ग्वालियर : जेयू में मिलीभगत का बड़ा खेल…..349 निजी कॉलेजों में 22 प्राचार्य, 1.5 लाख छात्रों को पढ़ा रहे 39 शिक्षक ?
जेयू में मिलीभगत का बड़ा खेल…कैसे मिले उच्च शिक्षा…?
जीवाजी विश्वविद्यालय (जेयू) द्वारा जारी नई प्राविधिक सीनियारिटी लिस्ट ने निजी कॉलेजों में शिक्षा व्यवस्था की हकीकत सामने ला दी है। अंचल के 349 निजी कॉलेजों में से सिर्फ 22 में ही प्राचार्य पदस्थ हैं, जबकि इन कॉलेजों में अध्ययनरत 1.50 लाख छात्रों को पढ़ाने के लिए केवल 39 शिक्षक हैं।
इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि अंचल के इन कॉलेजों में पढ़ रहे छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कैसे मिल रही होगी। यानी इस अंधेरगर्दी का असर सीधा उनके भविष्य पर पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार जेयू प्रशासन ने निजी कॉलेजों से शिक्षकों और प्राचार्यों की सैलरी का बैंक स्टेटमेंट मांगा था, लेकिन 349 में से केवल 22 कॉलेज ही यह दस्तावेज दे सके। वहीं सिर्फ 8 कॉलेज ऐसे हैं जिन्होंने 39 शिक्षकों की सैलरी बैंक के माध्यम से दी होने का प्रमाण दिया। यह साफ संकेत है कि अधिकांश संस्थान सिर्फ कागजों पर शैक्षणिक स्टाफ दिखा कर संबद्धता हासिल कर रहे हैं।
हर स्तर पर भारी अनियमितता…
नियुक्ति से लेकर संबद्धता तक फर्जीवाड़ा… निजी कॉलेजों की सिस्टम से मिलीभगत? जांच में यह भी सामने आया कि निजी कॉलेजों में नियुक्ति दिखाने के लिए इंटरव्यू तो होते हैं, लेकिन अधिकांश कॉलेज कार्यपरिषद से अनुमोदन नहीं करवाते, जिससे नियुक्तियां कानूनी रूप से वैध ही नहीं हो पातीं। कॉलेज ऐसे फर्जी प्रमाण दिखाकर संबद्धता हासिल कर लेते हैं और वेतन भुगतान बैंक के बजाय नकद या कागजों पर ही दिखाते हैं।
सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि कुल 349 में से 56 कॉलेज ही नियुक्तियों का अनुमोदन करा सके हैं। वहीं, जेयू प्रशासन बार-बार बैंक स्टेटमेंट की मांग करते हुए भी सबूत नहीं जुटा पा रहा। जेयू अफसरों पर भी सवाल उठे हैं, क्योंकि बरकतुल्लाह विवि, भोपाल परिनियम 28/17 के नियुक्त शिक्षकों की सूची पोर्टल पर अपलोड कर चुका है, लेकिन जेयू ने अब तक ऐसा नहीं किया।
यह हैं जिम्मेदार… नगद वेतन जैसी गंभीर अनियमितताओं कार्रवाई करनी थी लेकिन इन्होंने ध्यान ही नहीं दिया
क्या करना था?
निजी कॉलेजों की निरीक्षण रिपोर्ट में मिली अनियमितताओं के आधार पर कुलगुरु को कार्रवाई का प्रस्ताव भेजना था। संबद्धता प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना था, ताकि सभी कॉलेज नियमों के दायरे में रहें।
क्या किया
- संबद्धता जारी करने से पहले कॉलेजों की अधूरी तैयारियों पर आंख मूंदकर अनुमोदन दे दिया।
- संबद्धता शर्तों का पालन सुनिश्चित करने और निगरानी में ढिलाई बरती, जिससे अनियमितताएं बढ़ीं।
क्या किया इनका पक्ष जानने के लिए फोन किया। वे ऑनलाइन थे इसलिए मैसेज किया पर इन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
समझें… कैसे पनपता है निजी कॉलेजों में नियुक्ति घोटाला?
- हर साल इंटरव्यू कर नियुक्ति होने का दिखावा।
- एक्सपर्ट की टीम मौजूद, पर अनुमोदन शून्य।
- बैंक के जरिए सैलरी नहीं, इसलिए प्रमाण नहीं दे पाते।
- छह माह की मोहलत में आधा सत्र निकाल देते हैं।
- ज्वाइनिंग सिर्फ कागजों पर।
- जेयू की ढील और लूपहोल का फायदा उठाकर संबद्धता हासिल।

