‘MCD के जर्रे-जर्रे में करप्शन…

‘MCD के जर्रे-जर्रे में करप्शन…’,पूर्व LG नजीब जंग बोले- ओल्ड राजेन्द्र नगर घटना के लिए पार्षद-विधायक पर हो एक्शन

प्रश्न –  ओल्ड राजेंद्र नगर की घटना को आप किस तरह से देखते हैं?
उत्तर – दिल्ली में तीन छात्रों की मौत हुई और हाल में ही एक और छात्र की करंट लगने से भी मौत हुई. दिल्ली के मुखर्जी नगर के बाद अब पुराने राजेंद्र नगर में ऐसी घटना हुई है. ऐसी घटना क्यों हो गई ये बात नहीं है, बल्कि कैसे इस घटना के लिए लोग जिम्मेदार हैं, इन बातों पर ध्यान देने की जरूरत है. जो बच्चे अपना भविष्य बनाने के लिए आए हैं क्या उनके जीवन का कोई मूल्य नहीं है. आज के समय में सभी में करप्शन शामिल हो गया है. एमसीडी में भ्रष्टाचार पूरी तरह से व्याप्त है. दिल्ली में आप, कांग्रेस और भाजपा तीनों की सरकार रही है, लेकिन किसी ने कुछ भी नहीं किया है.

एमसीडी के कार्यालय में मिलने से लेकर फाइल तक के काम के लिए पैसे देने पड़ते हैं. ये बातें सभी को पता है, लेकिन सभी की आंखें क्यों बंद हैं? छात्रों की मौत की घटना होने के बाद सभी को दुख है. पीएम से लेकर सभी शोक व्यक्त कर रहे हैं, लेकिन कुछ समय मिलते ही इसको लोग भूल जाएंगे. आज कमेटी बनाई गई है और दस दिनों के बाद लोग ये तक भूल जाएंगे कि उस कमेटी और उसकी रिपोर्ट का क्या हुआ? कई घटनाएं होने के बाद कमेटी बनाई गई, लेकिन उसकी रिपोर्ट का क्या हुआ? अगर सरकार को नियम कानून बदलना पड़े तो बदल ले या फिर संविधान बदल ले, लेकिन एमसीडी के अधिकारियों का नार्को टेस्ट कराना चाहिए, उससे ये पता चल जाएगा कि बेईमान कौन है. अगर ऐसा हो गया तो पूरे हिंदुस्तान भर में बेईमानी का काम रुक जाएगा.

प्रश्न – दिल्ली में कई कोचिंग संस्थान नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं, इसको आप कैसे देखते हैं?
उत्तर – दिल्ली पुलिस के मुताबिक दिल्ली में 583 कोचिंग संस्थान चल रहे हैं, जबकि फायर ब्रिगेड की ओर से मात्र 67 को ही एनओसी दी गई है. काफी कम लोगों को एनओसी दिया गया है. इसके बावजूद कोचिंग संस्थान इतनी संख्या में चल रहे हैं तो एमसीडी के अधिकारियों को ये क्यों नहीं दिख रहा था. हर दिन उस क्षेत्र में पुलिस के अधिकारी और एमसीडी के अधिकारी जाते हैं तो क्यों नहीं इस पर रोक लगवाए. अभी तो मात्र तीन से चार बच्चों की मौत हुई है जबकि ऐसे में तो अधिक संख्या में बच्चों की मौत हो सकती थी. इस समय सरकार को छोड़ दिया जाए तो सीधे तौर पर एमसीडी ही इसके लिए जिम्मेदार है. इस घटना की सीधे तौर पर वहां के स्थानीय एमपी, एमएलए , लोकल काउंसलर और लोकल एमसीडी के अधिकारियों की जिम्मेदारी थी.

