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कंप्यूटर विजन सिंड्रोम क्या है !!!!

कंप्यूटर विजन सिंड्रोम क्या है
बढ़ता विजन लॉस का खतरा, ये लक्षण इग्नोर न करें, आई स्ट्रेन से बचने के 12 टिप्स

आधी रात का समय है। कमरे की सारी लाइटें बंद हैं, बाहर सन्नाटा पसरा है। ये नींद का समय है। लेकिन नींद की जगह आपका हाथ फिर से फोन की ओर बढ़ता है।

स्क्रीन की हल्की चमक पूरे कमरे को रोशन कर देती है। आप इंस्टाग्राम रील्स स्क्रॉल कर रहे हैं, ओटीटी पर एक एपिसोड के बाद दूसरा चल रहा है। नींद टलती जाती है, और आपकी आंखें मोबाइल स्क्रीन के पिक्सल्स पर टिके रहने को मजबूर हो जाती हैं। यही आदत धीरे-धीरे एक बड़ी समस्या का रूप ले रही है, जिसे कंप्यूटर विजन सिंड्रोम कहते हैं।

दुनिया भर में लगभग 6 करोड़ से ज्यादा लोग कंप्यूटर विजन सिंड्रोम से जूझ रहे हैं। भारत में 2023 में एक युवती रात में लगातार स्क्रॉल करने की आदत के कारण लगभग अपनी आंखों की रोशनी गंवा बैठी थी।

  • कंप्यूटर विजन सिंड्रोम क्या होता है?
  • इसके लक्षण क्या हैं?
  • इससे कैसे बचा जा सकता है?

सवाल- कंप्यूटर विजन सिंड्रोम क्या होता है?

जवाब- कंप्यूटर विजन सिंड्रोम वह कंडीशन है, जिसमें लंबे समय तक लैपटॉप, मोबाइल या टैब जैसे डिजिटल डिवाइस इस्तेमाल करने से आंखों में कई तरह की समस्याएं होने लगती हैं। हमारी आंखें स्वाभाविक रूप से स्क्रीन देखने के लिए नहीं बनी हैं। किताब या प्रिंट की तरह स्क्रीन पर टेक्सट ठोस नहीं होता, बल्कि छोटे-छोटे पिक्सल्स से बना होता है।

इसी वजह से आंखों को बार-बार फोकस बदलना पड़ता है, जिससे धीरे-धीरे थकान बढ़ने लगती है। शुरुआत में यह हल्की असहजता देता है, लेकिन अगर इसे नजरअंदाज किया जाए तो यह कामकाज, लाइफ क्वालिटी और गंभीर मामलों में विजन पर भी असर डाल सकता है।

सवाल- कंप्यूटर विजन सिंड्रोम क्यों होता है?

जवाब- लंबे समय तक डिजिटल डिवाइस का इस्तेमाल कंप्यूटर विजन सिंड्रोम का सबसे बड़ा कारण माना जाता है। कुछ शोध बताते हैं कि लगातार सिर्फ दो घंटे तक स्क्रीन देखने से भी इसके लक्षण शुरू हो सकते हैं। जितना अधिक समय आप स्क्रीन पर गेज करते हुए बिताते हैं, आंखों में तनाव, जलन और अन्य लक्षणों की संभावना उतनी ही ज्यादा बढ़ जाती है।

सवाल- कंप्यूटर विजन सिंड्रोम के क्या लक्षण होते हैं?

जवाब- जब आंखें लगातार पिक्सल वाली रोशनी पर फोकस करती रहती हैं, तो उन पर ज्यादा दबाव पड़ता है और कई तरह के लक्षण उभरने लगते हैं। नीचे ग्राफिक्स में देखिए-

 

सवाल- कंप्यूटर विजन सिंड्रोम का खतरा किन्हें ज्यादा रहता है?

जवाब- जो लोग रोजाना कम-से-कम चार घंटे या उससे अधिक समय कंप्यूटर, मोबाइल या किसी भी डिजिटल डिवाइस पर काम करते हैं, उनमें कंप्यूटर विजन सिंड्रोम का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। अगर आंखों में पहले से कुछ कंडीशन मौजूद हों, तो यह जोखिम और भी बढ़ जाता है और लक्षण सामान्य से अधिक गंभीर महसूस हो सकते हैं।

सवाल- कंप्यूटर विजन सिंड्रोम होने पर क्या करें?

जवाब- कुछ आसान आदतें और उपाय अपनाकर इसके लक्षणों को कम किया जा सकता है। पॉइंटर्स से समझते हैं-

आई एक्सरसाइज करें

एक्सरसाइज जैसे पाल्मिंग (आंखों पर हल्के से अपनी हथेलियां रखना) और जूमिंग (कभी पास की चीज पर, कभी दूर की चीज पर फोकस करना) आंखों के तनाव को कम करने में मदद करती हैं।

लुब्रिकेटिंग आई ड्रॉप्स

अमेरिकन एकेडमी ऑफ ऑप्थेल्मोलॉजी के मुताबिक, बाजार में आसानी से मिलने वाली लुब्रिकेटिंग आई ड्रॉप्स आंखों के सूखेपन और जलन को कम करने में प्रभावी होती हैं।

नियमित आंखों की जांच कराएं

अपनी आंखों की सेहत की निगरानी के लिए समय-समय पर ऑप्थेल्मोलॉजिस्ट से जांच करवाएं और जरूरत होने पर अपने चश्मे का नंबर अपडेट कराएं।

सवाल- कंप्यूटर विजन सिंड्रोम का ट्रीटमेंट क्या है?

