यूपी के विजन को बिहार से ‘आक्सीजन’, नई पीढ़ी ने बदला सियासत का रंग ?
UP: ‘न जाति, न पाति, न धर्म न मजहब…’, यूपी के विजन को बिहार से ‘आक्सीजन’, नई पीढ़ी ने बदला सियासत का रंग
न जाति, न पाति, न धर्म न मजहब। सिर्फ सुशासन और विकास पर विश्वास। बिहार विधानसभा चुनाव के जनादेश का यही संदेश है। यह मुद्दा सभी अन्य मुद्दों पर भारी रहा।
हार विधानसभा चुनाव में भाजपा नीति राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठनबंधन (एनडीए) को मिली अप्रत्याशित सफलता से सिर्फ बिहार ही नही, बल्कि यूपी की सियासत को भी प्रभावित करेगा।
हालांकि बिहार के मुद्दे और जनता का मिजाज यूपी के सियासी समीकरणों से थोड़ा अलग है, फिर वहां के चुनाव परिणाम ने साफ कर दिया है कि अब आगे चुनाव चाहे जिस भी प्रदेश में होगा, वहां भी ध्रुवीकरण की राजनीति के बजाय विकास और सुशासन के मुद्दे ही परिणाम तय करेंगे।
इस लिहाज से सबसे अधिक प्रभाव यूपी के सियासत पर भी पड़ेगा। नतीजों के जरिये बिहार ने यूपी की भाजपा सरकार के विजन को एक तरह से ” ऑक्सीजन ” देने का भी काम किया है।
दरअसल बिहार चुनाव में भाजपा ने अपनी चुनावी रणनीति में धर्म, जाति, मजहब और ध्रुवीकरण के मुद्दे को तवज्जों देने के बजाए, यूपी की तर्ज पर विकास, सुशासन और माफिया विरोधी अभियान के आधार पर बिहार को भी सजाने-संवारने का राग छेड़ा था।
बिहार में चुनाव प्रचार करने वाले भाजपा नेताओं भी अपने-अपने भाषणों में यूपी के विकास मॉडल के साथ ही कानून-व्यवस्था की खूब चर्चा की। वहीं, लालू राज में जंगलराज की भी याद दिलाई। भाजपा नेताओं ने राजद पर कट्टा और माफिया को संरक्षण देने की याद दिलाकर भी जनता को जगाने का काम किया था।
माना जा रहा है कि अगले साल पश्चिम बंगाल और 2027 में यूपी होने वाले विधानसभा चुनाव के रिहर्सल के तौर पर बिहार चुनाव में भाजपा ने अपनी चुनावी जाति-पाति की रणनीति बदलकर एक तरह से टेस्ट किया है। चूंकि इस टेस्ट में भाजपा गठबंधन पास हो गया है, इसलिए माना जा रहा है कि भाजपा यूपी के सियासी मैदान में भी इसी रणनीति के आधार पर उतरेगी।
नई पीढ़ी की पसंद से बदली बिहार की सियासत का रंग निश्चित रूप से यूपी में भी भाजपा को 27 के विधानसभा चुनाव के लिए जमीन तैयार करने में मदद करेंगे। ऐसा भी नही है कि इन परिणामों में सिर्फ विपक्ष के लिए ही नहीं, बल्कि बिहार चुनाव के नजीजों में सत्तारूढ़ दल भाजपा के लिए भी कुछ सबक छिपे दिख रहे हैं।

