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पुलिस मुकदमों में उलझी ईडी, कैसे मिलेगी राहत?

बंगाल के बाद अब झारखंड… पुलिस मुकदमों में उलझी ईडी, कैसे मिलेगी राहत?

प्रवर्तन निदेशालय (ED) पश्चिम बंगाल और झारखंड में अपने एक्शन को लेकर चर्चा में है. बंगाल में मनी लॉन्ड्रिंग जांच के दौरान ED अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज हुई, जिस पर सुप्रीम कोर्ट को दखल देना पड़ा. वहीं, झारखंड में ED अफसरों पर मारपीट के आरोप के बाद राज्य पुलिस ने उनके दफ्तर पर जांच के लिए दबिश दी.

बंगाल के बाद अब झारखंड... पुलिस मुकदमों में उलझी ईडी, कैसे मिलेगी राहत?

विवादों में ED का एक्शन.

ईडी आजकल सुर्खियों है. वजह है इसका कुछ राज्यों में रडार पर होना. कहीं भी जब केस मनी लॉन्ड्रिंग का होता है तो यही एजेंसी जांच करती है. इसी एक्शन के चक्कर में ये एजेंसी मुकदमे और विरोध वाला रिएक्शन भी झेल रही है. गुरुवार को दो वजह से इसकी चर्चा तेज रही. एक मामला तो बंगाल में हुई छापामारी से जुड़ा है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट को दखल देना पड़ा. दूसरा मामला झारखंड का है, जहां रांची के ईडी दफ्तर में पुलिस जांच के लिए पहुंच गई. ईडी के अफसरों पर पेयजल विभाग के कर्मचारी से मारपीट का आरोप है. आइए दोनों मसलों को एक-एक कर समझते हैं.

पहले चलते हैं सुप्रीम कोर्ट, जहां ममता बनर्जी बनाम ईडी मामले में तीखी बहस हुई. बंगाल सरकार की तरफ से सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने मोर्चा संभाला तो सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जांच एजेंसी का पक्ष रखा. ये मामला जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्र और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ में सुना गया. सबसे पहले आपको सुनवाई के 5 बड़े पॉइंट बताते हैं.

पहला- ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज FIR पर रोक

  1. दूसरा- ईडी अफसरों के खिलाफ अगली सुनवाई तक कार्रवाई नहीं
  2. तीसरा- राज्य की एजेंसी या पुलिस को इस तरह काम में दखल देने की छूट नहीं. ये गंभीर मुद्दा है.
  3. चौथा- राज्य की एजेंसियों की आड़ में अपराधियों को संरक्षण नहीं मिलना चाहिए.
  4. पांचवां- केंद्रीय एजेंसियों को किसी पार्टी के चुनावी कार्य में दखल देने का अधिकार नहीं.

सरकार और पुलिस को सभी सीसीटीवी, डिवाइस और दस्तावेज सुरक्षित रखने का आदेश दिया गया. साथ ही ममता बनर्जी, डीजीपी और राज्य के कुछ अफसरों को नोटिस जारी किया गया, जिसका जवाब दो हफ्ते में देना है. अगली सुनवाई 3 फरवरी को होगी. कुल मिलाकर देखें तो अदालत ने एजेंसियों के कामकाज में दखल पर गंभीर टिप्पणी की है, जिनमें राज्यों के लिए भी सुझाव है.

किस पक्ष के वकील ने क्या दलील दी

  • एसजी तुषार मेहता ने आरोप लगाया कि ईडी के अफसरों को धमकाया जा रहा है
  • जहां रेड पड़ी वहां सीएम खुद पहुंच गईं और जांच में बाधा डाली
  • मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सारी फाइलें जब्त कर लीं, ये चोरी है
  • उन्होंने एक ईडी अधिकारी का फोन भी ले लिया
  • यहां तक कि बंगाल पुलिस ने राजनीतिक सदस्य की तरह काम किया
  • एक मिसाल कायम करते हुए जो अधिकारी वहां मौजूद थे, उन्हें निलंबित करना चाहिए
  • इस पर जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्र ने पूछा- तो क्या हमें उन्हें निलंबित कर देना चाहिए?
  • फिर एसजी ने जवाब दिया कि सक्षम अधिकारी को कार्रवाई का निर्देश दिया जा सकता है

ईडी वहां किसलिए गई, क्या जांच चल रही थी?