जवाब- कंप्यूटर विजन सिंड्रोम का पता आई टेस्ट करके लगाया जाता है। इस जांच में खास ध्यान इस बात पर दिया जाता है कि आप कंप्यूटर या डिजिटल डिवाइस को कितनी दूरी से देखते हैं। स्क्रीन से जुड़ी ज्यादातर समस्याओं को नियमित आंखों की जांच और स्क्रीन देखने के तरीके में छोटे-छोटे बदलाव करके काफी हद तक कम किया जा सकता है।

सवाल- डिजिटल आई स्ट्रेन से कैसे बचें?

जवाब- रोजमर्रा की जिंदगी में छोटे छोटे बदलाव करके डिजिटल आई स्ट्रेन से बचा जा सकता है। पॉइंटर्स से समझते हैं-

ड्राई आई मैनेज करें

लंबे समय तक डिजिटल स्क्रीन देखने से आंखें सूखने लगती हैं। इसलिए आंखों को लुब्रिकेटेड रखें, जिससे जलन और असहजता कम हो सके।

हाइड्रेटेड रहें

हमेशा खुद को हाइड्रेटेड रखें क्योंकि अगर शरीर हाइड्रेटेड रहता है तो आंखों की प्राकृतिक नमी बनी रहती है और ड्राई आई की समस्या कम होती है।

बार-बार ब्लिंक करें

हम स्क्रीन देखते हुए अक्सर अपनी आंखें ब्लिंक नहीं करते हैं। इससे आंखें और ज्यादा सूखती हैं। जब आप जानबूझकर पलकें झपकाते हैं, तो आपके नेचुरल टियर्स आंखों को आराम देते हैं।

विजन करेक्ट करें

हल्की-सी भी नंबर की समस्या (रिफ्रेक्टिव एरर) कंप्यूटर विजन सिंड्रोम के लक्षण बढ़ा सकती है। ऐसे में डॉक्टर आपको चश्मा या कॉन्टैक्ट लेंस लगाने की सलाह दे सकते हैं ताकि आप साफ देख सकें। कई लोगों के लिए विशेष कंप्यूटर ग्लासेस बहुत प्रभावी साबित होते हैं।

स्क्रीन टाइम कम करें

हर दिन कोशिश करें कि डिजिटल डिवाइस का उपयोग चार घंटे से कम हो।

रेगुलर ब्रेक लें

अगर काम या पढ़ाई के कारण स्क्रीन से दूर नहीं रह सकते, तो हर दो घंटे में 15 मिनट का ब्रेक लें। इस ब्रेक के दौरान कोई भी स्क्रीन न देखें।

20-20-20 रुल अपनाएं

आंखों को आराम देने के लिए 20-20-20 रूल अपनाएं यानी हर 20 मिनट बाद, 20 फीट दूर किसी चीज को 20 सेकंड तक देखें।

आरामदायक पोजिशन में बैठें

अपना वर्कस्टेशन एर्गोनॉमिक तरीके से सेट करें। इससे आगे झुकने या गर्दन तानकर स्क्रीन देखने की जरूरत कम होगी और आंखों पर अनावश्यक दबाव नहीं पड़ेगा।

ग्लेर और रिफ्लेक्शन कम करें

खिड़की की तेज रोशनी या लैम्प की चमकदार रोशनी स्क्रीन पर रिफ्लेक्ट होकर आंखों को थका सकती है। धूप तेज हो तो पर्दे नीचे करें। कंप्यूटर के पास कम वॉट वाले लैम्प का इस्तेमाल करें और बहुत तेज ओवरहेड लाइट से बचें।

स्क्रीन की ब्राइटनेस और कॉन्ट्रास्ट सेट करें

आपकी स्क्रीन की ब्राइटनेस कमरे की रोशनी के बराबर होनी चाहिए। दिन के समय के हिसाब से इसे एडजस्ट करें। लगभग 60–70% कॉन्ट्रास्ट आंखों के लिए आरामदायक माना जाता है।

फॉन्ट बड़ा रखें

बहुत छोटे फॉन्ट पढ़ने की कोशिश न करें। अगर फॉन्ट 12 से छोटा है तो तुरंत जूम इन करें। जहां संभव हो, डार्क टेक्सट और हल्के बैकग्राउंड वाली सेटिंग चुनें।

सवाल- हेल्दी आंखों के लिए क्या खाएं?

जवाब- हेल्दी आंखों के लिए ऐसी चीजें खाना जरूरी है, जिनमें विटामिन A, ओमेगा-3 फैटी एसिड, एंटीऑक्सिडेंट्स और मिनरल्स भरपूर हों। ये पोषक तत्व आंखों की रेटिना को मजबूत रखते हैं, सूखापन कम करते हैं और उम्र से जुड़ी समस्याओं से बचाते हैं। गाजर, पालक, मेथी, ब्रोकली, शकरकंद, अंडे की जर्दी, बादाम, अखरोट, अलसी के बीज, मछली (खाने वालों के लिए), संतरे, आंवला और ब्लूबेरी जैसी चीजें नियमित खाने से आंखों की सेहत लंबे समय तक अच्छी बनी रहती है।

कुल मिलाकर, लंबे समय तक स्क्रीन देखने की आदत हमारी आंखों पर सबसे ज्यादा असर डालती है, लेकिन सही आदतें, समय-समय पर ब्रेक, नियमित आंखों की जांच और पौष्टिक आहार अपनाकर कंप्यूटर विजन सिंड्रोम से आसानी से बचा जा सकता है।

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