सेकेंड हैंड कार खरीदते हुए जांचें 8 डॉक्यूमेंट्स, बेचते हुए रखें 11 सावधानियां !
हाल ही में दिल्ली में लाल किला के पास एक कार में हुए विस्फोट ने सभी को चौंका दिया। इस हादसे में 13 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 20 लोग घायल हैं। जांच में पता चला कि जिस कार में विस्फोट हुआ, उसे कई बार खरीदा-बेचा गया था।
पुलिस ने उसके पहले मालिक समेत सभी पूर्व मालिकों को जांच के दायरे में लिया है। यह घटना उन सभी लोगों के लिए एक सबक है, जो कार खरीदने-बेचने की प्रक्रिया को हल्के में लेते हैं। इसमें थोड़ी सी लापरवाही भी भारी पड़ सकती है।
दरअसल कार का मालिकाना हक सिर्फ एक लेन-देन भर नहीं होता, बल्कि यह एक कानूनी जिम्मेदारी भी है। कई बार लोग गाड़ी बेचने के बाद यह सोचकर निश्चिंत हो जाते हैं कि अब उससे उनका कोई संबंध नहीं है, लेकिन अगर ट्रांसफर की प्रक्रिया अधूरी रह जाए तो भविष्य में किसी दुर्घटना, अपराध या ट्रैफिक उल्लंघन की स्थिति में पुराने मालिक के सिर पर परेशानी आ सकती है।
ऐसे में चाहे आप कार खरीद रहे हों या बेच रहे हों, कुछ जरूरी कानूनी और व्यावहारिक सावधानियां बरतना बहुत जरूरी है।
पुरानी कार खरीदते-बेचते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। साथ ही जानेंगे कि-
- पुरानी कार खरीदते समय कौन से डॉक्यूमेंट्स की जांच करना जरूरी है?
- ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से पुरानी कार खरीदना कितना सुरक्षित है?
एक्सपर्ट: सौरभ कुमार, संभागीय परिवहन अधिकारी, बांदा, उत्तर प्रदेश
सवाल- सेकेंड हैंड कार खरीदने-बेचने का सही नियम क्या है?
जवाब- ‘मोटर वाहन अधिनियम, 1988’ के तहत धारा 50 में सेकेंड-हैंड कारों की खरीद-बिक्री के लिए स्पष्ट नियम निर्धारित हैं, ताकि वाहन स्वामित्व, टैक्स और ट्रैफिक उल्लंघन से जुड़ी जिम्मेदारियां स्पष्ट रहें। साथ ही भविष्य में किसी विवाद या कानूनी परेशानी से बचा जा सके। इसे नीचे दिए पॉइंट्स से समझिए-
RC ट्रांसफर
सेकेंड हैंड कार खरीदते-बेचते समय रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) नए मालिक के नाम पर ट्रांसफर करना कानूनी रूप से अनिवार्य है। इसके लिए फॉर्म 29 और 30 भरकर RTO (रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस) में जमा करना होता है। याद रखें, जब तक RC आधिकारिक रूप से ट्रांसफर नहीं हो जाती है, तब तक पुराना मालिक ही कानूनी रूप से जिम्मेदार माना जाता है।
नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) और हाइपोथिकेशन क्लियरेंस
अगर कार पर लोन है तो पहले बैंक से NOC लेना जरूरी होता है। इसके बाद RTO में RC से बैंक/फाइनेंस कंपनी का हाइपोथिकेशन (गिरवी) हटाया जाता है, जो साबित करता है कि लोन पूरा चुका दिया गया है। हाइपोथिकेशन हटने के बाद ही गाड़ी को बेचने, ट्रांसफर करने या मॉडिफाई कराने की पूरी स्वतंत्रता मिलती है। बिना NOC मालिकाना हक ट्रांसफर नहीं हो सकता है।
इंश्योरेंस
सेकेंड हैंड कार खरीदने के साथ उसकी इंश्योरेंस पॉलिसी को नए मालिक के नाम ट्रांसफर करवाना अनिवार्य होता है। अगर पॉलिसी ट्रांसफर नहीं की गई तो दुर्घटना की स्थिति में कानूनी जिम्मेदारी अब भी पुराने मालिक पर ही आ सकती है। साथ ही दुर्घटना का इंश्योरेंस क्लेम भी तभी पास होगा, जब पॉलिसी नए मालिक के नाम पर अपडेट हो।
पॉल्यूशन, रोड टैक्स और चालान रिकॉर्ड
पुरानी कार का PUC (पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल) सर्टिफिकेट और रोड टैक्स पेमेंट रिकॉर्ड अपडेट होना चाहिए। बिना वैध PUC के गाड़ी ट्रांसफर नहीं की जा सकती है। यह भी चेक करें कि गाड़ी पर कोई बकाया टैक्स, जुर्माना या पेंडिंग चालान तो नहीं है।
सेल लेटर और डिलीवरी नोट
कार हैंडओवर करने से पहले सेल लेटर और डिलीवरी नोट पर दोनों पक्षों के हस्ताक्षर कराना चाहिए। ये डॉक्यूमेंट इस बात का सबूत है कि कार कब और किसे सौंपी गई। लिखित एग्रीमेंट में गाड़ी की कीमत, हैंडओवर की तारीख जरूर मेंशन करें।
RTO में ट्रांसफर का स्टेटस
कार बेचने के बाद अपने राज्य के RTO वेबसाइट या परिवहन पोर्टल (parivahan.gov.in) पर जाकर यह सुनिश्चित करें कि ट्रांसफर प्रक्रिया पूरी हो गई है।
सवाल- अगर कार डीलर के जरिए खरीदी-बेची जा रही है तो किन बातों का लिखित एग्रीमेंट करवाना चाहिए?
