COVID-19 के 5 साल बाद भी उबर नहीं पाई दुनिया की इकोनॉमी ?
COVID-19 के 5 साल बाद भी उबर नहीं पाई दुनिया की इकोनॉमी, 2019 के बाद से क्या-क्या बदला?
विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा पहली बार कोविड-19 कोरोनावायरस प्रकोप को महामारी के रूप में वर्णित करने के पाँच साल बाद भी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभाव महसूस किए जा रहे हैं। कोविड-19 और इसे रोकने के प्रयासों ने रिकॉर्ड सरकारी ऋण को बढ़ावा दिया श्रम बाजारों को प्रभावित किया और उपभोक्ता व्यवहार को बदल दिया व यात्रा पैटर्न में बदलाव बरकरार हैं।

- सरकारी कर्ज में 12 फीसदी की वृद्धि
- केंद्रीय बैंकों ने बढ़ा दीं ब्याज की दरें
- लाखों लोगों ने अपनी नौकरी गंवा दी
नई दिल्ली। जब विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोविड-19 को महामारी के तौर पर घोषित किया था, तब लोगों ने नई आदतें अपनानी शुरू कीं। उस दौर को बीते 5 साल हो चुके हैं, लेकिन अभी भी ग्लोबल इकोनॉमी पर इसका असर महसूस किया जाता है।
कोविड-19 और इससे निपटने के प्रयासों के मद्देनजर सरकारों पर रिकॉर्ड मात्रा में कर्ज बढ़ा, लेबर मार्केट पर असर पड़ा, लोगों ने अपनी आदतें बदलीं, रिमोट वर्क, डिजिटल पेमेंट में बढ़ोतरी हुई और ट्रैवल पैटर्न में भी बदलाव देखने को मिला।
सरकारों पर काफी बढ़ गया कर्ज
2020 के बाद से ग्लोबल सरकारी कर्ज में 12 फीसदी की वृद्धि देखने को मिली है। लॉकडाउन हटने के बाद कई सरकारों ने प्रोत्साहन पैकेज दिया। इस दौरान लेबर और रॉ मैटेरियल की कमी के कारण कई देशों में मुद्रास्फीति काफी तेजी से बढ़ी।
भरपाई के लिए केंद्रीय बैंकों ने ब्याज दरें बढ़ा दीं। कई एजेंसियों के डेटा में भी सरकारों द्वारा ज्यादा ऋण लेने की प्रवृत्ति दिखाई देती है। इसके कारण वित्तीय चुनौतियां भी बढ़ी हैं।
रोजगार पर भी पड़ा असर
- लॉकडाउन के वक्त लाखों लोगों ने अपनी नौकरी गंवा दी। इसका सबसे अधिक प्रभाव महिलाओं पर पड़ा। लॉकडाउन खत्म हुआ, तो पुरुष नौकरी पर वापस लौट गए। लेकिन घर-परिवार की जिम्मेदारी के कारण महिलाओं की भागीदारी कम ही रही।
- वर्क फ्रॉम होम के चलते आज भी लंदन जैसे शहरों में यातायात पर दबाव काफी कम है। लोग पहले की तरह ही घूम-फिर रहे हैं, लेकिन फिर भी शहरों में आवागमन कम हो गया है। हालांकि फ्लाइट और होटलों की कीमतें बढ़ी हैं।
ऑनलाइन खरीदारी में आई तेजी
लॉकडाउन में जब घरों से निकलना संभव नहीं था, तब लोगों ने ऑनलाइन शॉपिंग को तरजीह दी। कोविड खत्म हो गया, लेकिन ये आदत अभी भी बरकरार है। हालांकि यूरोप जैसी जगहों पर लोग ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों जगहों से समान खरीदारी कर रहे हैं।
दिसंबर 2019 से बिटकॉइन की कीमत 1,233% बढ़ गई है। लोगों ने अब इन्वेस्टमेंट करना शुरू कर दिया है। महामारी के दौरान डिजिटल और डिलीवरी फर्म के शेयरों में बढ़त दर्ज की गई, साथ ही वैक्सीन बनाने वाली दवा कंपनियों के शेयरों में भी बढ़त दर्ज की गई।