ग्वालियर : 1355 व्यावसायिक और 1.51लाख अवैध कनेक्शन ले रहे आधा पानी ?

पिछले एक दशक से गर्मियों में पेयजल संकट का सामना शहर के लोगों को इसलिए करना पड़ रहा है, क्योंकि रोजाना होने वाली सप्लाई का आधा पानी डेढ़ लाख अवैध और 1355 व्यावसायिक कनेक्शनों को चला जाता है। इसलिए वैध कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता। इन कनेक्शनों में पानी की चोरी ही नहीं बल्कि बर्बादी भी हो रही है। संपत्ति कर रजिस्टर के अनुसार शहर में कुल संपत्तियां 3.21 लाख हैं। इनमें से 1.70 लाख घरों में ही वैध नल कनेक्शन हैं।
इसी तरह तिघरा के पानी का व्यावसायिक उपयोग नहीं किया जा सकता, लेकिन वह भी हो रहा है। व्यावसायिक उपयोग के लिए निगम ने अधिकृत रूप से 1355 कनेक्शन दिए हैं। नगर निगम शहर में पानी की बर्बादी रोकने के लिए मैनेजमेंट नहीं कर पा रहा है। तिघरा से शहर तक आते – आते 40 फीसदी पानी की बर्बादी हो रही है। पानी की इसी बर्बादी के कारण तिघरा में पूरे साल के लिए पानी की कमी पड़ जाती है।
जानकारों के अनुसार यदि तिघरा से पानी लेने व शहर में सप्लाई का प्लान बनाकर मैनेजमेंट किया जाए तो पानी की कमी नहीं पड़ेगी। ऊपर के बांधों से 11 से 15 करोड़ रुपए में पानी लिफ्ट किए बिना पूरे साल शहर में पानी की सप्लाई हो सकेगी।
शहर में कुल संपत्तियां 3.21 लाख, इनमें से केवल 1.70 घरों में वैध कनेक्शन
- 12 लाख की जनसंख्या है ग्वालियर शहर की
- रोज 6 एमसीएफटी पानी की शहर को है दरकार
- निगम 13 एमसीएफटी पानी जल संसाधन विभाग से लेता है
न्यायालय की यह है गाइड लाइन
न्यायालय में विचाराधीन मामले की सुनवाई में वर्ष 2016 में 12 लाख की आबादी के लिए 135 लीटर प्रति व्यक्ति की दर से 6 एमसीएफटी पानी की सप्लाई पर्याप्त बताई गई थी। 1.50 एमसीएफटी पानी का लॉस निर्धारित किया गया था। यह सप्लाई नियमित सप्लाई के लिए दिया जाना थी। नगर निगम वर्तमान में शहर की आबादी 15 लाख मानता है और लगभग 3 लाख आबादी को 2200 ट्यूबवैल से भी सप्लाई करता है।
वर्तमान में नगर निगम शहर की सप्लाई के लिए लगभग 8 एमसीएफटी पानी तिघरा से ले रहा है, इस पानी से 12 लाख की आबादी को प्रतिदिन सप्लाई की जाना चाहिए। 3 लाख आबादी को ट्यूबवैल से भी शहर में पानी की सप्लाई की जाती है, ऐसी स्थिति में शहर में आधी आबादी का पानी बर्बाद हो रहा है।
पूरी आबादी को सप्लाई के लिए निगम 13 एमसीएफटी तक पानी तिघरा से लेता है, जो निर्धारित मापदंड के अनुसार लगभग दो गुना है। मापदंड के अनुसार ही पानी दिए जाने का प्रावधान तय कर इसका कानून बनना चाहिए और मापदंड से अधिक पानी दिए जाने पर जिम्मेदार अधिकारी पर कार्रवाई का कानून तय होना चाहिए।
ननि की जिम्मेदारी है ^शहर की जनता के पीने के लिए तिघरा से नगर निगम को पानी सप्लाई किए जाने का अनुबंध है। नगर निगम शहर में पानी का वितरण किस व्यवस्था व नियम से करता है यह जिम्मेदारी उनकी है। – राजेश चतुर्वेदी, अधीक्षण यंत्री, जल संसाधन
पानी की बर्बादी न हो तिघरा से जनता के पीने के लिए पानी की सप्लाई नगर निगम को की जाती है। इस पानी का उपयोग पीने के लिए हो और बर्बादी न हो, शहर में यह व्यवस्था निगम को करना है। आबादी के अनुसार ही निगम को पानी दिया जाए और व्यावसायिक उपयोग होने पर निगम से व्यावसायिक दर से वसूली की जाए इसके लिए जल संसाधन विभाग को परीक्षण कर प्रावधान करना चाहिए।- हेमंत खरे, सेवानिवृत्त अधीक्षण यंत्री जल संसाधन विभाग
शहर की जरूरत से ज्यादा तिघरा में रहता है पानी शहर में नियमित पानी सप्लाई के लिए मापदंड के अनुसार प्रतिदिन 8 एमसीएफटी पानी की जरूरत रहती है। इस हिसाब से शहर में पूरे वर्ष सप्लाई के लिए 2880 एमसीएफटी पानी की जरूरत है। तिघरा बांध में 4200 एमसीएफटी पानी संग्रहित हो सकता है, यदि बरसात कम होने पर ऊपर के बांधों से भी तिघरा को भर लिया जाता है।
नगर निगम आधे शहर को सप्लाई के लिए 8 एमसीएफटी पानी ले रहा है जो कि तय मापदंड से दो गुना है। कनेक्शनों के हिसाब से सप्लाई हो तो कम से कम 3 एमसीएफटी पानी की बचत की जा सकती है। पूरी आबादी को नियमित सप्लाई के लिए निगम 13 एमसीएफटी तक पानी लेता रहा है जो कि लगभग दोगुना है।
नियमित सप्लाई पर भी प्रतिदिन 5 एमसीएफटी पानी की बचत संभव है। यानी कि 60 से 150 एमसीएफटी पानी की एक माह में और 720 से 1800 एमसीएफटी पानी की बचत सालाना हो सकती है। यह पानी 3 से 7 माह तक शहर की सप्लाई के लिए उपयोग हो सकता है।