मध्य प्रदेश

मौतों की जिम्मेदारी किसकी?

मौतों की जिम्मेदारी किसकी? पार्षद तो छोटा आदमी…
नाकामी अफसर की; मंत्री विजयवर्गीय बोले- पार्षद ने बताई 14-15 मौतें, ‘सही आंकड़ों’ के लिए रिकॉर्ड जांच रहे

इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई 16 मौतों ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े किए हैं। अभी कई लोगों का इलाज चल रहा है। सरकार एक्शन में दिखी, मगर बहुत देर से। दैनिक भास्कर ने जब इस इलाके के विधायक और प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से पूछा कि चूक कहां हुई? तो उन्होंने कहा इस त्रासदी के लिए 200 फीसदी अधिकारी ही जिम्मेदार हैं। सरकार की स्टेटस रिपोर्ट में सिर्फ 4 मौत बताने के सवाल पर बोले- पार्षद ने मुझे 14-15 मौतें बताई हैं।

उन्होंने माना कि ये सिस्टम की नाकामी है, जिसकी जवाबदेही सरकार की है। साथ ही कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि मुख्यमंत्री से चर्चा के बाद पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजा राशि 4 लाख रुपए की जाएगी। भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो इसके लिए विशेष सिस्टम बनाने के निर्देश दिए हैं।

और क्या कहा कैलाश विजयवर्गीय ने पढ़िए पूरी बातचीत….

सरकार ने शुक्रवार रात को निगम कमिश्नर दिलीप यादव को हटा दिया। बाकी दो को सस्पेंड किया।

सवाल: सरकार मौत के आंकड़े कंफर्म क्यों नहीं कर रही?

जवाब: जो लोग डिस्पेंसरी के जरिए हॉस्पिटल में गए हैं, उनके आंकड़े हैं, पर कुछ लोग डायरेक्ट चले गए थे। हम उन्हें कंफर्म कर रहे हैं। इस त्रासदी की वजह से यदि कोई भी व्यक्ति मृत हुआ है, तो उसे वो ही सुविधा मिलेगी जो सबको मिल रही है। मौत में फर्क नहीं है, लेकिन उसे कन्फर्म करना बहुत जरूरी है।

सवाल: यह आंकड़े कब तक कंफर्म हो जाएंगे?

जवाब: अधिकारियों को हमने निर्देश दिए हैं। पार्षद ने मुझे बताया है कि 14-15 मौत हुई है। हमने कलेक्टर को भी कहा है, सीएमएचओ को भी कहा है कि जरा देखिए, कंफर्म करिए। इसमें एक प्रॉब्लम यह आ रही है कि कुछ लोगों के पोस्टमॉर्टम नहीं हुए हैं। इस पर मैंने कहा है कि उन लोगों का मेडिकल रिकॉर्ड देख लीजिए कि उनका इलाज किस बात का हुआ है।

सवाल: क्या सिर्फ ड्रेनेज के पानी से मौतें हुईं? या उद्योग का केमिकल भी मिला था?

विजयवर्गीय: ड्रेनेज में मुख्य रूप से मल-मूत्र जो लंबे समय तक रहते हैं। वह काफी घातक होते हैं। इस मामले में भी संभवत: ऐसा वायरस है जो काफी घातक है। हालांकि अभी तक तो किसी भी प्रकार के कमर्शियली, औद्योगिक केमिकल या तत्व जैसी बात सामने नहीं आई है।

सवाल: भर्ती मरीजों की क्या स्थिति है? और जानें तो नहीं जाएंगी?

विजयवर्गीय : अभी काफी सुधार है। जो भी बच्चे अलग-अलग अस्पताल में हैं, वह सब स्टेबल हैं। अरविंदो अस्पताल में भी जो दो बच्चे एडमिट हैं, उनकी हालत मैं तेजी से सुधार हो रहा है।

सवाल: इस पूरे कांड में सबसे बड़ी नाकामी क्या रही है?

जवाब: देखिए, यह सिस्टम की नाकामी है। मैं तो पहले दिन से कह रहा हूं कि चूंकि हम सरकार में हैं तो जवाबदेही हमारी है। सीएम ने एक कमेटी भी बनाई थी, जिसने अपनी रिपोर्ट सीएम को दे दी होगी, शायद इसीलिए ही अधिकारियों पर कार्रवाई भी हुई है। और नए अधिकारी आए हैं। सिस्टम की नाकामी तो है, इससे इनकार नहीं किया जा सकता है।

सरकार ने अपर आयुक्त के तौर पर तीन नए अफसरों की तैनाती की है।
सरकार ने अपर आयुक्त के तौर पर तीन नए अफसरों की तैनाती की है।

सवाल: इसमें पार्षद भी शामिल थे, वह काम शुरू नहीं करवा पाए?

जवाब: देखिए, पार्षद बहुत छोटा जनप्रतिनिधि होता है। उसने लिखकर दे दिया कमिश्नर को, मेयर को और उन्होंने टेंडर बुलवा लिए। अब टेंडर कहीं पर रुक गया, तो यह नाकामी तो उस अधिकारी की है जिसके पास फाइल रुकी है। उसे पनिशमेंट मिलना चाहिए और उसे ये दिया भी गया है।

सवाल: आगे ऐसा न हो, इसकी क्या तैयारी है?

जवाब: मैंने आज ही हमारे एसीएस (अपर मुख्य सचिव) को निर्देश दिए हैं कि हमें मध्य प्रदेश में सबसे प्राथमिकता से गंदे पानी की शिकायत को लेना चाहिए। हमें भोपाल में एक नम्बर देना चाहिए जो सिर्फ गंदे पानी की शिकायत और समाधान के लिए हो। साथ ही यह भी कहा है कि जिस भी नगर पालिका और निगम के पास गंदे पानी की शिकायत आए, उसकी जानकारी हमको भी दें।

इसके लिए हम एक अधिकारी की नियुक्ति करेंगे कि वह यह देखे और समय पर निराकरण करवाए। क्योंकि कोई भी दुर्घटना बहुत बड़ी होती है और उससे सबक लेना बहुत जरूरी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *