अब अभिभावकों के फैसलों पर भी Gen-Z का दखल ?
अब अभिभावकों के फैसलों पर भी Gen-Z का दखल, कैसे माता-पिता को प्रभावित कर रहे हैं किशोर?
भारत में परिवारों की खरीदारी की आदतों में बदलाव आ रहा है। माता-पिता अब जेन-जी बच्चों को खरीदारी के फैसलों में शामिल कर रहे हैं। एक अध्ययन के अनुसार, जेन-जी के प्रभाव से 2035 तक 50% पुराने ब्रांड अपनी प्रासंगिकता खो सकते हैं। जेन-जी इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर समीक्षाएं देखकर अपनी राय बनाते हैं और नए ब्रांडों को अपनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनकी खर्च क्षमता 2030 तक एक ट्रिलियन डॉलर से अधिक होने का अनुमान है।

- खरीदारी में जेन-ज़ी का बढ़ता दखल
- पुराने ब्रांडों के लिए खतरा
- 2030 तक ट्रिलियन डॉलर खर्च क्षमता
नई दिल्ली। भारत में परिवारों की खरीदारी की आदतों में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। घर में कौन सी चीज किस ब्रांड की खरीदी जाएगी, इससे जुड़े फैसलों में माता-पिता अपने किशोरवय बच्चों या जेन-जी (1997-2012 के बीच पैदा हुए बच्चे) को भी शामिल करने लगे हैं।
बच्चों की बढ़ती समझदारी और आत्मविश्वास का नतीजा है कि अभिभावक अपने रोजमर्रा के निर्णयों में बच्चों की सलाह पर भरोसा करने लगे हैं। वेंचर कैपिटल फर्म फायरसाइड वेंचर्स के एक हालिया अध्ययन में सामने आया है कि नए युग के ब्रांड इसी आधार पर घरों में अपनी जगह बना रहे हैं।
इसका नतीजा ये है कि 2035 तक 50 प्रतिशत पुराने ब्रांडों के अपनी प्रासंगिकता खो देने का खतरा भी है। रिपोर्ट में जेन-जी के तौर पर उपभोक्ता व्यवहार में आए व्यापक बदलाव को रेखांकित किया गया है, जो परिवार की खरीदारी को आकार देने में अग्रणी भूमिका निभाने लगा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि खाने-पीने और निजी देखरेख से लेकर कपड़ों और टेक एक्सेसरीज तक, कई श्रेणियों में जेन-जी अब घरों में नए जमाने के ब्रांड अपनाने का मुख्य रास्ता बन गई है। वे इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर समीक्षाओं और नए ट्रेंड को देखकर अपनी राय बना रहे हैं। इसमें उनके साथियों की सलाह भी प्लस का काम कर रही है। जेन-जी किशोरों की राय तार्किक लगती है, जो उनके माता-पिता को भी ठीक लगती है।
फर्म का अनुमान है कि यह प्रभाव आने वाले वर्षों में और बढ़ेगा। 2035 तक मौजूदा 50 प्रतिशत ब्रांड अपनी प्रासंगिकता खो सकते हैं, जबकि जेन-जी भारत में उपभोक्ता ब्रांडों के लिए सबसे मजबूत ”आंतरिक मार्केटर” बनकर उभरेगी।रिपोर्ट कहती है कि भारतीय खपत का भविष्य केवल यह नहीं है कि जेन-जी क्या खरीदती है- बल्कि यह कि वह अपने माता-पिता से क्या खरीदवाती है।
निष्कर्षों में ये भी बताया गया है कि जेन-जी और जेन अल्फा (2010-2024 के दौरान पैदा हुए बच्चे) मिलकर पारिवारिक खर्च को आगे बढ़ा रहे हैं। अनुमान है कि अकेली जेन-जी ही 2030 तक एक ट्रिलियन अमेरिकी डालर से अधिक की खर्च क्षमता रखेगी।
रिपोर्ट में इन्हें रिवर्स जेनरेशन या उलटी पीढ़ी बताया गया है, जो खुद प्रभावित होने के बजाय अपने माता-पिता को प्रभावित करती है। यह पीढ़ी सेलिब्रिटी का अनुसरण करती है लेकिन उन्हें पूजती नहीं, नवीनता चाहती है लेकिन अति-विलासिता नहीं, और “मिलेनियल्स (1981-1996 के दौरान पैदा हुए लोग) की तरह खरीदारी करती है, लेकिन उनकी तरह खर्च नहीं करती।”
रिपोर्ट के अनुसार, सुविधा और गुणवत्ता इस पीढ़ी के ब्रांड अनुभव को फिर से परिभाषित कर रहे हैं। पारदर्शिता, उद्देश्य और समुदाय की भावना से ही ये पीढ़ी अपनी राय बनाती है।

