इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने का मन बना रहे हैं तो 8 सवालों के जवाब जरूर जानिए
इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने का मन बना रहे हैं तो 8 सवालों के जवाब जरूर जानिए
छोटे शहरों में चार्जिंग स्टेशन कम हैं, और चार्जर के प्रकार में एकरूपता नहीं है. EV की कीमत पेट्रोल-डीजल वाहनों से ज्यादा है, और फाइनेंसिंग आसान नहीं है.
सरकार ने इसे बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं, जैसे बैटरी पार्ट्स पर टैक्स हटाना और PLI स्कीम शुरू करना. चार्जिंग नेटवर्क को तेजी से बढ़ाया जा रहा है, और स्थानीय उत्पादन को प्रोत्साहन दिया जा रहा है. फाइनेंसिंग के लिए NBFC और प्लेटफॉर्म जैसे वर्टेलो सामने आए हैं, जो 2030 तक 50 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकते हैं. ग्राहकों की जागरूकता बढ़ाना भी जरूरी है, ताकि वे EV के फायदे समझ सकें. कुल मिलाकर, भारत EV के जरिए न सिर्फ अपनी सड़कों को हरा-भरा करना चाहता है, बल्कि दुनिया में स्वच्छ परिवहन का लीडर भी बनना चाहता है. इसके लिए नीतियों, तकनीक, और जागरूकता का सही तालमेल जरूरी है.
1. भारत के इलेक्ट्रिक वाहन (EV) क्षेत्र में मुख्य प्रगति और रुझान क्या हैं?
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है, खासकर शहरों और गांवों में. सरकार की मदद, पर्यावरण के प्रति जागरूकता, और बेहतर वाहन उपलब्धता इसके पीछे कारण हैं. खास तौर पर इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की बिक्री बहुत बढ़ी है. 2023 में EV की बिक्री 49.25% बढ़कर 15.2 लाख हुई. मई 2024 में यह 20.88% बढ़कर 13.9 लाख हो गई. सरकार ने 2030 तक निजी कारों में 30%, कमर्शियल वाहनों में 70%, बसों में 40%, और दोपहिया-तिपहिया में 80% EV का लक्ष्य रखा है, यानी कुल 8 करोड़ EV. बैटरी बनाने में भी प्रगति हो रही है, और टाटा मोटर्स, विनफास्ट जैसी कंपनियां निवेश कर रही हैं. राज्य भी अपनी EV नीतियां बना रहे हैं. चार्जिंग स्टेशन बढ़ रहे हैं, और फाइनेंसिंग सिस्टम भी सुधर रहा है. सेना और सरकारी संस्थान भी EV इस्तेमाल करने लगे हैं.
2. भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों के व्यापक इस्तेमाल में क्या बड़ी चुनौतियां हैं?
प्रगति के बावजूद कई समस्याएं हैं. छोटे शहरों में चार्जिंग स्टेशन कम हैं, और चार्जर के प्रकार में एकरूपता नहीं है. EV की कीमत पेट्रोल-डीजल वाहनों से ज्यादा है, और फाइनेंसिंग आसान नहीं है. लिथियम, कोबाल्ट जैसी चीजों के लिए भारत विदेश पर निर्भर है, जो मुश्किल पैदा करता है. कुछ राज्यों में EV सिस्टम अच्छा है, कुछ में नहीं, जिससे असमानता है. ज्यादातर पार्ट्स बाहर से आते हैं, और लोगों को EV के फायदे, कीमत, और सर्विस की जानकारी कम है. रेंज की चिंता और नीतियों में बदलाव भी परेशानी बढ़ाते हैं.
3. सरकार ने EV उद्योग को बढ़ाने के लिए हाल में क्या कदम उठाए हैं?
सरकार ने बैटरी के पार्ट्स पर इंपोर्ट ड्यूटी हटाई है ताकि भारत में EV बनाना आसान हो. बजट में कोबाल्ट, लिथियम स्क्रैप जैसी चीजों पर टैक्स माफ किया गया है. FAME II और नई स्कीम से खरीदारों और कंपनियों को मदद मिली है. PLI स्कीम से बैटरी बनाने में सहायता हो रही है. राज्य भी अपनी नीतियां बना रहे हैं.
4. भारत EV चार्जिंग सिस्टम को कैसे बेहतर कर रहा है?
भारत में चार्जिंग स्टेशन तेजी से बढ़ रहे हैं, जिसमें तेज चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग शामिल है. कंपनियां और सरकारी फर्म साथ मिलकर काम कर रही हैं. फरवरी 2024 तक 12,146 चार्जिंग स्टेशन थे. ह्युंडई जैसी कंपनियां शहरों और हाईवे पर नेटवर्क बढ़ा रही हैं. स्मार्ट ग्रिड और रिन्यूएबल एनर्जी पर भी ध्यान है.
5. स्थानीय उत्पादन बढ़ाने और आयात कम करने के लिए क्या रणनीतियां हैं?
भारत बैटरी बनाने पर जोर दे रहा है. बजट में बैटरी के सामान पर टैक्स हटाया गया है. PLI 2.0 से नई तकनीक और रिसाइक्लिंग को बढ़ावा मिल रहा है. रिसर्च और डेवलपमेंट पर ध्यान है ताकि आयात कम हो और नौकरियां बढ़ें.
6. EV के लिए फाइनेंसिंग सिस्टम कैसे बदल रहा है?
भारत में NBFC और प्लेटफॉर्म जैसे वर्टेलो EV को सस्ता और आसान बना रहे हैं. छोटे वाहनों और कमर्शियल फ्लीट के लिए फाइनेंसिंग बढ़ रही है. 2030 तक EV फाइनेंसिंग 50 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है. MSME और छोटे कारोबारियों के लिए खास स्कीम बन रही हैं.
7. EV में बदलाव में ग्राहक और जागरूकता की क्या भूमिका है?
ग्राहकों की जानकारी और सोच बहुत जरूरी है. अभी लोगों को EV के फायदे, कीमत, और सर्विस की पूरी समझ नहीं है. रेंज और सर्विस की चिंता रहती है. जागरूकता बढ़ाना जरूरी है, खासकर छोटे शहरों में. कैंपेन से लोगों का नजरिया बदल सकता है.
8. EV को बढ़ाने और भारत को लीडर बनाने के लिए क्या नीतियां चाहिए?
चार्जिंग स्टेशन का एक बड़ा नेशनल प्लान, सब्सिडी की स्थिरता, बैटरी उत्पादन पर जोर, स्मार्ट सिटी के साथ EV प्लानिंग, MSME के लिए फाइनेंसिंग, सरकारी खरीद में EV शामिल करना, स्किल डेवलपमेंट, स्टार्टअप को बढ़ावा, और जागरूकता कैंपेन जरूरी हैं.