साइबर सिक्योरिटी अब कचरे से भी निपट रही है!
मैं उन्हें ‘लिटर वॉरियर्स’ कहता हूं, क्योंकि इनमें से हर एक मॉर्निंग वॉक के दौरान गुजरते वाहनों से फेंके फास्ट फूड कंटेनर के 100 टुकड़े उठाता है। उनमें से कुछ जमी हुई सड़क से एक-एक टुकड़ा निकालते हैं, कुछ फोटो लेते हैं और उन्हें एआई पावर्ड टूल में अपलोड करते हैं। यह टूल लोकेशन, कचरे का प्रकार और उस फास्ट फूड आउटलेट का नाम दर्ज करता है, जहां से वह आया है।
इंग्लैंड के ग्रामीण इलाकों में चल रहे इस प्रयोग के दौरान लिटर वॉरियर्स ने पाया कि ज्यादातर कचरा मैकडॉनल्ड्स और कोस्टा कॉफी के उन आउटलेट्स से आया है, जो प्रोटेक्टेड नेशनल लैंडस्केप से कई मील दूर हैं।
कचरे के बैग भरते हुए वे पूरा एक थैला बिना खाए हुए बिग मैक, चीजबर्गर, नगेट्स और फ्रेंच फ्राइज भी इकट्ठा करते हैं। ये वॉलंटियर्स ‘फास्ट लिटर’ नामक अभियान के साथ इस जंग के अग्रिम मोर्चे में शामिल हैं। यह एक अभियान है, जिसका नाम लोगों द्वारा ग्रामीण इलाकों में, खासकर चलती कार से खाने-पीने की चीजों की पैकेजिंग फेंकने की प्रवृत्ति को देखते हुए रखा गया है।
यूनिवर्सिटी ऑफ ग्लूस्टरशायर के साइबर विशेषज्ञों और स्ट्राउड डिस्ट्रिक्ट काउंसिल के अधिकारियों के साथ मिलकर इस टीम ने आम तौर पर नजरअंदाज की जाने वाली इस समस्या को ‘फास्ट लिटर’ नाम दिया है। अब वे पहला डेटा सेट इकट्ठा कर रहे हैं, ताकि पता चल पाए कि कचरे की समस्या कितनी व्यापक हो चुकी है।
इससे इस कचरे को पैदा करने वाले और फेंके जाने वाले हॉटस्पॉट की पहचान होगी। इससे भविष्य में इन वॉरियर्स को कार्रवाई करने और टारगेटेड एंटी-लिटर कैम्पेन चलाने में मदद मिलेगी। अगले माह आने वाला एआई पावर्ड एप अब नए उभर रहे उपभोक्ता व्यवहार पर फोकस कर रहा है, जो कार में बैठकर खाने और कचरे को कहीं भी या ग्रामीण इलाकों में फेंकने से संबंधित है।
इन वॉरियर्स का मानना है कि एआई की मदद से कचरे की ऐसी गिनती मैकडॉनल्ड्स और कोस्टा कॉफी जैसी कंपनियों पर सफाई का खर्च उठाने का दबाव बनाने में मदद करेगी। साइबर सिक्योरिटी के सीनियर लेक्चरर और इस प्रोजेक्ट के प्रमुख इन्वेस्टिगेटर रिचर्ड कुक ने बीते साल की बैलेंस शीट के हवाले से कहा कि ‘फास्ट फूड सबसे ज्यादा मुनाफे वाला कारोबार है और यूके में मैकडॉनल्ड्स का ऑपरेटिंग प्रॉफिट 11 मिलियन पाउंड से बढ़कर 76 मिलियन पाउंड हो गया था।’
एआई की मदद से उन्होंने ऐसी बारीक जानकारियां भी खोज ली हैं, जो आमतौर पर नजरअंदाज हो जाती हैं। मसलन, इन रेस्तरां की इन-स्टोर डाइनिंग फैसेलिटीज की तुलना में इनके ड्राइव-थ्रू आउटलेट्स की सड़कों पर कचरा कैसे बढ़ता जाता है। कुल 2,680 ड्राइव-थ्रू में से 1,080 अकेले मैकडॉनल्ड्स के हैं और कोस्टा कॉफी तथा स्टारबक्स भी धीरे-धीरे बढ़ रहे हैं।
एआई से खुलासा हुआ है कि कैसे यह कचरा मिट्टी और पूरे इकोसिस्टम में घुल रहा है। डेटा सेट बढ़ने के साथ एआई टूल न सिर्फ लिटर हॉटस्पॉट्स का अनुमान लगा पाएगा, बल्कि कुछ खास इलाकों में अनुमति देने से पहले नगरीय निकायों को भी सोच-विचार करने में मदद करेगा।
कुक के मुताबिक जहां तक कचरे की बात है तो कोई भी इसे लेकर कई लड़ाइयां लड़ सकता है। उन्हें आशा है कि उनका यह प्रोजेक्ट ऐसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के खिलाफ जरूर सफल होगा, जो खुद मुनाफा कमाती हैं और सफाई का जिम्मा नगरीय निकायों पर डाल रही हैं।
ये लिटर वॉरियर्स मानते हैं कि फूड-ऑन-द-गो बिजनेस के लिए एक ‘वॉलंटरी कोड ऑफ प्रैक्टिस’ लागू की जानी चाहिए, जिसमें आउटलेट्स पर एंटी-लिटर साइनेज, परिसर के आसपास रोजाना कचरा उठाने की अनिवार्यता, जागरूकता और सख्त कार्रवाई के प्रावधान होने चाहिए।
दरअसल, मैंने खुद भी एक प्रोजेक्ट किया था कि मैकडॉनल्ड्स ने अमेरिका ही नहीं, बल्कि मुंबई में 1999-2000 में अपना आउटलेट खोलने के बाद कैसे आसपास की सफाई की थी। जब मैं हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री कवर करता था तो वे सबसे जिम्मेदार फास्ट फूड आउटलेट्स में से एक थे।
….अगर आप सच में उस कचरे-गंदगी से छुटकारा पाना चाहते हैं, जो कार में चलते हुए खाना खाने वालों की आदत बन चुका है, तो हमें बड़े पैमाने पर तकनीक की मदद लेनी होगी।