सुनवाई की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि ईडी वहां किसलिए गई थी? क्या जांच चल रही थी? इस पर तुषार मेहता ने कहा कि ईडी कोयला घोटाले की जांच के लिए गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने पूछा क्या कोयला घोटाले की जांच चल रही है? इस पर उन्होंने कहा, हां. कोयले का भुगतान कैश में किया जाता था. लगभग 20 करोड़ कैश I-PAC को ट्रांसफर हुआ. इसलिए 8 जनवरी को कंपनी के 10 ठिकानों में तलाशी ली गई.

एसजी तुषार मेहता ने कलकत्ता हाईकोर्ट में हुए हंगामे की भी चर्चा की. उन्होंने कहा कि हम हाईकोर्ट गए तो बड़ी संख्या में वकीलों को इकट्ठा करके हंगामा करवाया गया, जिसका जिक्र जज ने अपनी टिप्पणी में किया है. एसजी के मुताबिक बकायदा मेसेज भेजकर कहा गया कि कोर्ट को जंतर-मंतर बना दो यानी भीड़ जुटाओ. इस पर जस्टिस मिश्र ने पूछा- क्या वो जंतर-मंतर था?

एसजी ने कहा कि हां, अदालत को जंतर-मंतर में बदल दिया गया था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम इससे बहुत व्यथित हैं कि हाईकोर्ट को सुनवाई नहीं करने दी गई. इस पर बंगाल सरकार के वकील कपिल सिब्बल ने विरोध जताते हुए कहा कि कोर्ट को सही जानकारी नहीं दी गई है. मुख्यमंत्री द्वारा सभी उपकरण जब्त करने का आरोप झूठा है.

बंगाल में चुनाव IPAC करवाता है या चुनाव आयोग?

सिब्बल ने कहा कि बंगाल में चुनाव का जिम्मा IPAC के पास है. पार्टी ने 2021 में इस फर्म के साथ कॉन्ट्रैक्ट किया था. हमारा मानना ​​है कि ईडी को इसकी जानकारी है. इस पर जस्टिस मिश्र ने सवाल किया कि पश्चिम बंगाल में चुनाव IPAC करवाता है या चुनाव आयोग? क्या ये वही IPAC है जिससे पहले प्रशांत किशोर जुड़े थे? सिब्बल ने दलील दी कि IPAC के पास कई तरह के आंकड़े रखे जाते हैं. चुनाव के बीच में ईडी को वहां जाने की क्या जरूरत थी?

सिब्बल के मुताबकि, जिस कोयला घोटाले की जांच को लेकर रेड का दावा किया गया उस केस में आखिरी बयान 24 फरवरी, 2024 को दर्ज किया गया था. तब से एजेंसी क्या कर रही थी? सुप्रीम कोर्ट ने सिब्बल को भरोसा दिया कि पार्टी के कागजात जब्त करने के आरोपों की भी जांच होगी. मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने कोलकाता में IPAC दफ्तर और उसके डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर पर पिछले हफ्ते छापामारी की थी लेकिन इसी दौरान ममता बनर्जी के वहां पहुंचने से हंगामा खड़ा हो गया था.

बंगाल के बाद अब झारखंड में ED की चर्चा

बंगाल सरकार बनाम ईडी विवाद अभी थमा भी नहीं कि झारखंड में नई लड़ाई शुरू हो गई. यहां भी एक तरफ ईडी और दूसरी तरफ राज्य की पुलिस है. रांची में ईडी के रीजनल ऑफिस पर पुलिस रेड करने पहुंची. एजेंसी को दो अफसरों पर पेयजल विभाग के एक कर्मचारी संतोष से मारपीट का आरोप है, जिनके खिलाफ एयरपोर्ट थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है.

दो दिन पहले पेयजल विभाग से जुड़े के एक मामले में आरोपी अफसरों ने संतोष कुमार से पूछताछ की थी. इल्जाम है कि इसी दौरान उससे मारपीट की गई. ईडी ने इस मामले में हाईकोर्ट का रुख किया है जहां शुक्रवार को सुनवाई हो सकती है. मगर, झारखंड पुलिस के एक्शन पर राजनीतिक रिएक्शन शुरू हो गया है. बीजेपी कह रही है झारखंड सरकार बदले की भावना से काम कर रही है.

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