इस पर आश्चर्य नहीं कि लंदन में विदेश मंत्री एस. जयशंकर के समक्ष खालिस्तान समर्थकों के उत्पात और भारतीय ध्वज के अपमान पर ब्रिटेन सरकार की सफाई भारतीय विदेश मंत्रालय को रास नहीं आई, लेकिन भारत को असंतोष प्रकट करने तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए।

उसे ब्रिटेन को इसके लिए बाध्य करना चाहिए कि वह ऐसी भारत विरोधी हरकतों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करे। यह इसलिए आवश्यक है, क्योंकि पहले भी इस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं और यह किसी से छिपा नहीं कि ब्रिटेन ने हर बार निंदा-आलोचना करके कर्तव्य की इतिश्री कर ली।

यह मानने के अच्छे-भले कारण हैं कि ब्रिटिश सरकार राजनीतिक कारणों से अपने यहां सक्रिय खालिस्तान समर्थकों की भारत विरोधी गतिविधियों से मुंह मोड़े हुए है। इसी कारण उनका दुस्साहस बढ़ता चला जा रहा है। अतीत में वे भारतीय उच्चायोग पर धावा बोलने के साथ गुरुद्वारा पहुंचे भारतीय उच्चायुक्त पर हमले की कोशिश कर चुके हैं।

इसके अलावा वे जब-तब सार्वजनिक रूप से भारतीय ध्वज का अपमान करते रहते हैं और अपनी दुष्टता के खिलाफ आवाज उठाने वाले ब्रिटिश सिखों को धमकाते भी रहते हैं। इसका कारण यही है कि ब्रिटेन उनसे कड़ाई से निपटने के लिए तैयार नहीं। भारत ने यह सही कहा कि खालिस्तान समर्थक तत्वों को यह पता है कि ब्रिटिश सरकार उनके खिलाफ कुछ नहीं करेगी।

यदि ब्रिटेन खालिस्तान समर्थक तत्वों को मूक समर्थन देते रहता है तो भारत को मुक्त व्यापार समझौता संबंधी वार्ताओं को स्थगित करने की हद तक जाने से संकोच नहीं करना चाहिए। इसी के साथ उसे खालिस्तान समर्थक तत्वों की पहचान कर उनके ओसीआइ यानी विदेशी भारतीय नागरिकता कार्ड रद कर उनके भारत आने पर प्रतिबंध लगाना चाहिए।

इसके अतिरिक्त भारत में उनकी संपत्तियों को जब्त भी किया जाना चाहिए। इस तरह की कार्रवाई आस्ट्रेलिया, कनाडा आदि में रह रहे खालिस्तान समर्थकों के भी खिलाफ करनी चाहिए, क्योंकि ब्रिटेन की तरह वे इन देशों में भी बेलगाम हैं। वे कनाडा और आस्ट्रेलिया में अनेक हिंदू मंदिरों को निशाना बना चुके हैं।

भारत को यह समझना होगा कि पश्चिमी देश उसकी नाराजगी को हल्के में लेते हैं और जानबूझकर खालिस्तान समर्थकों की अनदेखी करने में लगे हुए हैं। जब भारत अपनी कठोर कार्रवाई से इन देशों को यह संदेश देगा कि वह खालिस्तानी अतिवादियों की हरकतों को सहन करने के लिए तैयार नहीं, तभी वे अपने लीपापोती वाले रवैये का परित्याग करने के लिए तैयार होंगे।

भारत को विदेश में सक्रिय खालिस्तानी चरमपंथियों को इसलिए गंभीरता से लेना होगा, क्योंकि उनकी आक्रामकता बढ़ती जा रही है। वे खुद को संगठित करके अपनी आर्थिक ताकत बढ़ाने की फिराक में हैं। उनकी गतिविधियां भविष्य में भारत और विशेष रूप से पंजाब में माहौल खराब कर सकती हैं। इसके पहले स्थितियां बिगड़ें, भारत को सक्रिय होना होगा।