दिल्ली। 10 नवंबर 2025 को दिल्ली के लाल किले के पास कार ब्लास्ट की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, इस मामले में नए-नए खुलासे होते जा रहे हैं। इस पूरे हमले की कड़ी शुरू से ही अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़ी रही है। अब यह बात सामने आ रही है कि यह पहली बार नहीं है जब अल-फलाह यूनिवर्सिटी का कोई छात्र आतंकी गतिविधि में लिप्त रहा है।

इससे पहले 2008-2008 में उत्तर प्रदेश, राजस्थान और गुजरात में हो चुके कई सीरियल ब्लास्ट में अल-फलाह यूनिवर्सिटी के छात्र का नाम सामने आ चुका है। अपनी इस स्टोरी में हम आपको अल-फलाह यूनिवर्सिटी के उसी छात्र के बारे में बताने जा रहे हैं जो एक लाख का इनामी टेररिस्ट है और आज भी पकड़ा नहीं जा सका है।

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कौन है मिर्जा शादाब बेग

जांच एजेंसियों की तफ्तीश में ये बात सामने आई है कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी का इंजीनियरिंग छात्र इंडियन मुजाहिदीन (IM) का सक्रिय सदस्य रह चुका है। उसका नाम मिर्जा शादाब बेग है।

बेग यूपी के आजमगढ़ का मूल निवासी है। उसकी शुरुआती पढ़ाई काफी मुश्किल से पूरी हुई और वह 9वीं क्लास में फेल होने के बाद उसने आजमगढ़ रेलवे स्टेशन के पास स्थित स्कूल से साइंस सबजेक्ट से 12वीं पास की।

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बाद में बेग ने फरीदाबाद स्थित अल-फलाह स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी से 2007 में ही बीटेक (इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंस्ट्रूमेंटेशन) पूरा किया था।

पुरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बेग ने इंडियन मुजाहिदीन के आजमगढ़ मॉडल का प्रमुख रहा और ऐसा माना जाता है कि वह अब पाकिस्तान में है। उसने कुछ समय सऊदी अरब में भी बिताया।

2008 में हुए अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट में आया था बेग का नाम

26 जुलाई 2008 में अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट में बेग का नाम आरोपियों में था। पुलिस के पुराने रिकॉर्ड बताते हैं कि बेग ने कई आतंकियों को रिक्रूट भी किया, जिसमें उसका कजिन भाई साकिब निसार भी है जिसने बाद में मॉड्यूल ज्वाइन किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बेग ने आजमगढ़ मॉड्यूल और दिल्ली के स्टूडेंट्स के मॉड्यूल को एक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

दिल्ली और अहमदाबाद ब्लास्ट से सीधा कनेक्शन

शादाब बेग दिल्ली और अहमदाबाद में हुए बम ब्लास्ट में सीधे तौर पर शामिल था। उसने इन दोनों जगहों की रेकी की थी और इंडिया गेट पर बम लगाने में उसका सीधा हाथ था।

2008 जयपुर ब्लास्ट और उडुपी कनेक्शन

मिर्जा शादाब बेग, ने 2008 जयपुर ब्लास्ट में भी अहम भूमिका निभाई थी। इंडियन मुजाहिदीन के सदस्य के तौर पर वह धमाकों में इस्तेमाल हुए विस्फोटक इकट्ठा करने कर्नाटक के उडुपी गया था।

दरअसल इंस्ट्रूमेंटेशन इंजीनियरिंग करने के कारण बेग बम बनाने की बारिकियां बखूबी जानता था, यही वजह है कि वह उडुपी गया। उडुपी में ही बेग ने आईएम आतंकी रियाज और यासीन भटकल को बड़ी मात्रा में डेटोनेटर और बेयरिंग उपलब्ध कराए, जिनसे आईईडी तैयार किए गए।

अहमदाबाद धमाकों से पहले बेग ने तीन टीमों के साथ मिलकर धमाकों की प्लानिंग की और लॉजिस्टिक, आईईडी फिटिंग और बैग बम तैयार करने का काम संभाला था।

2007 गोरखपुर धमाकों में भी नाम

गोरखपुर में 2007 के बम धमाकों में भी मिर्जा शादाब बेग का नाम सामने आया था। इन धमाकों में 6 लोग घायल हुए थे। बाद में आईएम से लिंक जुड़ने पर गोरखपुर पुलिस ने उसकी संपत्ति कुर्क कर ली थी। इससे साफ पता चलता है कि छात्र रहते हुए ही बेग आतंकी गतिविधियों में लिप्त हो चुका था।

बाटला हाउस एनकाउंटर में है वांटेड

बेग दिल्ली के जाकिर नगर में रहता था और यहां जिहादी साहित्य के जरिए आसपास के युवकों को आईएम में रिक्रूट करता था। पुलिस ने जांच के दौरान उसके किराए के कमरे से पहचान पत्र बरामद किया था। 2008 में हुए बाटला हाउस एनकाउंटर में जब इंडियन मुजाहिदीन के चार आतंकियों को पकड़ा गया था तब बेग और मोहम्मद खालिद वांटेड घोषित किए गए थे।

जर्मन बेकरी ब्लास्ट केस का मुख्य षड्यंत्रकारी था बेगमिर्जा शादाब बेग पुणे में हुए जर्मन बेकरी ब्लास्ट केस में भी मुख्य साजिशकर्ता था।