जवाब- अगर कार किसी डीलर या ब्रोकर के जरिए खरीद-बेच रहे हैं तो पूरा लेनदेन सिर्फ बातचीत भरोसे पर न छोड़ें। एक लिखित एग्रीमेंट जरूर बनवाएं, जिसमें कुछ बातें साफ-साफ दर्ज करें। जैसेकि-
- वाहन की पूरी डिटेल: कार का मॉडल, रजिस्ट्रेशन नंबर, इंजन और चेसिस नंबर, किलोमीटर रीडिंग आदि।
- खरीदार और विक्रेता की जानकारी: दोनों के नाम, पता, मोबाइल नंबर और पहचान पत्र (जैसे आधार या पैन) की कॉपी।
- पेमेंट डिटेल: तय की गई कीमत, पेमेंट का तरीका (कैश, चेक, ऑनलाइन) और भुगतान की तारीख।
- ओनरशिप ट्रांसफर की जिम्मेदारी: यह स्पष्ट लिखा हो कि RTO में ट्रांसफर कौन करवाएगा और कितने दिन में प्रक्रिया पूरी करनी है।
- दुर्घटना या जुर्माने की जिम्मेदारी: एग्रीमेंट की तारीख के बाद किसी चालान या दुर्घटना की जिम्मेदारी किसकी होगी, यह भी स्पष्ट करें।
- वाहन की स्थिति: वाहन की मौजूदा स्थिति लिखें ताकि आगे किसी तकनीकी खराबी या विवाद की स्थिति में आप सुरक्षित रहें।
एग्रीमेंट हमेशा दो गवाहों के हस्ताक्षर के साथ बनवाएं और दोनों पक्ष एक-एक कॉपी अपने पास रखें। इससे किसी विवाद या कानूनी जांच की स्थिति में आपका पक्ष मजबूत रहेगा।
सवाल- अगर कार पर लोन बाकी है तो क्या उसे बेचा जा सकता है? इसकी क्या प्रक्रिया है?
जवाब- हां, लेकिन इसके लिए कुछ कानूनी और बैंकिंग प्रक्रिया पूरी करनी होती है। दरअसल लोन खत्म होने तक कार का असली मालिकाना हक बैंक या फाइनेंस कंपनी के पास रहता है। इसलिए सीधे बेचने की बजाय कुछ जरूरी प्रक्रिया अपनानी होती है।
स्टेप 1: लोन क्लियरेंस लें, बैंक को सूचित करें
अगर आप पूरी EMI चुका सकते हैं तो बैंक से NOC और हाइपोथिकेशन रिमूवल लेटर लें। इससे कार की फाइनेंसिंग कंडीशन क्लियर हो जाती है।
स्टेप 2: बैंक की अनुमति से ट्रांसफर प्रक्रिया करें
अगर लोन अभी जारी है और खरीदार उसे आगे चुकाना चाहता है तो बैंक की लिखित अनुमति जरूरी है। बैंक खरीदार का क्रेडिट रिकॉर्ड देखकर तय करेगा कि लोन ट्रांसफर किया जा सकता है या नहीं।
स्टेप 3: RTO में हाइपोथिकेशन हटवाएं
लोन पूरी तरह चुकाने के बाद RTO में जाकर कार के RC से हाइपोथिकेशन एंट्री हटवाएं। इसके लिए NOC, फॉर्म 35 और RC की जरूरत होती है।
स्टेप 4: लिखित एग्रीमेंट बनवाएं
अगर लोन ट्रांसफर प्रक्रिया चल रही है तो एक सेल एग्रीमेंट बनाएं, जिसमें स्पष्ट लिखा हो कि EMI की जिम्मेदारी किसकी होगी और कब तक ट्रांसफर प्रक्रिया पूरी करनी है।
सवाल- सेकेंड हैंड कार खरीदते समय किन डॉक्यूमेंट्स की जांच करना जरूरी है?
