20 लोगों की जान लेने वाले अफसरों का सरकार ने कर दिया प्रमोशन
Indore Court- इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों की संख्या 20 हो चुकी है। इस केस में एमपी के कई अफसरों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इंदौर में तैनात रहे इन अधिकारियों पर गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज कराने के लिए कोर्ट में एक याचिका लगाई गई है। शहर के भागीरथपुरा में जहरीले पेयजल से हुई मौतों के मामले में इंदौर जिला अदालत में यह केस लगाया गया है। भागीरथपुरा निवासी रामू सिंह ने जहरीले पानी से हुई मौतों के लिए संबंधित अधिकारियों को जिम्मेदार बताते हुए उनपर एफआईआर दर्ज करने के लिए याचिका लगाई है। उन्होंने दलील दी कि ये स्पष्ट रूप से गैर इरादतन हत्या का केस है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि मौतों के जिम्मेदार अफसरों को सरकार ने पदोन्नत कर दिया है। कोर्ट ने केस में पुलिस से रिपोर्ट तलब की है।
भागीरथपुरा के मामले में अब हाई कोर्ट के साथ ही जिला अदालत में भी याचिका लगाई गई है। याचिकाकर्ता रामू सिंह का कहना है कि भागीरथपुरा निवासी लंबे अर्से से गंदा पानी पी रहे हैं। 2024 में इससे एक युवती की मौत के बाद नर्मदा की पाइप लाइन बदलने के टेंडर भी जारी हो गए थे लेकिन इंदौर नगर निगम के तत्कालीन आयुक्त ने इसे दबा दिया। बाद में इंदौर आए आयुक्त दिलीप यादव और वर्तमान कलेक्टर शिवम वर्मा ने भी टेंडर पास नहीं किया। त्रासदी के बाद 30 दिसंबर को टेंडर पास किया।
याचिका में कोर्ट से मामले में मौत के जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज करने की मांग की गई है। जांच होने तक सभी अधिकारियों को पद से हटाने की भी मांग की है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि इतने लोगों की जान लेने वाले जिम्मेदार अधिकारियों को राज्य सरकार ने प्रमोट कर दिया है।
याचिका में इंदौर नगर निगम के तत्कालीन दोनों आयुक्त, अपर आयुक्त रोहित और जल कार्य अधीक्षक यंत्री संजीव श्रीवास्तव के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज करने की मांग की गई है। शिकायतकर्ता ने कहा कि टेंडर समय पर पास हो जाता तो इतने लोगों की मौत नहीं होती।
अधिवक्ता दिलीप नागर के अनुसार संबंधित अधिकारियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कराने वे बाणगंगा पुलिस थाने भी गए थे। पुलिस ने हमारा आवेदन ही नहीं लिया। बता दें कि इंदौर हाईकोर्ट भी दूषित पेयजल से हुई मौतों पर गुस्सा जता चुका है।