प्रश्न – आम आदमी पार्टी का ये कहना है कि एलजी और ब्यूरोक्रेट्स नहीं सुन रहे हैं, इसके बारे में आप क्या कहेंगे?
उत्तर –  इतनी बड़ी घटना के बाद अक्सर पॉलिटिकल पार्टियां एक दूसरे पर ठीकरा फोड़ने का काम करती है. घटना होने के बाद दूसरे पर आरोप लगाने का काम आम आदमी पार्टी कर रही है. घटना होने के बाद वहां पर गए आप के नेता आज धरने पर बैठे हैं. इससे पहले उन्होंने एमसीडी को ई-मेल या पत्राचार क्यों नहीं किया, सिर्फ उप-राज्यपाल पर आरोप लगाना गलत है कि वो नहीं सुन रहे हैं. ये आरोप लगाया जा रहा है कि उप-राज्यपाल और एमसीडी के अधिकारी नहीं सुन रहे हैं तो ऐसा क्यों हो रहा है. दिल्ली के अलावा भी तो केंद्र शासित प्रदेश है वहां पर सीएम और नेताओं की बात कैसे लोग सुनते हैं.

ये तो सभी लोगों के व्यवहार पर भी निर्भर करता है. आतिशी की ओर से आरोप लगाया जा रहा है कि मुख्य सचिव उनकी बात नहीं सुन रहे हैं. अभी का वक्त एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का नहीं है. कई जगहों पर सीवर ब्लॉक है. लेकिन वहां पर कार्रवाई नहीं हो रही है. उप राज्यपाल तो वही काम करते हैं, जिस पर कोई रिपोर्ट करता है. उनको रिपोर्ट तो लोकल के विधायक और विभागीय मंत्री करते हैं. अभी का समय धरना प्रदर्शन करने का नहीं है बल्कि ये कोशिश करें कि आपसी समन्वय बनाकर रखें और आगे करीब दो माह तक ऐसी घटनाएं होने से रोकें.

प्रश्न – कोचिंग संस्थान के अलावा कई अन्य जगहों पर दुर्घटनाएं हो रही हैं, इसको आप कैसे देखते हैं?

उत्तर – दिल्ली के कई जगहों पर बिजली के पुराने तार टंगे हैं. ऐसे में कई बड़े हादसों को ये दावत दे रहा है. ऐसे में सरकार को ये देखना चाहिए कि खतरों से कैसे रोकथाम किया जा सकता है. इसके साथ ही जो अधिकारी दोषी है, उसको उसकी जिम्मेदारी बताकर उस पर कार्रवाई करें ताकि एक नजीर पेश हो सके. तंग गलियों में लाखों तार टंगे हुए है उसको हटाने की जरूरत है. एमसीडी और बिजली बोर्ड के अधिकारियों की कार्यवाही तय करने की जरूरत है. कोई गरीब की झोपड़ी है उसको प्रशासन हटा रहा है, लेकिन अगर कोई मंदिर और मस्जिद और मदरसा बना है, उसको हटाने की हिमाकत नहीं दिखा रहा है. संवैधानिक नियमों के अनुसार दिल्ली केंद्र शासित प्रदेश है. इसके अंतर्गत उप राज्यपाल का प्रावधान किया गया है. उप राज्यपाल सिर्फ पुलिस, लॉ एंड आर्डर और लैंड आदि के मामलों को ही देखते हैं जबकि बाकी के सभी मामलों को स्थानीय सरकार ही देखती है.

इन बातों को सुप्रीम कोर्ट ने भी माना है. जहां तक अधिकारियों का मामला रहा है. इसमें संयुक्त सचिव तक के अधिकारियों का तबादला सीएम करते थे जबकि सेक्रेटरी लेवल के अधिकारियों का तबादला उप राज्यपाल करते थे. अगर सीएम को कोई दिक्कत होती थी तो वो उपराज्यपाल को कहकर चीजों को बदलवा देते थे. 2014 के बाद से विवाद और टकराव शुरू हुआ जो अभी तक चल रहा है. आतिशी जो आज धरना पर बैठी है इसकी शुरूआत आम आदमी पार्टी ने ही की थी. अधिकारियों की बेइज्जती का काम आम आदमी पार्टी ने ही शुरू किया, उसके बाद अधिकारी इनकी बात नहीं सुन रहे हैं. अधिकारियों को उसके केबिन में बंद करने और गाली देने की घटनाएं हुई हैं. इससे पहले अभी तक नहीं हुआ था. ऐसे में उपराज्यपाल को एक मीटिंग बुलाकर सभी मामलों का निपटारा किया जाना चाहिए.

