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इंदौर ने तोड़ दिया पूरे देश का दिल !!!

इंदौर ने तोड़ दिया पूरे देश का दिल

स्वच्छतम शहर की ऐसी गंदी शक्ल देखकर सब भौचक और दुखी हैं। अब तक 16 निरपराध नागरिकों की मौत हो चुकी है, कुछ की हालत नाजुक है। इसके बावजूद राजनीति और सरकारी बाबुओं का कारोबार तेजी से सामान्य हो रहा है। दो-चार दिन में भागीरथपुरा उनकी स्मृति में धूमिल होने लगेगा।

Indore Contaminated Water: इंदौर ने तोड़ दिया पूरे देश का दिलअब तक 16 निरपराध नागरिकों की मौत

 इंदौर के नाम पर देश इतराता था। हर शहर इंदौर जैसा बनने का सपना देखता था। प्रधानमंत्री दुनिया में कहीं भी जाते थे तो इंदौर का उल्लेख करके अपना सीना चौड़ा कर लेते थे। दुर्भाग्य है कि लगातार आठ बार स्वच्छता के चैंपियन इस शहर को इसी के निकम्मे नेताओं-अधिकारियों की बुरी नजर लग गई। मल-मूत्र मिश्रित जहरीला पानी पीने से अब तक 16 निरपराध नागरिकों की मौत की खबर देकर इंदौर ने देश का दिल तोड़ दिया।

जो शहर सबके सपनों में बसता था, अब खुद दुस्वप्न बनकर रह गया। स्वच्छता के प्रति अपने जुनून के लिए इंदौर का डंका पूरी दुनिया में बजता था, इसलिए अब इस कलंक की गूंज भी सीमा से परे है। स्वच्छतम शहर की ऐसी गंदी शक्ल देखकर सब भौचक और दुखी हैं।

महीनों शिकायत के बाद भी जिम्मेदारों कान पर नहीं रेंगा जूं

त्रासदी के शिकार बने भागीरथपुरा और कई अन्य मोहल्लों के नागरिक महीनों से शिकायत कर रहे थे कि उनके घरों में मटमैला और बदबूदार पानी आता है, लेकिन जन प्रतिनिधियों और अधिकारियों के कान पर जूं नहीं रेंगी। दिसंबर के अंतिम सप्ताह में जब भागीरथपुरा में हालात अनियंत्रित होने लगे और उल्टी-दस्त से पीड़ित लोग अस्पताल पहुंचकर दम तोड़ने लगे तो भी सरकारी तंत्र लीपापोती के प्रयास में लगा रहा। बहरहाल, जब कई बीमारों ने दम तोड़ दिया, तब इंदौर से लेकर भोपाल तक हड़कंप मचा।

शासन को यह चिंता सताने लगी कि इस आपदा के लिए उनके किसी चहेते अधिकारी पर आंच न आ जाए, इसे ध्यान में रखते हुए कार्रवाई के नाम पर कुछ छोटे अधिकारियों पर कथित कार्रवाई कर दी गई। इंदौर के कई अन्य मोहल्लों में अब भी भागीरथपुरा जैसे पानी की आपूर्ति जारी है, पर जब तक सैकड़ों लोग अस्पताल न भागें और उनमें कुछ परलोक न सिधार जाएं, तब तक प्रशासन क्यों चिंता करे?

भागीरथपुरा के प्रकरण ने यह निश्चिंतता भी दे दी कि कुछ भी हो जाए, किसी अधिकारी-कर्मचारी का कुछ नहीं बिगड़ेगा। विशुद्ध प्रशासनिक लापरवाही वाले इस कांड के लिए एक भी वरिष्ठ अधिकारी पर खरोंच नहीं आई।

पानी के नमूनों की जांच से यह साबित हो चुका है कि सटकर बिछी सीवर लाइन का मल-मूत्र रिसकर पानी वाली पाइप लाइन में पहुंच रहा था। नागरिकों के लिए इससे अधिक नारकीय क्या हो सकता है कि उनका नगर निगम उन्हें पानी के साथ मल-मूत्र भी पिलाए।

विडंबना है कि भागीरथपुरा प्रदेश के नगरीय विकास और आवास मंत्री व राष्ट्रीय कद के भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय के अपने विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा है। चिराग तले अंधेरा चरितार्थ होने पर मंत्रीजी का आपा खोना स्वाभाविक था जिसके बाद वह कैमरे के सामने मीडिया के साथ बदतमीजी पर उतर आए।

महापौर ने झाड़ लिया पल्ला

इंदौर के महापौर ने तो यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि अधिकारी उनकी बात नहीं सुनते, इसलिए वह कुछ नहीं कर सकते। भागीरथपुरा वाली पाइप लाइन फिलहाल ठीक कर दी गई है जबकि बाकी शहर को उसके हाल पर छोड़कर नेता-अधिकारी परस्पर निपटने में लगे हैं। अब तक 16 निरपराध नागरिकों की मौत के बावजूद नेताओं-अधिकारियों के रवैये से कतई नहीं लग रहा कि उनके निकम्मेपन से इंदौर की किस कदर थू-थू हो रही है।

अधिकारी निश्चिंत,मंत्रियों-महापौरों को भी कौई चिंता नहीं

अधिकारी निश्चिंत हैं कि उनके आका उनका बाल भी बांका नहीं होने देंगे जबकि मंत्रियों-महापौरों के पास तो ऐसी कोई चिंता फटक ही नहीं सकती। अब भी तमाम मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं। कुछ की हालत नाजुक है, इसके बावजूद राजनीति और सरकारी बाबुओं का कारोबार तेजी से सामान्य हो रहा है। दो-चार दिन में भागीरथपुरा उनकी स्मृति में धूमिल होने लगेगा। भविष्य में जब किसी दूसरे मोहल्ले में ऐसा कुछ होगा, तब देखा जाएगा।

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