क्या होता है अमोनियम नाइट्रेट फ्यूल ऑयल…..क्या खाद बनाने वाले केमिकल से किया दिल्ली ब्लास्ट ?
10 नवंबर को दिल्ली में लाल किले के पास हुए ‘बम धमाके’ में ANFO यानी अमोनियम नाइट्रेट फ्यूल ऑयल का इस्तेमाल किया गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सूत्रों ने जांच की शुरुआती रिपोर्ट के हवाले से ये जानकारी दी है। ANFO में विस्फोट करने के लिए डेटोनेटर को मैन्युअली ट्रिगर किया गया। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, इस धमाके में 9 लोग मारे गए और 20 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।
दिल्ली ब्लास्ट में इस्तेमाल अमोनियम नाइट्रेट फ्यूल ऑयल से जुड़े 5 सवालों के जवाब…
सवाल-1: अमोनियम नाइट्रेट क्या है और इससे खतरनाक विस्फोटक कैसे बनता है?
जवाब: अमोनियम नाइट्रेट यानी AN का केमिकल फॉर्मूला NH4NO3 है। ये एक गंधहीन, सफेद दानेदार केमिकल होता है। जर्मन केमिस्ट जोहन रुडॉल्फ ग्लॉबर ने 17वीं सदी में इसे सबसे पहले तैयार किया था।
सिंथेटिक अमोनियम नाइट्रेट बनाने के लिए अमोनिया और नाइट्रिक एसिड का रिएक्शन करवाया जाता है। 20वीं सदी में इसका औद्योगिक स्तर पर उत्पादन होने लगा। आज दुनियाभर के कई देशों में इंडस्ट्रियल यूज के लिए इसे बनाया जाता है।
चोट वगैरह लगने पर सिंकाई के काम में आने वाले इंस्टेंट आइस पैक, केमिकल इंडस्ट्री और सबसे ज्यादा फर्टिलाइजर यानी खाद बनाने में इसका यूज होता है। दुनिया भर में नाइट्रेट बेस्ड फर्टिलाइजर का इस्तेमाल सबसे आम है।
AN खुद में कोई विस्फोटक नहीं है, लेकिन अगर इसे डीजल या किसी दूसरे फ्यूल से मिला दिया जाए, तो ये खतरनाक बम में बदल जाता है।
इंडस्ट्रियल यूज के तहत ANFO का इस्तेमाल खदानों में ब्लास्ट करने, कोई इमारत गिराने यानी सिविल डिमोलिशन जैसे कामों में इसका इस्तेमाल करते हैं। इसके विस्फोट से बड़ा गड्ढा हो जाता है। विस्फोट की स्पीड 14 हजार किमी प्रति घंटा तक होती है। इससे जो वेव्स पैदा होती हैं, वो साउंड वेव से करीब 5 गुना ज्यादा तेज होती हैं।

सवाल-2: ANFO कितना खतरनाक, ये कितनी तबाही मचा सकता है?
जवाब: ANFO के विस्फोट से बड़ा गड्ढा हो जाता है। विस्फोट की स्पीड 14 हजार किमी प्रति घंटा तक होती है। इससे जो वेव्स पैदा होती हैं, वो साउंड वेव से करीब 5 गुना ज्यादा तेज होती हैं। इससे कान और फेफड़े तुरंत खराब हो सकते हैं। साथ ही ये विस्फोट शीशे, लोहे और ईंटें टुकड़ों में उड़कर लोगों को चीर-फाड़ सकता है। विस्फोट के बाद आग, इमारतों का टूटना और जहरीली गैसें भी हवा में फैल सकती हैं।
अमोनियम नाइट्रेट के विस्फोट और आग से नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) और अमोनिया जैसी जहरीली गैसें निकलती हैं, जो सांस की तकलीफ और जलन पैदा कर सकती हैं।
1 किलो ANFO को 0.8 किलो TNT के बराबर विस्फोटक क्षमता का माना जाता है। इससे 5-7 मीटर व्यास का गड्ढा हो सकता है। विस्फोट का दायरा करीब 30 मीटर तक होता है। अगर भीड़ के बीच धमाका हो, तो दर्जनों लोगों की जान जा सकती है। सिर्फ 150 किलो अमोनियम नाइट्रेट 1 किलोमीटर तक असर कर सकता है। ये धमाका इतना तेज होता है कि 50-70 मीटर तक सब कुछ तबाह हो जाता है।
विस्फोटक की मात्रा और जहां धमाका हुआ, वहां मौजूद लोगों की संख्या के अनुसार तबाही बढ़ सकती है।
उदाहरण के लिए 1995 में अमेरिका के ओक्लाहोमा सिटी में करीब 1800 किलो यानी 1 टन के ANFO विस्फोटक से धमाका हुआ, इसमें बिल्डिंग में मौजूद 168 लोगों की मौत हो गई। लगभग 3000 किलो अमोनियम नाइट्रेट का धमाका एक पूरी बड़ी इमारत या पूरा मोहल्ला उड़ा सकता है। 50–70 मीटर के अंदर सब कुछ समतल हो जाएगा। 500–600 मीटर तक खिड़कियां चकनाचूर हो सकती हैं। लोग 200–300 मीटर दूर तक उड़ते कांच और मलबे से घायल या मारे जा सकते हैं। धमाके की आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनी जाएगी।

