दिल्ली

MCD Budget :अहम विभागों का खर्च घटाने और निगम के नए प्लान पर उठ रहे सवाल ?

MCD Budget: बिना टैक्स बढ़ाए एमसीडी का बजट पेश, अहम विभागों का खर्च घटाने और निगम के नए प्लान पर उठ रहे सवाल

टैक्स न बढ़ाना राहत की बात है लेकिन सेवाओं में सुधार की बेहद दरकार है।
MCD Budget: MCD budget presented without increasing taxes
एमसीडी मुख्यालय

एमसीडी ने अगले वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अपना विस्तृत बजट खाका पेश कर दिया है। आयुक्त ने शुक्रवार को स्थायी समिति के समक्ष प्रस्तावों पर प्रस्तुति देते हुए न कोई नया टैक्स लगाया और न ही किसी शुल्क में बढ़ोतरी की। आयुक्त ने स्पष्ट कहा कि सफाई व्यवस्था में सुधार, वायु प्रदूषण नियंत्रण और स्कूलों की गुणवत्ता बढ़ाना एमसीडी की तीन प्रमुख प्राथमिकताएं होंगी। इन प्रमुख प्राथमिकताओं को पूरा करने की जिन विभागों पर जिम्मेदारी है उनका बजट घटा दिया गया है। ऐसे में दावे के हकीकत में बदलने पर सवाल उठ रहा है। हालांकि आयुक्त ने दावा किया कि कार्यक्षमता बढ़ाकर कम बजट में अधिक काम होगा।

आयुक्त अश्वनी कुमार ने वर्तमान वर्ष के गत वर्ष पास किए गए बजट को संशोधित करते हुए कटौती की है। आगामी वर्ष का बजट भी कम रखा है। उन्होंने बताया कि वर्तमान वर्ष के बजट में व्यय में कटौती की गई है। वर्तमान वर्ष में व्यय 17011 करोड़ रुपये से घटाकर 16296 करोड़ रुपये तय किया गया और आय के मामले में भी अनुमान को कम किया है। वर्तमान वर्ष में आय का अनुमान 16701 करोड़ रुपये घटाकर 15679 करोड़ रुपये लगाया गया है। जबकि गत वर्ष एमसीडी को 1483 करोड़ रुपये की बचत हुई।

वहीं आगामी वर्ष की तुलना में वर्तमान वर्ष से आय कम होने का अनुमान है। वर्तमान वर्ष में 867 करोड़ रुपये की बचत होने की उम्मीद जताई गई है और आगामी वर्ष 2026-27 में 15664 करोड़ रुपये की आय होने का दावा किया है। इस तरह आगामी वर्ष की अपेक्षा वर्तमान वर्ष सेे कम आय होगी, मगर व्यय अधिक होगी। आगामी वर्ष के दौरान 16530 करोड़ रुपये व्यय होने का अनुमान है।

आयुक्त ने सफाई और वायु प्रदूषण नियंत्रण को सबसे बड़ी चुनौती मानने के बावजूद इन दोनों मामलों से जुड़े मदों में बजट कटौती की है। सफाई विभाग का संशोधित बजट अनुमान 2025-26 के 4881.56 करोड़ रुपये से घटाकर 2026-27 प्रस्तावित बजट में 4795.28 करोड़ रुपये तय किए है। वहीं उद्यान विभाग के बजट में छह करोड़ रुपये की कमी है। वर्तमान वर्ष के बजट 403.30 करोड़ रुपये की अपेक्षा आगमी वर्ष के दौरान 397.90 करोड़ रुपये तय किए।

यह दोेनों विभाग सफाई व वायु प्रदूषण पर काबू पाने की योजनाओं को अमलीजामा पहनाते है। इसी तरह अभियांत्रिक विभाग के बजट में भी कटौती की गई है। इस तरह आगामी वर्ष के दौरान उल्लेखनीय विकास कार्य नहीं होंगे और आयुक्त ने अपने बजट भाषण में बड़ी योजनाओं की चर्चा नहीं की। इस विभाग का वर्तमान वर्ष में 2044 करोड़ रुपये और आगामी वर्ष के लिए 1884 करोड़ रुपये बजट तय किया है।

