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जब टॉयलेट क्लीनिंग बन गई जानलेवा…जानें सफाई के दौरान सुरक्षा के 11 नियम !!!!

जब टॉयलेट क्लीनिंग बन गई जानलेवा
दो अलग क्लीनर को कभी मिक्स न करें, जानें सफाई के दौरान सुरक्षा के 11 नियम

कई बार टॉयलेट के जिद्दी दाग बार-बार रगड़ने पर भी नहीं जाते। बदबू बनी रहती है और तब लोग एक क्लीनर के साथ दूसरा क्लीनर मिलाने की सोच लेते हैं। लेकिन यही छोटी-सी गलती गंभीर हेल्थ इमरजेंसी का कारण बन सकती है।

हाल ही में ऐसा ही एक मामला सामने आया। इसका जिक्र पल्मोनोलॉजी और स्लीप मेडिसिन के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. अंकित भाटिया ने अपने सोशल मीडिया पेज पर किया। सिर्फ दो अलग-अलग टॉयलेट क्लीनर मिलाने से एक महिला की हालत अचानक बिगड़ गई। क्लीनर मिक्स करते ही उसकी सांस फूलने लगी और वह फर्श पर गिर पड़ी। उसके फेफड़ों में जहरीली गैस भर गई थी।

डॉक्टरों ने इसे रिएक्टिव एयरवे डिस्फंक्शन सिंड्रोम (RADS) बताया। यह केमिकल के एक तेज झटके से अचानक होने वाले अस्थमा अटैक जैसा होता है।

• टॉयलेट क्लीनर मिक्स करना क्यों खतरनाक है?

• इससे फेफड़ों को क्या-क्या नुकसान हो सकता है?

• टॉयलेट क्लीनिंग के दौरान किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है?

सवाल- टॉयलेट क्लिनर मिक्स करना खतरनाक क्यों है?

जवाब- अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के मुताबिक, ब्लीच जैसे क्लीनर जब दूसरे केमिकल्स के साथ मिलते हैं तो क्लोरीन गैस बन सकती है। यह गैस बॉडी में जाकर हाइड्रोक्लोरिक और हाइपोक्लोरस एसिड बनाती है। एक्सपोजर की गंभीरता के हिसाब से इसके लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं। साथ ही गंभीर भी हो सकते है। ज्यादा मात्रा में यह गैस फेफड़ों को स्थायी नुकसान भी पहुंचा सकती है।

सवाल- टॉयलेट क्लीनर मिक्स करने से फेफड़ों को क्या नुकसान होता है?

जवाब- अमेरिकन जर्नल ऑफ रेस्पिरेटरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, घरेलू क्लीनिंग स्प्रे और केमिकल्स के लंबे समय तक एक्सपोजर से फेफड़ों की कार्यक्षमता तेजी से घटने लगती है। यह असर रोज कई सिगरेट पीने जितना नुकसानदायक हो सकता है।

 

साथ ही लंबे समय तक इसके एक्सपोजर से फेफड़ों में इंफ्लेमेशन हो सकता है। लंग टिश्यू का स्ट्रक्चर बदल सकता है। एयरफ्लो कम हो सकता है और सांस से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ये असर धीरे-धीरे सामने आते हैं।

सवाल- किन लोगों को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए?

जवाब- टॉयलेट क्लीनिंग के दौरान निकलने वाले तेज केमिकल और गैस हर किसी पर एक जैसा असर नहीं करते। कुछ लोगों के लिए इसका जोखिम कहीं ज्यादा होता है। ग्राफिक से समझते हैं कि किन्हें इसका जोखिम ज्यादा होता है-

अगर आप इनमें से किसी भी कैटेगरी में आते हैं, तो टॉयलेट क्लीनिंग के दौरान मास्क, ग्लव्स जरूर पहनें और अच्छा वेंटिलेशन जरूर रखें या किसी और से सफाई करवाएं।

सवाल- कौन से क्लीनिंग प्रोडक्ट्स को कभी मिक्स नहीं करना चाहिए?

जवाब- कुछ क्लीनिंग प्रोडक्ट्स को आपस में मिलाने से क्लोरीन और क्लोरामीन जैसी जहरीली गैसें बनती हैं। ये गैसें खांसी और सांस फूलने की समस्या पैदा कर सकती हैं। इससे आंखों में जलन होती है। गंभीर रेस्पिरेटरी प्रॉब्लम्स का खतरा भी बढ़ जाता है। ग्राफिक से समझते हैं कि कौन–कौन से कॉम्बिनेशन खतरनाक होते हैं-

सवाल- अगर गलती से क्लीनिंग प्रोडक्ट मिक्स हो जाएं तो क्या करें?

