दिल्ली

क्या ममता बनर्जी एंड कंपनी पर दर्ज होगी FIR?

पश्चिम बंगाल सरकार के खिलाफ ED पहुंची सुप्रीम कोर्ट, क्या ममता बनर्जी एंड कंपनी पर दर्ज होगी FIR?

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस को राजनीतिक और चुनावी सलाह देने वाली कंपनी इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) के ऑफिस और कंपनी के प्रमुख के आवास पर ED के छापे के बाद राजनीति गरमाई हुई है. इस पूरे मामले को लेकर ED ने अब बंगाल की चीफ मिनिस्टर, डीजीपी और कोलकाता के पुलिस कमिश्नर को सुप्रीम कोर्ट में घसीट लिया है.

पश्चिम बंगाल सरकार के खिलाफ ED पहुंची सुप्रीम कोर्ट, क्या ममता बनर्जी एंड कंपनी पर दर्ज होगी FIR?

ED ममता बनर्जी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची.

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस को राजनीतिक और चुनावी सलाह देने वाली कंपनी इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) के ऑफिस और कंपनी के प्रमुख के आवास पर ED के छापे के बाद राजनीति गरमाई हुई है. अब इस मामले को लेकर ED ने ममता एंड कंपनी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. बताया जा रहा है कि ED ने सुप्रीम कोर्ट से ममता और कुछ पुलिस अफसरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की गुजारिश की है.

केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बंगाल की चीफ मिनिस्टर, डीजीपी और कोलकाता के पुलिस कमिश्नर को सुप्रीम कोर्ट में घसीट लिया है. ED ने सोमवार को सीएम, डीजीपी और पुलिस कमिश्नर व अन्य के खिलाफ 2 अलग-अलग याचिकाएं एससी में दाखिल की हैं. ED द्वारा दायर याचिका में आरोप है कि 2,742 करोड़ रुपये के कोयला घोटाले में 8 जनवरी की तलाशी में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, डीजीपी राजीव कुमार और सीपी मनोज वर्मा ने बाधा डाली है. ED ने इन सभी के खिलाफ CBI FIR दर्ज कर जांच कराए जाने की मांग की है.

ED की छापेमारी के दौरान पहुंचीं थीं ममता

ED ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल दो याचिकाओं में बताया कि 8 जनवरी 2026 को कोलकाता में हुई घटनाओं को विस्तार से बताया है. ED का दावा है कि पुराने कोयला तस्करी मामले की जांच के सिलसिले में इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) के सॉल्ट लेक स्थित कार्यालय और संस्था के प्रमुख प्रतीक जैन के लाउडन स्ट्रीट स्थित आवास पर तलाशी ली गयी थी. इसी दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 100 से अधिक पुलिसकर्मियों के साथ दोपहर 12:05 बजे वहां पहुंच गईं. इसके बाद मौके ED द्वारा जब्त लैपटॉप, मोबाइल फोन व दस्तावेज जबरन ट्रंक में रखकर साथ ले गईं.

ED ने ममता सरकार पर क्या लगाए आरोप?

ED ने आगे तर्क दिया है कि जिस तरह से कथित तौर पर तलाशी स्थलों पर कब्जा किया गया, वह एक वैधानिक जांच को पूरी तरह से पटरी से उतारने के बराबर है. एजेंसी के अनुसार, वैधानिक अधिकार के तहत शुरू हुई तलाशी राज्य तंत्र की संलिप्तता के कारण टकराव में बदल गई. जिस राजनीतिक परामर्श फर्म, आई-पीएसी, पर ध्यान केंद्रित किया गया है, उसने पहले तृणमूल कांग्रेस के साथ काम किया है और 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के दौरान पार्टी की चुनावी रणनीति को आकार देने में शामिल थी.

कलकत्ता हाइ कोर्ट में भी 3 याचिकाएं दायर

वहीं इससे पहले इस पूरे मामले को लेकर कलकत्ता हाइ कोर्ट में भी 3 याचिकाएं दायर की जा चुकी हैं. इनमें एक याचिका ईडी की ओर से और 2 याचिकाएं पश्चिम बंगाल सरकार और तृणमूल कांग्रेस की ओर से दाखिल की गयी हैं. इन याचिकाओं पर शुक्रवार को सुनवाई होनी थी, लेकिन कोर्ट कक्ष में अव्यवस्था के कारण सुनवाई नहीं हो सकी. हाईकोर्ट ने अब इस मामले की अगली सुनवाई 14 जनवरी को तय की है.

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