एमसीडी ने शिक्षा विभाग के बजट में भारी बढ़ोतरी की है। इस विभाग का बजट आगामी वर्ष के लिए 2520 करोड़ रुपये तय किया। इतना ही नहीं, वर्तमान वर्ष के संशोधन बजट में बढ़ोती की है। वर्तमान वर्ष के बजट में करीब सात सौ करोड़ रुपये बढ़ाए गए है। आगामी वर्ष के बजट में 12 सौ करोड़ रुपये की बढ़ोतरी की है।

बजट का ब्यौरा (राशि करोड़ में)
बचत 2025-26 वर्ष
बचत 1483. 93 867.47
आय 15679.72 15664.06
व्यय 16296.18 16530.50

वर्ष 2026-27 में व्यय का ब्यौरा (राशि करोड़ में)

विभाग और व्यय

  • सामान्य प्रशासन 3549.63
  • लाइसेंसिंग             10.41
  • सामुदायिक सेवाएं 74.73
  • शिक्षा             2520.34
  • जन स्वास्थ्य एवं
  • चिकित्सा सहायता 1905.00
  • सफाई             4795.28
  • लोक निर्माण एवं
  • अभियांत्रिक विभाग 1884.43
  • पशु चिकित्सा सेवाएं 131.06
  • उद्यान             397.90
  • भूमि एवं लाभकारी
  • परियोजनाएं             118.19
  • अन्य विकास व्यय 475.09
  • कर्ज भुगतान            667.80

एमसीडी की भावी योजनाएं

1. वेस्ट-टू-एनर्जी क्षमता में ऐतिहासिक विस्तार :
नरेला–बवाना में 3000 टन प्रतिशत दिन क्षमता वाले नए प्लांट को पर्यावरणीय स्वीकृति।
ट्रांसमिशन लाइन शिफ्टिंग के लिए पावरग्रिड को 23.27 करोड़ का भुगतान। इस प्लांट से दिल्ली में वेस्ट-टू-एनर्जी क्षमता में सर्वाधिक बढ़ोतरी होगी।

गाजीपुर में 2000 टन प्रतिदिन नए प्लांट के लिए निविदाएं जारी।
ओखला प्लांट की क्षमता 1950 टन प्रतिदिन से बढ़ाकर 2950 टन प्रतिदिन करने की मंजूरी।

तेहखंड में 2000 से 3000 टन प्रतिदिन प्लांट विस्तार के लिए मंजूरी जल्द अपेक्षित।

2. जीरो-वेस्ट कॉलोनियों का विस्तार :
51 नई जीरो-वेस्ट कॉलोनियां विकसित कीं। यहां 100 प्रतिशत वेस्ट सेग्रीगेशन और परिसर में ही कम्पोस्टिंग होती है। आने वाले समय में ऐसी और कॉलोनियां विकसित की जाएंगी।

3. बल्क वेस्ट जनरेटर का पंजीकरण :
311 एप्प पर लगभग 2500 बल्क वेस्ट जनरेटर पंजीकृत हुए। शेष को पंजीकरण के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

4. लैंडफिल में तेजी से बायो-माइनिंग :
भलस्वा- 100 लाख मीट्रिक टन, ओखला-70 लाख मीट्रिक टन, गाजीपुर-41 लाख मीट्रिक टन, सिंघोला-7.45 लाख मीट्रिक टन
बायो-माइनिंग क्षमता 30,000 टन प्रतिदिन से अधिक हो चुकी है।

संपूर्ण कचरा निस्तारण के लिए नई निविदाएं जारी।

5. नए कचरा निस्तारण संयंत्र :
38 एकड़ उपलब्ध भूमि पर 5100 टन प्रतिदिन क्षमता के लिए टेंडर जारी किए, भलस्वा-1800 टन, सिंघोला-700 टन, ओखला-1400 टन, बवाना-1200 टन

6. कूड़ा संग्रहण और परिवहन में बड़े सुधार :
दक्षिण, मध्य और पश्चिमी जोन के लिए कलेक्शन-एंड-ट्रांसपोर्टेशन एजेंसियों की निविदाएं आमंत्रित।