प्रश्न –  अभी के समय में क्या काम से हटकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है?
उत्तर –  दिल्ली में सीएम और उप-राज्यपाल का टकराव इस कदर अभी तक कभी नहीं हुआ था. सीएम और उप-राज्यपाल के साथ मीटिंग होती है और किसी मामले के समाधान निकाला जाता है. उप राज्यपपाल का एक संवैधानिक पद है. आज का जो समय है उसमें आरोप-प्रत्यारोप की जगह समस्याओं को दूर करने पर फोकस होना चाहिए. सभी को समन्वयक बनाकर काम करने की जरूरत है. केजरीवाल के दस साल का कार्यकाल हो गया है. अब केजरीवाल राष्ट्रीय नेता हो चुके हैं, देश के दो राज्यों में सरकार है. ऐसे में उनको अपनी दक्षता दिखानी चाहिए, और उप-राज्यपाल से एक अच्छा समन्वय दिखाते हुए काम करना चाहिए.

प्रश्न – क्या केजरीवाल के जेल में होने से ऐसा कुछ हो रहा है.?
उत्तर – केजरीवाल फिलहाल त्यागपत्र नहीं देना चाहते हैं. संवैधानिक भी कोई नियम नहीं है कि उन्हें इस्तीफा देना चाहिए. प्रैक्टिकल तौर पर देखें तो ये मुमकिन नहीं है कि कोई भी व्यक्ति जेल में रहकर सरकार चला पाए. केजरीवाल पूरी दिल्ली के सीएम हैं ऐसे में उनको पूरी दिल्ली की जनता से मिलना चाहिए. दिल्ली की जनता उनसे मिलना चाहती है, लेकिन जेल में कोई नहीं मिल सकता. वकील तक को मिलने की आजादी नहीं है. सरकारी सारे काम पेंडिंग हैं. अगर कोई काम हो तो काफी सारे कागजात ले जाने पड़ेंगे. उससे पहले एक कैबिनेट की मीटिंग होती है. उसके बाद कोई बड़ा फैसला होता है. कोर्ट ने भी सरकारी फाइलों पर हस्ताक्षर करने पर रोक लगाई है. अगर केजरीवाल चाहें तो आतिशी, गोपाल या फिर सौरभ भारद्वाज तीनों में किसी को कार्यवाहक मुख्यमंत्री बना सकते हैं, जिससे कि काम काज में कोई बाधा ना हो.

कोर्ट की ओर से जमानत क्यों खारिज की जा रही है ये भी समझ से थोड़ा परे हैं. क्योंकि केजरीवाल भागने वालों में से नहीं है, उनका परिवार दिल्ली में हैं. समाचार पत्रों से ये बातें सामने आई है कि चार्जशीट दायर हो चुकी है, इसका मतलब की जांच की प्रक्रिया पूरी हो गई है. अब ऐसे में गवाहों को वो बदलने के लिए भी दबाव नहीं बना पाएंगे. केजरीवाल का स्वास्थ्य भी ठीक नहीं है. ऐसे में कुछ पाबंदियों के साथ जमानत दे देनी चाहिए.

प्रश्न – दिल्ली के वर्तमान उप राज्यपाल के कार्यकाल को आप कैसे देखते हैं?
उत्तर – राजनीतिक पार्टियां एक दूसरे पर आरोप लगाते रहती है, लेकिन मैं अपने बाद के या फिर आज के जो वर्तमान में उप राज्यपाल है उनके कार्यकाल पर कोई भी टिप्पणी नहीं कर सकता और ये मुनासिब भी नहीं है.

