दिल्ली

डेडलाइन बन रही डेथलाइन!

डेडलाइन बन रही डेथलाइन! 500 रुपए मानदेय, 20 घंटे काम, SIR के फेर में फंसे BLO

देशभर के 12 राज्यों के 51 करोड़ से अधिक मतदाताओं के घर दस्तक देने का काम 5.32 लाख से अधिक बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) कर रहे हैं. इन बीएलओ पर कम समय पर जरूरत से अधिक काम करवाने का आरोप लग रहा है.

डेडलाइन बन रही डेथलाइन! 500 रुपए मानदेय, 20 घंटे काम, SIR के फेर में फंसे BLO

SIR में बीएलओ पर काम के दबाव को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है

मैं बीएलओ हूं… लोकतंत्र के मंदिर की सीढ़ियों पर बैठा वो पहला शख्स जो चेक करता है कि चुनावों के महापर्व में किसके पास वोट देने का अधिकार है और कौन इससे अछूता है? इन दिनों मेरी डिमांड कुछ ज्यादा ही है. कोई हमारे नाम पर सियासत कर रहा है तो कोई भरोसा. भारत में इस वक्त स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के नाम पर चल रही महाबहस के बीच अगर कोई पिस रहा है तो वो मैं हूं… SIR के काम ने हमारी जिंदगी बदल दी है. हमारे ऊपर काम का ऐसा दबाव डाला जा रहा है कि हमारे कई साथी अपनी जान तक दे चुके हैं. सिर पर निलंबन की लटकती तलवार और डेडलाइन में काम पूरा करने की जद्दोजेहद के बीच हर दिन सुबह कंधे पर बैग लटकाए हम निकल पड़ते हैं उन लोगों के बीच जो लोकतंत्र के महापर्व का हिस्सा बनना चाहते हैं.

मैं सुबह 5 बजे उठकर नहा-धोकर करीब 7 बजे घर से निकल जाता हूं. घर-घर जाकर फॉर्म देना, मैपिंग करना और फॉर्म में भरी जानकारी की दोबारा जांच करना हमारे काम का अहम हिस्सा है. कई दफा एक ही घर पर दो से तीन बार दस्तक देनी पड़ती है. इन सभी कामों के बीच हमारे पास इतना वक्त भी नहीं बचता कि हम सुकून से खाना खा सकें. हम सभी कभी शाम को 6 बजे खाना खाते हैं तो कई बार टिफिन बॉक्स वापस चला जाता है.

दिनभर फॉर्म के वितरण से लेकर उसके कलेक्शन के बाद शुरू होती है असली परीक्षा. हर दिन आने वाले फॉर्म से जुड़ी जानकारी ऑनलाइन डेटा पर अपलोड करना जरूरी होता है. यह काम जितना आसान होना चाहिए वो उतना ही जटिल होता जा रहा है. यह काम अत्यधिक तकनीक वाला और समय लेने वाला है. हमें हर हाल में इस काम को रात 12 बजे से पहले खत्म करना होता है. इसके बाद काम समेटते समेटते करीब 1 बजे सोते हैं. SIR का डर ऐसा कि नींद नहीं आती बस यही सोचते हैं कि कल का टारगेट पूरा होगा या नहीं. इस तरह का मानसिक तनाव हमें हर दिन खा रहा है.

6000 रुपए के वार्षिक मानदेय पर दिनभर कर रहे काम

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) का काम बीएलओ को उनकी मुख्य सरकारी नौकरी के अतिरिक्त सौंपा गया है. यही कारण है कि हमें इस काम के लिए वेतन नहीं मानदेय दिया जाता है. बीएलओ का मानदेय राज्यों के हिसाब से अलग-अलग हो सकता है. उत्तर प्रदेश में बीएलओ को वार्षिक 6,000 रुपए मानदेय दिया जाता है. हालांकि ऐसा प्रस्ताव है कि SIR जैसे बड़े अभियान में 2000 से 6000 तक अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि दी जाए. बीएलओ के इस काम में शिक्षक (सरकारी स्कूल), आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, पटवारी/लेखपाल/अमीन, पंचायत सचिव/ग्राम सेवक, बिजली बिल रीडर, पोस्टमैन और स्वास्थ्य कार्यकर्ता (MPW/ANM आदि) को शामिल किया गया है.

पुरुषों के नौकरी पर जाने के बाद और बढ़ जाती है दिक्कत

हमें सुबह 7 बजे आम लोगों के घर पर पहुंच जाना होना है क्योंकि कामकाजी पुरुष 8 से 9 बजे के बीच ऑफिस के लिए निकल जाते हैं. ऐसे में हमें उनके घर पर रहते हुए वहां पहुंचना जरूरी होता है. जिस घर में केवल महिलाएं रहती हैं उन्हें समझ ही नहीं आता कि फॉर्म में क्या भरना है. ऐसे घरों में हमें दो से तीन बार तक चक्कर लगाने पड़ते हैं. फॉर्म को विवरण इतना लंबा है कि किसी भी घर में जाने पर कम से कम 45 मिनट से एक घंटे तक चला ही जाता है. 1 दिन में हमें 50 से 55 फॉर्म भरने होते हैं. ऐसे में हमें समझ में ही नहीं आ रहा है कि हमारा टारगेट तय समय पर कैसे पूरा होगा.

22 दिन 7 राज्य और 25 BLO की मौतदेशभर के 12 राज्यों के 51 करोड़ से अधिक मतदाताओं के घर दस्तक देने का काम 5.32 लाख से अधिक बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) कर रहे हैं. इन बीएलओ पर कम समय पर जरूरत से अधिक काम करवाने का आरोप लग रहा है. हालात इस कदर बिगड़ते दिख रहे हैं कि काम के अधिक दबाव के चलते पिछले 22 दिन में 7 राज्यों के करीब 25 बीएलओ ने अपनी जान दे दी है. वहीं तृणमूल कांग्रेस ने केवल बंगाल में ही 34 लोगों की मौत का दावा किया है. इन आरोपों पर अब निर्वाचन आयोग ने जिला और राज्यों से रिपोर्ट मांगी है. आयोग ने साफ कहा है कि अभी तक किसी ने भी काम के दबाव के चलते जान नहीं दी है.

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