आजम के राजनीतिक पतन की कहानी !
आजम के राजनीतिक पतन की कहानी
सपा सरकार में कभी सीएम से कम नहीं था जलवा, 2017 से सियासत पर लगने लगा ग्रहण
सपा के दिग्गज नेताओं में शुमार आजम खां की मुसीबत फिर बढ़ गई। 17 नवंबर को रामपुर की एमपी/एमएलए कोर्ट ने आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला को सात-सात साल की सजा सुनाई। कोर्ट ने दोनों को फर्जी पैन कार्ड मामले में दोषी माना है। पुलिस ने दोनों को कोर्ट से ही हिरासत में ले लिया।
दोनों रामपुर की जेल में भेज दिया गया। जेल जाने से पहले आजम खां ने अपने अंदाज में कहा, कोर्ट का फैसला है…कोर्ट ने गुनहगार समझा तो सजा सुनाई है। दरअसल, आजम खां आज से ठीक 55 दिन पहले ही 23 सितंबर को सीतापुर जेल से छूटे थे। वहीं, अब्दुल्ला इसी साल 25 फरवरी को हरदोई जेल से छूटा था।
आजम खान के सियासी रसूख का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह रामपुर सीट से ही दस बार विधायक और एक बार सांसद रहे। वह प्रदेश में चार बार कैबिनेट मंत्री भी रहे हैं। सपा सरकार में आजम का जलवा किसी सीएम से कम नहीं था। स्टेट प्लेन उन्हें रामपुर तक सिर्फ ड्रॉप करने जाया करता था।
माना जाता था कि प्रदेश की आधी सरकार रामपुर से ही चलती थी। आजम के इस जलवे पर साल 2017 से ग्रहण लगना शुरू हो गया। जानकारों की मानें, तो कानून के दांवपेच में आजम खां इस तरह फंसे कि अब बाहर निकल पाना मुश्किल दिख रहा है। वो पिछले पांच साल में तीन बार जेल जा चुके हैं।

आजम खां 2017 में अखिलेश सरकार में नगर विकास मंत्री थे। इस दौरान यूपी में सपा की सरकार थी। उस वक्त पुलिस प्रशासन उनके इशारे में काम करता था। उनके एक आदेश पर पुलिस आगे-पीछे घुमती थी। उन्होंने लखनऊ नगर निगम से बेटे अब्दुल्ला का फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनवाया। फिर उसके जरिए फर्जी पैन कार्ड बनवाया। इसके बाद बेटे अब्दुल्ला को चुनाव लड़वाया था।
पैन कार्ड इस केस का ट्रायल एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट में चल रहा था। आजम पर आरोप लगा कि उनके इशारे पर ही दोनों पैन कार्ड बनवाए गए थे। एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट ने आजम और उनके बेटे अब्दुल्ला को धोखाधड़ी में दोषी करार दिया।
अब्दुल्ला आजम के शैक्षिक प्रमाणपत्रों में जन्म तिथि 1 जनवरी 1993 दर्ज है। इस हिसाब से वह 2017 के विधानसभा चुनाव में न्यूनतम आयु की शर्त पूरी नहीं करते थे। आरोप है कि चुनाव लड़ने के लिए उन्होंने अपनी जन्मतिथि 30 सितंबर 1990 दशाई, जिस आधार पर उम्र पूरी मानी गई।
इस पर बसपा प्रत्याशी रहे नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां ने हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर की। लंबी सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने 2017 में अब्दुल्ला की विधायकी निरस्त कर दी। सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा।

आजम खां पर सौ के आसपास केस दर्ज थे, जिनमें 12 में फैसला सुनाया जा चुका है। इनमें पांच में सजा और सात में बरी कर दिया गया है। सूत्रों के अनुसार, मौजूदा समय में 59 मामले सेशन कोर्ट, जबकि 19 मामले मजिस्ट्रेट कोर्ट में चल रहे हैं। भाजपा सरकार में सपा नेता आजम खां पर कई मामले दर्ज हुए थे।
दो जन्म प्रमाण पत्र मामले में सजा मिलने के बाद सपा नेता आजम खां 18 अक्तूबर 2023 को जेल गए थे। उनके साथ उनकी पत्नी डॉ. तजीन फात्मा और बेटे अब्दुल्ला आजम भी गए थे। अब फिर से कोर्ट ने आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला को दोषी मानकर सात-सात साल की सजाई सुनाई है।
सत्ता परिवर्तन के बाद भाजपा नेता और वर्तमान रामपुर शहर के विधायक आकाश सक्सेना ने दो जन्म प्रमाणपत्र और बाद में दो पैनकार्ड का मामला दर्ज कराया था। 16 दिसंबर 2019 को सिविल लाइंस कोतवाली में आजम खां और अब्दुल्ला के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई।
शिकायत के अनुसार, आयकर विभाग ने अब्दुल्ला को पैन कार्ड संख्या D F O P K 6164 जारी किया था, जिसमें उनकी जन्म तिथि एक जनवरी 1993 थी। यही उनकी बैंक खाता संचालन और आयकर रिटर्न जमा करने में इस्तेमाल होता रहा।
आरोप था कि 2017 में नामांकन दाखिल करते समय अब्दुल्ला ने अपनी बैंक पासबुक में पैन नंबर को कूटरचित तरीके से बदलकर एक अलग पैन कार्ड नंबर दर्शाया, जो उस समय एक्टिव भी नहीं था। शिकायतकर्ता के अनुसार, यह सब सुनियोजित तरीके से किया गया ताकि चुनाव में उम्र संबंधी अयोग्यता छिपाई जा सके और चुनाव लड़ने का लाभ प्राप्त किया जा सके।

2022 : आजम खां को 2019 के लोकसभा चुनाव के समय प्रचार के दौरान भड़काऊ भाषण के मामले में कोर्ट ने दोषी करार दिया था। तीन साल की सजा सुनाई थी।
2023 : आजम खां को फर्जी जन्म प्रमाण पत्र के मामले में रामपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने दस साल की सजा सुनाई।
2024 : डुंगरपुर में जबरन जमीन बेदखली के मामले में रामपुर एमपी-एमएलए कोर्ट ने आजम खान को दस साल की सजा सुनाई।
2024 : आजम खान को सड़क जाम और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में दो साल की सजा सुनाई गई।
2024 : मशीन चोरी के मामले में कोर्ट ने आजम खान को सात साल की सजा सुनाई।
2025 : पैन कार्ड मामला छठवां केस है, जिसमें सात साल की साल हुई है।

