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क्या है नेटवर्क मार्केटिंग……एक झटके में सबकुछ हुआ बर्बाद !!!!

UP: क्या है नेटवर्क मार्केटिंग…लाखों रुपये लगाकर देखा करोड़पति बनने का सपना, एक झटके में सबकुछ हुआ बर्बाद

एमएलएम यानि मल्टी लेवल मार्केटिंग, एक ऐसा जाल जिसने लाखों रुपये लगाकरा लोगों को करोड़ों का सपना दिखाया। जिस पर जो बन पड़ा, उसने उतना निवेश किया। एक महिला ने तो अपनी पूरी जमा पूंजी दे डाली, लेकिन जब इस ठगी का अंदाजा हुआ, तो उसने अपनी जान तक दे दी। 
What is network marketing dreamed of becoming a millionaire by investing lakhs of rupees
ठगी का आरोपी और पीड़ित लोग ….
आगरा पुलिस ने क्रिप्टोकरेंसी की फर्जी वेबसाइट बनाकर ठगी करने के सबसे बड़े माफिया अजय को पकड़ा है। इस माफिया ने 2002 में आई इबिज और स्पीक एशिया नाम की मल्टी लेवल मार्केटिंग (एमएलएम) कंपनियों में काम सीखा। इसके बाद लोगों को जोड़कर ठगी करने का प्लान बनाया। 

एक महिला ने दी जान
आरोपी अजय के गिरफ्तार होने पर साइबर थाना के बाहर सैकड़ों की पीड़ित एकत्रित हो गए। सबका हाल एक जैसा था। चार वर्ष पहले लालच में अपनी जमापूंजी खोई और अपने परिचितों को भी ठगी का शिकार बना दिया। रोजाना परिचित उन्हें टोकते थे। कुर्रा चितरपुर की बबली ने बताया कि वह महिला समूह चलाती थीं, उन्होंने अपने और परिचितों के 10 लाख रुपये निवेश कराए थे। अभी तक लोग उनसे रकम का तकादा करते हैं। उनकी बहन साधना ने भी 10 लाख रुपये जमा किए थे। रकम डूबने पर पति और रिश्तेदारों के तानाें से इतना परेशान हो गईं कि उसने जान दे दी। सरस्वती ने बताया कि बेटी की शादी के लिए जमा किए 1.53 हजार डूबने का दर्द आज भी है। सुनयना ने बताया कि पूरे समूह की महिलाएं आरोपियों का शिकार बनी हैं। उनके अकेले नौ लाख हैं। करौना कला की सुनीता ने 15 लाख रुपये जमा कराए थे। ऐसे सैकड़ों पीड़ितों की आंखों में आस है कि आरोपियों की संपत्ति कुर्क कर उनकी रकम लाैटाई जाएगी।

गुडवर्क इतना लंबा, बरामदगी शून्य
मामले में पुलिस ने 19 माह बाद मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया पर बरामद सिर्फ दो मोबाइल, एक लैपटाॅप और तीन डेबिट कार्ड ही हुए हैं। अभी नरेंद्र, शुभम, गोपाल, विनय, विनोद और सचिन की गिरफ्तारी बाकी है। मुख्य आरोपी के पास जब रकम नहीं मिली तो पहले से नामजद अन्य से कितनी बरामदगी होगी यह कहना मुश्किल है। विनोद और सचिन बागपत में पकड़े जा चुके हैं। गैंगस्टर के मुकदमे में उनकी कुर्की भी हो चुकी है।

निवेश कराने वालों की होगी जांच
एडीसीपी सिटी ने बताया कि मामले में पुलिस को कई वीडियो मिले हैं। इनमें स्थानीय लोग जो खुद को पीड़ित बता रहे हैं, वही लोगों को अमीर होने का लालच देकर निवेश के लिए प्रोत्साहित करते थे। पुलिस जांच कर रही है कि वह पीड़ित हैं या फिर वह भी लोगों को ठगने में आरोपियों का साथ दे रहे थे। 
सर्वर और डोमेन से आरोपी तक पहुंची पुलिस
ठगी के बाद आरोपियों के भूमिगत हो जाने से पुलिस को उनके बारे में जानकारी नहीं मिल रही थी। उनके सर्वर भी विदेश से लिए गए थे पर काम भारत में हो रहा था। पुलिस ने सर्वर और डोमेन के जरिये वेबसाइट अपडेट करने वालों तक पहुंची तो आरोपी के बारे में पता चल पाया।

और ठगों ने अपनाया तरीका
आरोपी अजय के द्वारा ठगी के मामले में जानकारी होने के बाद मामला मीडिया की सुर्खियों में आया। इसके बाद कई प्रदेशों में अपराधी इसी तरह लोगों से ठगी करने के प्रयास में जुट गए। पुलिस जांच में इसकी पुष्टि हुई है। अन्य प्रदेशों को भी पुलिस ने इनपुट साझा किया है।

43 लोगों ने दर्ज कराई थी शिकायत

शिकायतकर्ता ठगी की रकम (रुपये में)
1. देवेंद्र कुमार– 50,00,000
2. मानसिंह – 2,00,000
3. मनमीत – 1,25,000
4. लोकेश गौड़ – 1,25,000
5. राजन सिंह – 1,40,000
6. मुनिता सिंह – 5,00,000
7. विक्रम सिंह – 7,00,000
8. पुष्पेंद्र सिंह – 50,00,000
9. लेखराज सिंह – 1,50,000
10. राघवेंद्र – 25,000
11. ओमकार सिंह – 1,00,000
12. भवेश्वर सिंह– 9,00,000
13. दीपक श्रीवास्तव सिंह – 3,00,000
14. इंद्रजीत सिंह पुत्र जयवीर – 3,00,000
15. रवि कुमार सिंह – 5,00,000
16. इंद्रजीत सिंह पुत्र ओमवीर– 5,00,000
17. निर्मल सिंह – 9,00,000
18. रवींद्र सिंह – 5,00,000
19. हरीओम सिंह – 3,50,000
20. देवकी – 3,50,000
21. विशाल– 2,00,000
22. साविता – 5,00,000
23. विनय – 4,00,000
24. साधना – 2,75,000
25. सतीश चंद्र – 50,000
26. विनोद – 2,00,000
27. अजय कुमार अमयाला – 4,50,000
28. मनमोहन सिंह – 3,00,000
29. रामरतन – 1,50,000
30. देवेंद्र सिंह – 2,50,000
31. ललित सिंह – 1,50,000
32. राजमती – 1,60,000
33. शिव सिंह – 3,50,000
34. दीपक त्यागी – 2,00,000
35. वेदांत – 2,00,000
36. रघुवीर – 7,00,000
37. अविनाश – 3,50,000

38. नितीश लोध – 1,50,000
39. अवतार सिंह – 8,00,000
40. शीलेंद्र – 1,00,000
41. मनमोहन सिंह – 5,00,000

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