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UP में सपा को कम, BJP को ज्यादा नुकसान! 2027 में किसका होगा फायदा?

UP में सपा को कम, BJP को ज्यादा नुकसान! 2027 में किसका होगा फायदा? इन आंकड़ों ने बढ़ाई मुश्किल

UP Politics: उत्तर प्रदेश में एसआईआर का असर, सपा और बीजेपी दोनों पर देखने को मिल रहा है. लोकसभावार आकलन करें तो उन सीटों पर नाम ज्यादा कटे हैं जहां बीजेपी जीती थी.

उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से नाम कटौती को लेकर सियासत तेज है. 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने 37 सीटें और भारतीय जनता पार्टी ने 33 सीटें जीती थीं, जबकि बाकी सीटें कांग्रेस और अन्य दलों के खाते में गई थीं. अब इन नतीजों को अगर जिला-वार वोटर लिस्ट कटौती से जोड़कर देखा जाए, तो दोनों दलों की जीती सीटों वाले इलाकों में बड़ा अंतर साफ दिखाई देता है. इसका असर यूपी में वर्ष 2027 में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव में पड़ सकता है.

समाजवादी पार्टी की जीत वाले जिलों में मतदाता सूची से नाम कटौती आमतौर पर 15 से 25 प्रतिशत के बीच रही, हालांकि कुछ जगह इससे ज्यादा या कम भी दिखी. सीटो की बात करें तो कन्नौज लोकसभा सीट में 21.57%, मैनपुरी में 16.17%, कैराना सीट से जुड़े शामली जिले में 16.75%, मुजफ्फरनगर में 16.29%, मुरादाबाद में 15.76% वोटरों के नाम कटे. रामपुर जिले में कटौती 18.29%, संभल में 20.29%, फिरोजाबाद में 18.13%, एटा में 16.80% और बदायूं में 20.39% रही.

वहीं आंवला लोकसभा सीट से जुड़े बरेली जिले में 20.99% नाम हटे. खीरी जिले में आने वाली खीरी और धौरहरा दोनों सीटों पर 17.50% कटौती दर्ज हुई. मोहनलालगंज सीट वाले लखनऊ जिले में सबसे ज्यादा 30.04% नाम कटे.

उधर, सुल्तानपुर में 17.19%, प्रतापगढ़ में 19.81%, इटावा में 18.95%, जालौन में 16.34%, हमीरपुर में 10.78% और बांदा में 13% मतदाताओं के नाम हटे. फतेहपुर में 16.32%, कौशाम्बी में 18%, अयोध्या (फैजाबाद) में 17.69%, अम्बेडकर नगर में 13.82%, श्रावस्ती में 16.51%, बस्ती में 15.70% और संत कबीर नगर में 19.96% कटौती दर्ज की गई. आजमगढ़ जिले की लालगंज और आजमगढ़ दोनों सीटों पर 15.25%, घोसी (मऊ) में 17.52%, सलेमपुर से जुड़े देवरिया जिले में 17.22%, बलिया में 18.16%, जौनपुर और मछलीशहर दोनों में 16.51%, गाजीपुर में 13.85%, चंदौली में 15.45% और रॉबर्ट्सगंज सीट वाले सोनभद्र जिले में 17.93% वोटरों के नाम कटे.

बीजेपी की जीती हुई सीटों पर नाम कटौती ज्यादा?

वहीं बीजेपी की जीत वाले जिलों में मतदाता सूची से नाम कटौती का स्तर अपेक्षाकृत ज्यादा नजर आता है और कई जगह यह 20 से 30 प्रतिशत तक पहुंच गया. अमरोहा में 13.22%, मेरठ में 24.65%, गाजियाबाद में 28.83%, गौतमबुद्ध नगर में 23.98%, बुलंदशहर में 15.14% और बरेली में 20.99% कटौती दर्ज हुई. हाथरस में 16.30%, मथुरा में 19.19%, हापुड़ में 22.30%, शाहजहांपुर में 21.76%, कन्नौज में 21.57% और फर्रुखाबाद में 20.80% नाम हटे. बहराइच में 20.44%, बदायूं में 20.39%, कानपुर नगर में 25.50%, आगरा में 23.25%, वाराणसी में 18.18% और लखनऊ में 30.04% मतदाता सूची से बाहर हुए. पीलीभीत में 13.61%, हरदोई में 18.04%, कौशाम्बी में 18%, एटा में 16.80%, अलीगढ़ में 18.60%, उन्नाव में 17.51% और झांसी में 13.92% कटौती हुई.

इसके साथ ही प्रयागराज (फूलपुर) में 24.64%, कैसरगंज सीट से जुड़े बहराइच जिले में 20.44%, गोंडा में 18.40%, सिद्धार्थनगर (डुमरियागंज) में 20.33%, महराजगंज में 15.11%, गोरखपुर में 17.61%, कुशीनगर में 18.65%, देवरिया में 17.22%, बांसगांव (गोरखपुर जिला) में 17.61% और भदोही में 16.73% वोटरों के नाम कटे.

UP SIR पर क्या बोले एक्सपर्ट?

इन आंकड़ों से किसका नुकसान हुआ इस पर वरिष्ठ पत्रकार योगेश मिश्रा कहते हैं कि इससे अभी ये नही कहा जा सकता . इससे किसी भी पार्टी के नुकसान या फायदे पर अंतिम निष्कर्ष निकालना बहुत मुश्किल है. जब तक आप ग्राउंड पर जाकर यह नही देखेंगे कि किस कम्युनिटी के, किस समाज के, किस इलाके और किस पोलिंग बूथ के कितने वोट कटे हैं, तब तक यह तय करना संभव नही है कि नुकसान किसे हुआ है. सिर्फ आंकड़ो के आधार पर यह कहना जल्दबाज़ी होगी कि किसी एक पार्टी को ही नुकसान हुआ है.

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