हाथरस कांड: कड़ी सुरक्षा के बीच पीड़ित परिवार लखनऊ रवाना, हाई कोर्ट में आज सुनवाई
हाथरस मामले (Hathras Case) में पीड़िता (Victim) का परिवार लखनऊ (Lucknow) के लिए रवाना हो गया है. इससे पहले प्रशासनिक अधिकारी पीड़ित परिवार के गांव पहुंचे. परिजनों की सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं. सोमवार दोपहर 2 बजे लखनऊ हाई कोर्ट में पीड़ित परिवार पेश होगा. मामले से जुड़े अधिकारियों को भी आज ही हाई कोर्ट में पेश होना है.
एसडीएम अंजलि गंगवार, सीओ शैलेंद्र बाजपेयी पीड़ित परिवार के साथ जा रहे हैं. 6 गाड़ियों के काफिले के साथ पीड़ित परिवार के पांच सदस्य लखनऊ हाईकोर्ट पहुंचेंगे. पीड़ित परिवार सुबह 6 बजे हाथरस से लखनऊ के लिए रवाना हुआ और 11-12 बजे तक उनके लखनऊ पहुंचने की संभावना है.
‘सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम’
अंजलि गंगवार ने कहा, “मैं उनके साथ जा रही हूं. सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं. जिलाधिकारी और पुलिस अधिक्षक भी हमारे साथ जा रहे हैं.”
‘पांच लोग कोर्ट में पेश होंगे’
पीड़िता के बड़े भाई ने रविवार को बताया, “हम में से पांच अदालत में पेश होंगे. प्रशासन ने हमसे पूछा था कि हमारे परिवार के कितने लोग 12 अक्टूबर को सुनवाई के लिए मौजूद होना चाहेंगे. मेरे पिता, माता, बहन, छोटा भाई और मैं अदालत में उपस्थित होंगे. सोमवार को हमारे लखनऊ जाने के दौरान प्रशासन ने पूरी सुरक्षा देने का वादा किया है.”
‘पीड़ित परिजन दर्ज करा सकें बयान’
हाई कोर्ट ने हाथरस के डिस्ट्रिक्ट जज से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा था कि मृतका के परिवार के सदस्य अपने बयान दर्ज करा सकें कि क्या हुआ था. राज्य और जिले के अधिकारियों को भी परिवार के लिए जरूरी सभी मदद और सुरक्षा देने के लिए कहा गया है.
अदालत ने पीड़िता के अंतिम संस्कार के अगले दिन 1 अक्टूबर को कहा, “हम इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या मृतका और उसके परिवार के सदस्यों के मौलिक अधिकारों का घोर उल्लंघन हुआ है. परिवार के किसी सदस्य की सहमति और मौजूदगी के बिना पीड़िता का देर रात 2.40 बजे अंतिम संस्कार कर दिया गया था.
‘जब तक न्याय नहीं मिल जाता…’
अदालत ने मीडिया हाउस से भी कन्टेंट साझा करने के लिए कहा है जिसके आधार पर घटना की रिपोर्टिंग की गई थी. उत्तर प्रदेश राज्य, अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह), डीजीपी, एडीजी (कानून और व्यवस्था), और हाथरस के जिलाधिकारी और सुपरिटेन्डेंट को जवाबदेह बनाया गया है.
इस बीच, लड़की के भाई ने कहा है कि परिवार को जब तक न्याय नहीं मिल जाता और यह सुनिश्चित नहीं हो जाता कि यह उसी की बहन की राख है, तब राख को विसर्जित नहीं करेगा.