प्रश्न – हाईकोर्ट के आदेश के बाद कोचिंग पर देखरेख बढ़ाई गई थी, उसके बाद फिर हादसा हो जाता है इसको कैसे देखा जाए ? 
उत्तर – मैंने पहले ही कहा कि एमसीडी पूरी तरह से बेईमान है. हाइकोर्ट के फैसले को एक सप्ताह में वो टोकरी में फेंक देते हैं. अभी सभी लोग दुख व्यक्त कर रहे हैं, दस दिनों के बाद ये पूरी तरह से खत्म हो जाएगी. हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का भी कोई आदेश आ जाए तो एमसीडी वाले उसको नहीं मानेंगे. ऐसे में एमसीडी के अधिकारियों का नार्को टेस्ट कराना चाहिए ताकि उनकी बातें सबके सामने आ सके. उनकी नौकरी जाए और उन पर कार्रवाई हो ताकि पूरे हिंदुस्तान में एक सही संदेश जा सके.

प्रश्न – दिल्ली में 95 प्रतिशत कोचिंग संस्थान के पास फायर सेफ्टी नहीं है ऐसे में कोचिंग संस्थान चलाने की अनुमति कैसे दे दी गई ?
उत्तर – दिल्ली सरकार के एक काउंसिल ने ये बात कही है तो ये सत्य है लेकिन उनको चलाने की अनुमति कैसे दे दी गई. फायर सर्विस विभाग कहता है कि काफी संख्या में कोचिंग संस्थान के पास फायर सेफ्टी नहीं है तो वो  दिल्ली में कैसे संचालित हो रहे हैं. जो कोर्ट को डाटा दिया गया है तो पहले ये बताना चाहिए था कि इन पर एक्शन किसको लेना चाहिए था, किस इंजीनियर पर कार्रवाई की गई, एमसीडी के अधिकारी और काउंसलर कहां थे, वो कार्रवाई क्यों नहीं किए?  ऐसी घटना के होने के बाद स्थानीय जितने भी प्रतिनिधि हैं उन पर कठोर कार्रवाई करते हुए प्राथमिकी दर्ज कराया जाना चाहिए.

प्रश्न – जिस छात्र की मृत्यु हुई है उनके पिता-माता का कहना है कि उनको मुआवजा नहीं इंसाफ चाहिए, ये कैसे संभव है?
उत्तर – उनको इंसाफ तभी मिलेगा जब सभी करप्शन के खिलाफ लड़ाई लड़ेंगे. जो भी इसमें दोषी है उसको तत्काल जेल भेज देना चाहिए. इसमें अधिकारियों की ही क्यों बात हो रही है जो लोकल लोग चुनाव जीत कर आए हैं क्या उनकी ये जिम्मेदारी नहीं थी. वहां के जो लोकल विधायक है वो खुद कोचिंग यूपीएससी की ले चुके हैं. क्या उनको इन सब दिक्कतों के बारे में पता नहीं है. छात्र तो आएंगे और पढ़ेंगे. राज्य सरकार एक बेहतर हॉस्टल बनाने के बारे में क्यों नहीं सोच रहा है.

स्कूलों में लाइब्रेरी खोला जा सकता है जहां दोपहर के बाद पढ़ाई नहीं होती, वहां पर जाकर बच्चे पढ़ सकते हैं. कोचिंग भारत मुल्क के लिए एक बीमारी हो गई है. विश्व के दूसरे देशों में ऐसी व्यवस्था नहीं है. जब स्कूल और कॉलेज की स्थिति कमजोर होती है तब कोचिंग की जरूरत पड़ती है. यूपीएससी के लिए तो अलग प्रकार की कठिन तैयारी हो गई है. आज यूपीएससी की तैयारी करने वाले एक कमरे में चार से पांच की संख्या में रहने को मजबूर है जिस प्रकार से की दुबई में मजदूर रहता है. उप राज्यपाल और भाजपा पर आरोप लगाने से उपर उठना होगा. देश के भविष्य यही बच्चे हैं इनके लिए सोचने की जरूरत है. कुछ कोचिंग संस्थान ऐसे है जो सही व्यवस्था रखे हुए हैं. 

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