पार्थ पवार से जुड़ी 300 करोड़ की डील रद्द ?
Pune Land Deal: पार्थ पवार से जुड़ी 300 करोड़ की डील रद्द, कार्यकर्ता ने उठाए थे सवाल; जानें अब तक क्या हुआ
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे पार्थ पवार से जुड़ी 300 करोड़ रुपये की मुंधवा जमीन डील पर नया खुलासा हुआ है। इस सौदे में स्टांप ड्यूटी माफ किए जाने की जानकारी एक सामाजिक कार्यकर्ता ने प्रशासन को दी थी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। अब यह मामला राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है और शुक्रवार शाम को यह सौदा रद्द कर दिया गया।
पार्थ पवार से जुड़ी 300 करोड़ की डील रद्द
संयुक्त जिला रजिस्ट्रार संतोष हिंगणे ने इस शिकायत की पुष्टि करते हुए बताया कि शिकायत मिलने के बाद जांच शुरू की गई। जांच में पता चला कि जमीन का विक्रय विलेख आधिकारिक रिकॉर्ड में बदलाव कर तैयार किया गया था। संयुक्त IGR राजेंद्र मुत्थे, जो राज्य सरकार के आदेश पर बनी जांच समिति का नेतृत्व कर रहे हैं, ने कहा कि शिकायत के आधार पर पूरी प्रक्रिया की 7 दिनों में रिपोर्ट दी जाएगी। इस बीच, शुक्रवार शाम अजित पवार ने खुद घोषणा की कि मुनधवा जमीन सौदा रद्द कर दिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके बेटे पार्थ पवार को इस बात की जानकारी नहीं थी कि जमीन सरकारी है।
इन तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज
रजिस्ट्रार कार्यालय के महानिरीक्षक ने पिंपरी चिंचवाड़ पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराई। दिग्विजय पाटिल, शीतल तेजवानी और सब-रजिस्ट्रार आरबी तारू के ख़िलाफ़ कथित गबन और धोखाधड़ी के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई है। शीतल पर पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए जमीन के 272 ‘मालिकों’ का प्रतिनिधित्व करने का आरोप है।

डिप्टी सीएम अजीत पवार ने इस लेन-देन से किसी भी तरह के संबंध से इनकार करते हुए कहा, इस जमीन सौदे से मेरा दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है। मुख्यमंत्री को इसकी जांच जरूर करानी चाहिए। यह उनका अधिकार है।किसी भी तरह की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बकौल अजीत पवार, ‘मैंने कभी किसी अधिकारी को अपने रिश्तेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए नहीं कहा। जब आपके बच्चे बड़े हो जाते हैं, तो वे अपना व्यवसाय करते ही हैं।’300 करोड़ की डील पर मुख्यमंत्री और डिप्टी सीएम अजित पवार क्या सोचते हैं?
खबरों के मुताबिक मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस लेन-देन को ‘प्रथम दृष्टया गंभीर’ माना है। उन्होंने अधिकारियों को सभी विवरण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। इस हाईप्रोफाइल मामले में उद्योग मंत्री उदय सामंत ने कहा, 21 करोड़ की स्टांप ड्यूटी कथित तौर पर माफ करने से उनके विभाग का सरोकार नहीं है। इससे पहले सामंत ने पहले कहा था कि इस मामले में सभी आरोपों का जवाब खुद पार्थ पवार देंगे। जमीन सरकार की थी या किसी अन्य प्राधिकरण की, इसकी पुष्टि होनी चाहिए।
क्या है पूरा मामला
बता दें कि यह मामला 300 करोड़ रुपये की एक जमीन खरीद से जुड़ा है, जिसमें कथित तौर पर पार्थ पवार से जुड़े एक फर्म का नाम भी शामिल है। इस सौदे में अनियमितताओं के आरोप उठे हैं, जिसके चलते सरकार ने एक सब-रजिस्ट्रार को निलंबित किया है और उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही, लेन-देन से जुड़े तीन लोगों पर एफआईआर भी दर्ज की गई है। एक अधिकारी के अनुसार, पुणे के पॉश इलाके मुंधवा में महार (अनुसूचित जाति) समुदाय की जमीन बेची गई है। एसटी श्रेणी की ये 40 एकड़ ‘महार वतन’ वंशानुगत भूमि अमाडिया एंटरप्राइजेज एलएलपी को बेची गई। इसका प्रतिनिधित्व उसके साझेदार दिग्विजय अमरसिंह पाटिल करते हैं। डील के दौरान 21 करोड़ रुपये का स्टांप शुल्क माफ किया गया। पार्थ पवार भी इस फर्म में साझेदार हैं।