जवाब- कई बार सफाई के दौरान अनजाने में दो क्लीनिंग प्रोडक्ट आपस में मिल जाते हैं। ऐसे में खुद से उस मिक्सचर को साफ या बेअसर करने की कोशिश न करें। खासकर तब, जब ब्लीच, अमोनिया या एसिड शामिल हों। इससे और ज्यादा जहरीली गैस बन सकती है।

ऐसी स्थिति में घबराने या वहीं खड़े रहने की गलती न करें। तुरंत सही कदम उठाना जरूरी होता है क्योंकि कुछ सेकंड की देरी भी सेहत को नुकसान पहुंचा सकती है। ऐसा होने पर तुरंत ये काम करें–

  • तुरंत उस जगह के खिड़की–दरवाजे खोलें।
  • पंखा चलाएं।
  • उस जगह से बाहर निकलें।
  • खुली जगह पर जाएं।
  • मिक्सचर को गलती से भी हाथ न लगाएं।
  • परेशानी महसूस हो तो डॉक्टर को दिखाएं।

सवाल- टॉयलेट क्लीनिंग का सही तरीका क्या है?

जवाब- टॉयलेट की सही सफाई का तरीका यही है कि इसे रोजमर्रा की आदत बनाया जाए। इसे आखिरी वक्त का भारी काम न बनाएं। नियमित सफाई से दाग जमने नहीं पाते। तब तेज या हार्श केमिकल की जरूरत भी नहीं पड़ती। हल्के और जरूरत के मुताबिक क्लीनर का इस्तेमाल करें। धीरे-धीरे सफाई करना ज्यादा सुरक्षित और असरदार होता है। सफाई के दौरान धैर्य रखना जरूरी है। जल्दबाजी में बार-बार प्रोडक्ट बदलना या ज्यादा मात्रा डालना जोखिम बढ़ा देता है। कोशिश करें कि टॉयलेट को तय अंतराल पर साफ किया जाए। इससे गहरे दाग नहीं बनते। साथ ही फेफड़ों और स्किन पर अनावश्यक केमिकल का दबाव भी कम रहता है।

सवाल- टॉयलेट क्लीनिंग करते समय किन बातों का ध्यान रखें?

जवाब- टॉयलेट क्लीनिंग के दौरान थोड़ी सी समझदारी बड़े हेल्थ रिस्क से बचा सकती है। एक ही क्लीनर का इस्तेमाल करने से केमिकल रिएक्शन का खतरा कम रहता है। साथ ही प्रोडक्ट लगाने से पहले उसका लेबल जरूर पढ़ें। सफाई के वक्त दरवाजा या खिड़की खुली रखें और एग्जॉस्ट फैन चालू रखें, ताकि जहरीली गैस बाहर निकल सके। ग्लव्स और पुराने कपड़े त्वचा को केमिकल के सीधे संपर्क से बचाते हैं, जबकि सतह को अच्छी तरह रिंस करने से क्लीनर के स्टेन नहीं रहते। क्लीनिंग प्रोडक्ट्स को अलग-अलग रखना और घर के बाकी लोगों, खासकर बच्चों को इन नियमों की जानकारी देना भी जरूरी है, ताकि सफाई सुरक्षित तरीके से हो सके।

टॉयलेट क्लीनिंग से जुड़े कुछ कॉमन सवाल और जवाब

सवाल- क्या सिर्फ तेज गंध से भी नुकसान हो सकता है?

जवाब- हां, लगातार तेज केमिकल गंध का संपर्क फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है।

सवाल- क्या नेचुरल क्लीनर पूरी तरह सुरक्षित होते हैं?

जवाब- नेचुरल क्लीनर आमतौर पर कम हानिकारक होते हैं, लेकिन उन्हें भी मिक्स नहीं करना चाहिए।

सफाई जरूरी है, लेकिन सेहत की कीमत पर नहीं। थोड़ी समझदारी, सही जानकारी और सावधानी से टॉयलेट क्लीनिंग को सुरक्षित बनाया जा सकता है। अगर कभी भी सांस, आंख या त्वचा से जुड़ी परेशानी महसूस हो, तो इसे नजरअंदाज न करें और समय पर डॉक्टर से संपर्क करें।

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