मध्य प्रदेश

10 साल में 88000 को देश से निकाला… घुसपैठियों पर कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह का बड़ा दावा !

10 साल में 88000 को देश से निकाला… घुसपैठियों पर कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह का बड़ा दावा, SIR और BJP पर साधा निशाना

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने दावा किया कि यूपीए सरकार ने 88 हजार घुसपैठियों को वापस भेजा, जबकि भाजपा सरकार ने 11 सालों में केवल 2400 को. उन्होंने भाजपा की घुसपैठियों को वापस भेजने की नीति और एसआईआर प्रक्रिया पर सवाल उठाए, जिससे नागरिकता साबित करने का बोझ जनता पर आ गया है.

10 साल में 88000 को देश से निकाला... घुसपैठियों पर कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह का बड़ा दावा, SIR और BJP पर साधा निशाना

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह. (फाइल फोटो)

बीजेपी सरकार लंबे समय से अपनी घुसपैठियों को वापस भेजने की नीति को चुनावों में भुना रही है. अब कांग्रेस ने इसे आंकड़ों के जरिए काउंटर करने की कोशिश की है. बीजेपी की ओर से कराए जा रहे SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) की खिल्ली उड़ाते हुए, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने शनिवार को दावा किया कि बीजेपी सरकार ने 11 सालों में सिर्फ 2400 घुसपैठियों को पकड़ा, जबकि UPA शासन के दौरान ऐसे 88 हजार लोगों को वापस भेजा गया था.

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने बीजेपी के उस दावे पर यह बात कही है, जिसमें कहा जा रहा है कि SIR के जरिए घुसपैठियों को वोटिंग लिस्ट से बाहर निकाला जाएगा. दिग्विजय ने मीडिया से कहा, “बिहार विधानसभा चुनावों में बीजेपी ‘घुसपैठियों’ का नारा लगा रही है, लेकिन सच्चाई क्या है? केंद्र में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के दो कार्यकालों के दौरान 2004 से 2014 तक 88 हजार ऐसे लोगों को वापस भेजा गया जो देश के नागरिक नहीं थे.”

उन्होंने आगे कहा, “लेकिन बीजेपी के पिछले 11 सालों में केवल 2400 घुसपैठिए ही मिले हैं. इसका मतलब है कि UPA शासन के दौरान जितने घुसपैठिए मिले थे, उनका तीन फीसद भी उन्हें नहीं मिला है. इसके बावजूद, भाजपा हमेशा घुसपैठियों का मुद्दा उठाती रहती है.”

SIR प्रक्रिया पर उठाए सवाल

इस हफ्ते से मध्य प्रदेश में शुरू हो रही SIR प्रक्रिया पर बोलते हुए दिग्विजय सिंह ने सिंह ने कहा कि पहले यह सुनिश्चित करना चुनाव आयोग का काम था कि प्रत्येक नागरिक को अपने मताधिकार का प्रयोग करने का अधिकार मिले, लेकिन SIR के तहत नागरिकता साबित करने की ज़िम्मेदारी जनता पर डाल दी गई है.

उन्होंने पूछा कि अगर कोई व्यक्ति अपनी नागरिकता साबित करने में विफल रहता है तो उसके क्या परिणाम होंगे. मतदाता सूचियों में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए, कांग्रेस नेता ने चुनाव आयोग से चुनावों की घोषणा के तुरंत बाद मतदाता सूची को फ्रीज करने का आग्रह किया ताकि नाम जोड़ने या हटाने से रोका जा सके.

उपलब्ध मतदाता सूचियों में भी होती कमियां

सिंह ने कहा कि 2003 में जन्म प्रमाण पत्र, राशन कार्ड और स्कूल प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज़ पर्याप्त थे, लेकिन अब नागरिकता प्रमाण पत्र, जो 99 प्रतिशत भारतीयों के पास नहीं है, की मांग की जा रही है.

उन्होंने कहा कि उम्मीदवारों को दी जाने वाली मतदाता सूचियां और मतदान के दिन पीठासीन अधिकारियों के पास उपलब्ध मतदाता सूचियां अक्सर भिन्न होती हैं, जिसके कारण योग्य मतदाता छूट जाते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *