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कियोस्क संचालक सहित 7 आरोपी पकड़े…फिनो बैंक के 84 एटीएम, 9 मोबाइल जब्त !!!!

कियोस्क संचालक सहित 7 आरोपी पकड़े
ठगी के लिए बैंक खाते चीन-नाइजरिया बेचने वाली गैंग पकड़ी, फिनो बैंक के 84 एटीएम, 9 मोबाइल जब्त

डिजिटल अरेस्ट व अन्य प्रकार की ऑनलाइन ठगी को अंजाम देने के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराने वाली गैंग का पर्दाफाश हुआ है। क्राइम ब्रांच ग्वालियर ने सायबर फ्रॉड के लिए खाते खरीदने-बेचने वाला गिरोह पकड़ा है। जिसमें एक ऑनलाइन कियोस्क संचालक समेत 7 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इस गैंग का अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन भी उजागर हुआ है।

गैंग के सदस्यों से कुल 84 एटीएम बरामद किए गए हैं। साथ ही 9 मोबाइल फोन जब्त हुए हैं। इन मोबाइल के माध्यम से रुपए का लेन-देन हुआ है। साथ ही इसमें चीन और नाइजिरिया में बैठे आकाओं के चैट भी हुई है। गैंग में अधिकांश युवा हैं, जो जल्द करोड़पति बनना चाहते थे। इसलिए वह ऑनलाइन ठगी के काम से जुड़े। आरोपी ऑनलाइन ठगी की राशि को क्रिप्टो करेंसी में कनवर्ट कर विदेश भेजते थे। चीन, नाइजिया और ब्रिटेन का कनेक्शन अभी तक पकड़ में आ चुका है।

कियोस्क पर रोज मजदूरों की भीड़ से बढ़ा संदेह, छापे में खुलासा: नया बाजार में बाबा महाकाल के नाम से नरेंद्र सिंह सिकरवार का एमपी ऑनलाइन क्योस्क है। इस पर अधिकांश दिन मजदूरों की भीड़ लगती थी। इस पर आसपास के लोगों को संदेश हुआ। इसकी सूचना उन्होंने पुलिस को दी। पुलिस ने मुखबिर तंत्र एक्टिव किया। 23 दिसंबर को पुलिस नया बाजार के ऑनलाइन कियोस्क पर साइबर क्राइम प्रभारी धर्मेंद्र कुशवाह के नेतृत्व में दबिश दी गई।

कियोस्क द्वारा खोले गए बैंक खातों का रिकॉर्ड चेक किया, तो पाया कि उनमें ज्यादातर बैंक खाते बाहरी राज्यों से सायबर फ्रॉड में रिपोर्टेड हैं। कियोस्क संचालक से फ्रॉड के लिए उपयोग होने वाले फिनो पैमेंट बैंक के 84 एटीएम कार्ड की किट भी बरामद की गई। जांच में पीएनबी, एसबीआई, कोटक एवं यूनियन बैंक के खाते भी पकड़े हैं।

ग्वालियर में खुले खाते उदयपुर में बिकते थे पुलिस ऐसे 100 खाताधारकों को पकड़ेगी

कियोस्क संचालक नरेंद्र सिंह सिकरवार को जब पुलिस ने पकड़ा तो उसने पूछताछ में बताया कि इस गैंग के अन्य सदस्य हैं, जो बैंक खाता खुलवाने के साथ ही खरीदने व बेचने का कार्य करते है। पुलिस ने नरेंद्र के 5 साथियों को हिरासत में लिया।

पूछताछ में पता लगा कि सोनू जाटव ग्वालियर में म्यूल खाते खरीदने व बेचने का मास्टरमाइंड है। ग्वालियर में जितने भी म्यूल बैंक खाते खुलवाए जाते हैं, वह बैंक खाते इस व्यक्ति के द्वारा खरीदे जाते हैं। सूचना पर पुलिस टीम द्वारा तकनीकी जानकारी के आधार पर सोनू जाटव को अभिरक्षा में लिया।

सोनू ने बताया कि ग्वालियर से बैंक खाते वह उदयपुर में अपने साथी को बेचता था। उसने बताया कि साइबर फ्रॉड की राशि को क्रिप्टो करेंसी (यूएसडीटी) में कन्वर्ट करके विदेश भेजते थे। आरोपी के मोबाइल की चेट चेक की गई तो नाइजीरिया, चीन और ब्रिटेन आदि देशों में बातचीत होना पाया गया है।

ग्वालियर के 100 के करीब बैंक खाते यह गैंग ऑनलाइन ठगी के लिए बेच चुकी है। अब पुलिस के रडार पर बैंक में खाता खुलवाने वाले ऐसे खाताधारक और बैंक के कर्मचारी है।

 अलर्ट – लालच में न आएं, अपने दस्तावेज न दें मनी म्यूल आपको पहुंचा सकता है जेल

डिजिटल लेनदेन के बढ़ते इस दौर में सायबर ठगी से बचने के लिए लोगों को अत्याधिक अलर्ट रहने की जरूरत है। आजकल साइबर ठग कम शिक्षित, गरीब एवं लालची लोगों को ‘मनी म्यूल’ बना रहे हैं। मनी म्यूल मतलब उनके बैंक खातों का उपयोग अवैध धन (धोखाधड़ी की कमाई) को छिपाने के लिए कर रहे हैं।

ये ठग लोगों को कमीशन का लालच देकर या “घर बैठे नौकरी’ के बहाने नए खाते खुलवाते हैं, या खाते में पैसे मंगवाते हैं। फिर ठगी की इस रकम को वे दूसरे खातों में ट्रांसफर करवाते हैं। लोगों को इस संदर्भ में अत्याधिक अलर्ट रहना चाहिए।

क्योंकि किसी अनजान व्यक्ति का आपके बैंक खाते में किया गया एक भी ट्रांजेक्शन आपको अपराधी बना सकता है। इससे न सिर्फ आपका खाता फ्रीज हो सकता है, ​बल्कि जेल भी हो सकती है। अपना खाता, सिम या ओटीपी कभी साझा न करें। कोई शक होने पर सायबर क्राइम पोर्टल या 1930 पर कॉल करें। – धर्मवीर सिंह, एसएसपी, ग्वालियर

म्यूल बैंक खाता: ठगी की रकम छिपाने का सबसे आसान रास्ता

म्यूल बैंक खाता: यह ऐसे व्यक्ति के नाम पर खुलवाया जाता है, जो खुद ठगी में सीधे शामिल नहीं होता, लेकिन उसका खाता ठगी की रकम के लेन-देन में उपयोग होता है। अक्सर यह खाते जरूरतमंद लोगों के नाम पर खुलवाए जाते हैं। ठग बच जाते हैं, लेकिन फंसता खाता धारक है।

25 हजार का बिकता है खाता:

ठग लोगों को 2 से 5 हजार रुपए का लालच देकर उनके दस्तावेज लेते हैं। खाता खुलते ही ATM कार्ड, चेकबुक और मोबाइल नंबर ठग अपने पास रखते हैं। एजेंट ठगों को 10 से 25 हजार में एक खाता बेच देते हैं।

मिलीभगत:

इसमें बैंक का स्टॉफ भी मिला होता है। बैंक मित्र और कियोस्क ऑपरेटर केवायसी में गड़बड़ी करते हैं। बैंक कर्मचारी फील्ड वेरिफिकेशन नहीं करते हैं। बिना जांच के एटीएम, पासबुक तुरंत जारी कर देते हैं। इस मामले में बैंक की भूमिका भी संदेश में हैं।

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