7. सड़क और नालों की मशीन आधारित सफाई :
एनसीएपी फंड से 14 मैकेनिकल रोड स्वीपर मशीनों का ऑर्डर दिया गया।

8. विशेष स्वच्छता अभियान :
सफाई अपनाओ-बीमारी भगाओ अभियान, दिल्ली को कूड़े से आजादी, स्वच्छता ही सेवा पखवाड़ा के तहत कई जोनों में मशीनीकृत सफाई की नई शुरुआत हुई
ऐसे अभियानों से सफाई को बढ़ावा दिया जाएगा

9. ड्रोन सर्वे एवं डिजिटलीकरण :
एमसीडी, डीडीए और सर्वे ऑफ इंडिया के त्रिपक्षीय समझौते के तहत ड्रोन सर्वे से 1000 वर्ग किमी का 75 प्रतिशत क्षेत्र का सर्वे पूरा।

उद्देश्य : अवैध निर्माण पहचान, हाउस टैक्स सुधार, अतिक्रमण चिन्हित करना, थ्रीडी मैपिंग, बिल्डिंग प्लान रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण के लिए एजेंसी नियुक्त।

10. लाइसेंस सिस्टम में बड़ा सुधार :
जनरल ट्रेड लाइसेंस को अब संपत्ति कर प्रणाली में जोड़ा जाएगा। अलग से लाइसेंस के लिए आवेदन की जरूरत समाप्त।

11. पार्किंग और विज्ञापन से राजस्व बढ़ोतरी :
भारत दर्शन पार्क में 188 क्षमता वाली स्वचालित मल्टी-लेवल पजल पार्किंग का जल्द निर्माण
इस वर्ष 37 नए यूनिपोल/फ्लैग-साइन क्लस्टर पहचाने गए, निविदाएं जारी।

12. पशु अपशिष्ट प्रबंधन :
गाजीपुर स्लॉटर हाउस में गोबर कचरे निस्तारण के लिए इंजेस्टा प्लांट लगाया जा रहा है।

एमसीडी स्थायी समिति और अधिकारियों के बीच टकराव उजागर

एमसीडी की स्थायी समिति और अधिकारियों के बीच चल रहा विवाद शुक्रवार को पूरी तरह सामने आ गया। समिति की बैठक में अध्यक्ष सत्या शर्मा ने आयुक्त के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए आरोप लगाया कि वे लगातार समिति को कमजोर करने में लगे हैं। उन्होंने कहा कि आयुक्त ने बजट में जिन उपलब्धियों का जिक्र किया, वे प्रस्ताव समिति के समक्ष पेश ही नहीं किए गए और सीधे सदन में रखे गए, जो समिति की अनदेखी है।

बैठक सामान्य तौर पर शुरू हुई थी, लेकिन बजट भाषण के कई बिंदुओं पर अध्यक्ष की असहमति सामने आते ही माहौल तनावपूर्ण हो गया। सत्या शर्मा ने कहा कि एमसीडी चुनाव को तीन वर्ष और समिति का गठन हुए ढाई साल हो चुके हैं, फिर भी अधिकारी समिति की भूमिका कम करने की कोशिश कर रहे हैं। कई प्रस्ताव बिना समिति में चर्चा के सीधे सदन में भेजे गए, जो प्रक्रिया का उल्लंघन है।

उन्होंने अपने कार्यालय से ओएसडी को हटाए जाने पर भी नाराजगी जताई। उनका कहना था कि न तो उन्हें इसकी जानकारी दी गई और न ही कारण बताया गया, जबकि समिति का कार्यालय पिछले 15 दिनों से बिना ओएसडी के चल रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि इस स्थिति में समिति बजट कैसे तैयार करेगी।

सत्या शर्मा ने स्पष्ट कहा कि एमसीडी का संचालन अधिकारियों और निर्वाचित पार्षदों की संयुक्त जिम्मेदारी है, लेकिन मौजूदा तरीके से ऐसा लगता है कि अधिकारी ही एमसीडी की कार्यप्रणाली को कमजोर कर रहे हैं। बजट सत्र से पहले इस विवाद ने एमसीडी में निर्णय-प्रक्रिया और समन्वय पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

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