिया है.
जब भी ऐसी कोई बड़ी दुखद घटना होती है तो हर कोई सख्त कार्रवाई की मांग करता है. कुछ दिनों तक छापेमारी का अभियान चलाया जाता है, एफआईआर दर्ज होती है, अवैध शराब बरामद की जाती है और गिरफ्तारी भी की जाती है. फिर कुछ दिनों बाद सबकुछ शांत हो जाता है. अवैध शराब का कारोबार फिर शुरू हो जाता है.
उत्तर से दक्षिण तक अवैध शराब पीने से मरते लोग
भारत के कई राज्यों में आज भी खुलेआम बिना किसी डर के नकली और घटिया शराब बनाई और बेची जाती है. 2022 में बिहार राज्य में 30 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी जब उन्होंने बिना लाइसेंस बिकने वाली जहरीली शराब पी ली थी. इसी साल की शुरुआत में गुजरात में भी कम से कम 28 लोगों की मिलावटी शराब पीने से मौत हो गई थी. इससे पहले 2020 में पंजाब में भी जहरीली शराब पीने से करीब 120 लोगों की मौत हो गई थी. पंजाब में पिछले चार सालों में अवैध शराब पीने से करीब 146 लोगों की मौत हो चुकी है.
असल में बहुत सी मौतों का पता ही नहीं चल पाता क्योंकि कई बार न तो परिवार वाले और न ही अधिकारी ये समझ पाते हैं कि मौत की वजह जहरीली शराब पीना है. ऐसे में पुलिस सिर्फ ये दर्ज करती है कि मौत असहज हालात में हुई या संदिग्ध परिस्थिति में हई.
जहरीली शराब पीने से सबसे ज्यादा मौतें कहां
गृह मंत्रालय की ओर से लोकसभा में दिए गए एक जवाब में बताया कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के मुताबिक 2016, 2017, 2018, 2019 और 2020 के दौरान जहरीली शराब पीने से हुई मौतों का राज्यवार ब्योरा दिया गया है. गौर करने वाली बात ये है कि NCRB इस तरह का अलग से आंकड़ा दर्ज नहीं रखता है. इन पांच सालों में सबसे ज्यादा 1510 मौत साल 2017 में हुई. 2020 में मौतों का आंकड़ा एक हजार से भी कम रहा.
महाराष्ट्र, गोवा और लक्षद्वीव ये तीन प्रदेश ऐसे हैं जहां 2016 से 2020 तक जहरीली शराब पीने से किसी की भी मौत का मामला सामने नहीं आया. मध्य प्रदेश में हर साल सबसे ज्यादा मौत हो रही है. यहां 2016 में 184, 2017 में 216, 2018 में 410, 2019 में 190 और 2020 में 214 लोगों की अवैध शराब के सेवन से जान चली गई. मणिपुर में सिर्फ 2019 में एक व्यक्ति की जान गई.
क्या होती है अवैध शराब
‘जहरीली’ या ‘नकली’ शराब वो होती है जिसे सरकार के नियमों से बाहर छुप-छुपाकर बनाया जाता है. इसे बनाने का तरीका भी सही नहीं होता और इस पर किसी भी कंपनी का नाम या लेबल नहीं होता. जबकि रजिस्टर्ड कंपनियां सरकार के बताए तरीकों से ही शराब बनाती हैं. वह शराब की क्वालिटी और लोगों की सेहत को ध्यान में रखा जाता है.
जहरीली शराब कई तरह की होती है. कभी-कभी इसे घर पर ही बना लिया जाता है, तो कभी कहीं और बनाकर फेमस कंपनियों की नकली बोतलों में भरकर बेच दिया जाता है. कई बार तो ये ऐसी शराब होती है जिसे बनाने में किसी भी तरह के क्वालिटी चेक का ध्यान नहीं रखा जाता.
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन का कहना है कि दुनियाभर में पीने वाली शराब का करीब चौथाई हिस्सा जहरीली शराब का होता है. लेकिन कुछ इलाकों में ये आंकड़ा और भी ज्यादा है.
अवैध शराब पीने से कैसे हो जाती है मौत
चूंकि इस तरह की जहरीली शराब बनाने का तरीका कोई नहीं देखता और न ही कोई क्वालिटी चेक करता है. इसलिए इनमें बहुत ज्यादा मात्रा में इथनॉल मिला दिया जाता है जो जहर खाने के बराबर ही है. इसके अलावा कई दूसरे नुकसानदेह और जहरीले पदार्थ भी मिला दिए जाते हैं. शराब को ज्यादा तेज बनाने के लिए कुछ लोग इसमें मेथनॉल मिला देते हैं, जो एक तरह की स्पिरिट है.
ये पीने से आंखों की रोशनी जा सकती है और कई दूसरी बीमारियां भी हो सकती हैं. कई बार मौत भी हो जाती है. इतना ही नहीं, कभी-कभी तो बनाने की प्रक्रिया में ही जहरीले रसायन या जानवरों से बने पदार्थ मिल जाते हैं, ताकि जल्दी शराब तैयार हो जाए. ये पीने से भी जहर या इंफेक्शन होने का खतरा बहुत ज्यादा रहता है.
नाली का गंदा पानी, इंडस्ट्री के कचरे से बनती है नकली शराब?
जिस जहरीली शराब को चुपके से बनाया जाता है, उसमें मिलावट की तो बात ही छोड़िए उसे बनाने में तो गंदगी का ही इस्तेमाल होता है. नाली का गंदा पानी, इंडस्ट्री का कचरा, गंदे तालाब या नहर का पानी जिसमें जहर घुला हो, ये सारी चीजें इस जहरीली शराब को बनाने में इस्तेमाल हो जाती हैं.
ऊपर से नशा और तेज लाने के लिए बनाने वाले लोग इसमें छिपकली का चमड़ा, अल्प्राजोलम की गोलियां और मांसपेशियों को आराम देने वाली दवाएं भी मिला देते हैं. आसपास से इकट्ठा किया हुआ पानी किसी भी तरह के केमिकल से मिलाकर टायर की ट्यूबों में भर दिया जाता है, फिर उन्हें गर्म रेत में एक हफ्ते से ज्यादा दबाकर रखा जाता है.
ट्रिब्यून इंडिया ने अपनी रिपोर्ट में पंजाब पुलिस के एक सिपाही के हवाले से बताया कि इस सस्ती शराब को बनाने में इस्तेमाल होने वाला पानी ही बहुत खराब होता है. छापे मारते वक्त कई बार टैंकों में से मरी हुई छिपकलियां, गंदगी और टायर तक मिले हैं.
जहरीली शराब के लिए कौन जिम्मेदार?
19 जुलाई 2022 को गृह मंत्रालय ने लोकसभा में एक सवाल के जवाब में बताया था कि भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची की सूची-II (राज्य सूची) में प्रविष्टि 8 के अनुसार शराब बनाने और बेचने का अधिकार राज्य सरकारों को है. इसलिए जहरीली शराब से होने वाली मौतों को रोकने के लिए कानून बनाने और लागू करने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है.
केंद्रीय गृह मंत्रालय समय-समय पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सलाह देता है कि वे कानून-व्यवस्था बनाए रखें और यह सुनिश्चित करें कि जो कोई भी कानून अपने हाथ में लेता है उसे सजा दी जाए.