सवाल-3: दिल्ली धमाके में ANFO की कितनी मात्रा इस्तेमाल की गई?
जवाब: सुरक्षा एजेंसियां अभी इसकी जांच कर रही हैं। अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है कि ANFO बेस्ड IED ब्लास्ट हुआ या कोई दूसरा विस्फोटक इस्तेमाल किया गया। हालांकि ब्लास्ट के बाद सामने आए वीडियो में कार में लगी आग से एक जगह नारंगी धुआं निकलता दिख रहा है। जानकारों के मुताबिक, अमोनियम नाइट्रेट में धमाका होने पर नारंगी रंग का धुआं निकलता है क्योंकि इस धमाके से नाइट्रोजन ऑक्साइड और अमोनिया जैसी गैस निकलती हैं। हवा में मिलने के बाद नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड की वजह से धुआं नारंगी रंग का दिखता है। हालांकि, मौके पर लिए गए सैंपल की फोरेंसिक जांच के बाद ही इसकी पुष्टि हो सकेगी।

वहीं धमाके की इंटेंसिटी देखते हुए ये अंदाजा लगाया जा सकता है कि अगर ये ANFO का ही धमाका था, तो इसकी कम से कम 100 किलो मात्रा का इस्तेमाल किया गया है। करीब 100 मीटर दूरी तक धमाके की वेव महसूस की गईं। कई दुकानों के शीशे चटक गए, धमाके के समय मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि आवाज इतनी तेज थी कि लोगों के कान सुन्न हो गए।
सवाल-4: अमोनियम नाइट्रेट खरीदना कितना आसान, इस रखने के क्या नियम?
जवाब: AN मुख्य रूप से नाइट्रोजन खाद है, जो किसानों के लिए जरूरी है। 2024 में भारत का AN मार्केट 822 हजार टन का था, जो 2030 तक 997 हजार टन पहुंचेगा। यह कृषि मंत्रालय की सब्सिडी पर 20-30 रूपए प्रति किलो बिकता है। इसका इंडस्ट्रियल यूज ही है, इसलिए खाद की दुकानों से लेकर इंडस्ट्रियल पर आसानी उपलब्ध हो जाता है।
हालांकि 2012 में बने कुछ नियमों के मुताबिक, अगर किसी दूसरे केमिकल में अमोनियम नाइट्रेट को मिलाया गया है, तो इस पर कुछ सख्त प्रावधान हैं। इसके तहत वजन के हिसाब से इमल्शन, पेंट या किसी जेल में अगर 45% से ज्यादा अमोनियम नाइट्रेट मिलाया गया है, तो इसे विस्फोटक की कैटेगरी में रखा जाएगा। चूंकि इस विस्फोटक का भी इस्तेमाल माइनिंग वगैरह में किया जाता है, इसलिए इसमें पेट्रोलियम, विस्फोटक सिक्योरिटी ऑर्गेनाइजेशन वगैरह से लाइसेंस लेना पड़ता है। किसी के पास लाइसेंस नहीं है, तो वह ANFO नहीं खरीद सकता।

सवाल-5: इससे पहले अमोनियम नाइट्रेट के बम से कितने आतंकी हमले हुए?
जवाब: ANFO बम से सबसे पहला बड़ा धमाका साल 1995 में अमेरिका के ओक्लाहोमा सिटी में हुआ। बम में 1800 किलो AN इस्तेमाल किया गया था। धमाके में आधी बिल्डिंग उड़ गई थी और 168 लोग मारे गए थे। इसके अलावा साल 2020 में बेरूत में करीब 3 हजार किलो अमोनियम नाइट्रेट के फटने से भारी तबाही हुई थी। शहर का बड़ा इलाका तबाह हो गया था और करीब 200 लोग मारे गए थे।
भारत में अमोनियम नाइट्रेट (AN) से जुड़े धमाके और घटनाएं
- 1985 दिल्ली सीरियल ब्लास्ट: 20 अक्टूबर को दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में 7 जगहों पर बम फटे। AN को पिक्रिक एसिड और ड्राई बैटरी के साथ ट्रांजिस्टर जैसी छोटी डिवाइस में भरा गया। 5 लोग मारे गए, दर्जनों घायल हुए। घटनास्थल से जिंदा बम भी बरामद किया गया था। ब्लास्ट में खालिस्तानी समूहों का हाथ था।
- पुणे सीरियल ब्लास्ट, 2010: 13 फरवरी को जे.जे. हॉस्पिटल, ओशो आश्रम और साबरी सोसाइटी के पास बम फटे। घटनास्थल से AN के अवशेष मिले थे। 17 लोग मारे गए और 60 से ज्यादा लोग घायल हुए। हमले के पीछे इंडियन मुजाहिदीन का नाम सामने आया था।
- हैदराबाद ब्लास्ट्स 2007: हैदराबाद की मक्का मस्जिद और अन्य जगहों पर हुए हमलों में AN के निशान मिले। 2007 में 16 मारे गए, सैकड़ों घायल हुआ। हमले के तार SIMI से जुड़े थे।
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