जवाब- पुरानी कार खरीदने से पहले कुछ जरूरी डॉक्यूमेंट्स की जांच अवश्य करें। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए-

सवाल- RC, इंश्योरेंस और पॉल्यूशन सर्टिफिकेट की वैधता कैसे चेक करें?
जवाब- इन डॉक्यूमेंट्स की जांच ऑनलाइन बहुत आसानी से की जा सकती है।
रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट
- भारत सरकार के VAHAN पोर्टल (https://vahan.parivahan.gov.in/) पर जाएं।
- ‘नो योर व्हीकल डिटेल्स’ सेक्शन में गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नंबर डालें।
- यहां RC की वैधता, ओनर का नाम, रजिस्ट्रेशन डेट और टैक्स डिटेल्स मिल जाती हैं।
इंश्योरेंस वैलिडिटी
- IIB (इंश्योरेंस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो) की वेबसाइट (https://iib.gov.in) या इंश्योरेंस कंपनी की वेबसाइट पर जाएं।
- यहां कार का रजिस्ट्रेशन नंबर या इंजन नंबर डालकर इंश्योरेंस की एक्सपायरी डेट और पॉलिसी स्टेटस का पता चल जाता है।
पॉल्यूशन सर्टिफिकेट
- परिवहन पोर्टल (https://puc.parivahan.gov.in/) पर जाएं।
- ‘PUC सर्टिफिकेट’ ऑप्शन में रजिस्ट्रेशन नंबर डालें।
- यहां से PUC की एक्सपायरी डेट, टेस्ट रिजल्ट और सर्टिफिकेट नंबर की जानकारी मिल जाती है।
सवाल- कार बेचते समय किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है?
जवाब- कार बेचते समय छोटी-सी लापरवाही आगे चलकर चालान, जुर्माना या कानूनी परेशानी का कारण बन सकती है। इसलिए व्यवहारिक और कानूनी दोनों तरह की सावधानियां जरूर बरतें। इन्हें नीचे दिए ग्राफिक से समझिए-

सवाल- ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से पुरानी कार खरीदना कितना सुरक्षित है और धोखाधड़ी से कैसे बचें?
जवाब- आजकल सेकेंड हैंड कार खरीदने के लिए OLX, Cars24, Spinny, Droom, Cardekho जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म काफी पॉपुलर हो गए हैं। ये साइट्स आसान तुलना और पेपरवर्क में मदद जरूर करती हैं, लेकिन पूरी तरह सुरक्षित तभी हैं, जब खरीदार कुछ जरूरी सावधानियां बरतें। ऑनलाइन डील में सबसे बड़ा खतरा फर्जी लिस्टिंग, फेक डॉक्यूमेंट और पेमेंट फ्रॉड का होता है। इसलिए किसी भी डील से पहले कुछ बातों का ध्यान रखें।

सवाल- पुरानी बेचने के कितने दिनों के भीतर कार ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी करनी होती है?
जवाब- कार बेचने के बाद 14 दिन के भीतर RTO में RC ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी कर देनी चाहिए। अगर गाड़ी दूसरे राज्य में बेची गई है तो यह अवधि 45 दिन होती है। तय समय पर ट्रांसफर न कराने पर चालान, टैक्स या दुर्घटना की जिम्मेदारी पुराने मालिक पर आ सकती है।
सवाल- RC ट्रांसफर में आमतौर पर कितना समय लगता है और इसकी फीस कितनी है?
जवाब- RC ट्रांसफर की प्रक्रिया आमतौर पर 7 से 30 दिन में पूरी हो जाती है। यह RTO के वर्कलोड और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन पर निर्भर करता है। फीस वाहन के प्रकार और राज्य के हिसाब से बदलती है। आमतौर पर दो पहिया वाहन के लिए 150-300 रुपए, चार पहिया के लिए 300-500 रुपए और अन्य चार्ज 50 से 200 रुपए तक हो सकती है। अगर कार दूसरे राज्य में ट्रांसफर हो रही है तो NOC और री-रजिस्ट्रेशन की अतिरिक्त फीस भी लगती है

