लेट शादी, असुरक्षित संबंध और किसिंग से कैंसर का खतरा !
कैंसर सिर्फ तंबाकू या गलत खानपान से ही नहीं होता, बल्कि कुछ आम दिखने वाले वायरस भी इसकी जड़ बन सकते हैं। किसिंग, असुरक्षित यौन संबंध, मल्टीपल सेक्स पार्टनर और यहां तक कि लेट शादी या लेट बच्चे करना भी कैंसर के खतरे को बढ़ा सकता है। यह जानकारी मुंबई के टाटा मेमोरियल सेंटर के वरिष्ठ ऑन्कोपैथोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. सुमीत गुजराल ने दी। वे एम्स भोपाल के पैथोलॉजी एवं लैबोरेटरी मेडिसिन विभाग में विशेष अतिथि व्याख्यान देने के लिए गुरुवार को आए।
डॉ. गुजराल के अनुसार, एचपीवी, एपस्टीन-बार, हेपेटाइटिस और एच पाइलोरी जैसे वायरस शरीर में लंबे समय तक रहकर कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं, जो आगे चलकर कैंसर का रूप ले सकता है। यही वजह है कि आज कैंसर सिर्फ उम्र या आदतों की बीमारी नहीं रह गई है।

वायरस कैसे बनते हैं कैंसर की वजह
डॉ. सुमीत गुजराल बताते हैं कि कुछ वायरस शरीर में प्रवेश करने के बाद पूरी तरह खत्म नहीं होते। वे सालों तक शरीर में सुप्त अवस्था में रहते हैं और धीरे-धीरे कोशिकाओं के डीएनए को नुकसान पहुंचाते हैं। जब यह नुकसान लंबे समय तक चलता रहता है, तो कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं, जिसे कैंसर कहा जाता है। कमजोर इम्यून सिस्टम, खराब जीवनशैली और गलत आदतें इस प्रक्रिया को और तेज कर देती हैं।
किसिंग डिजीज से होता है कैंसर
डॉ. सुमीत गुजराल ने कहा कि एपस्टीन-बार वायरस (EBV), जिसे आम भाषा में किसिंग डिजीज कहा जाता है, मुख्य रूप से लार के जरिए फैलता है। किसिंग, एक ही बर्तन का उपयोग या नजदीकी संपर्क से यह वायरस आसानी से फैल सकता है।
यह वायरस दुनिया की करीब 90% आबादी में पाया जाता है। किशोर और युवा उम्र में यह मोनोन्यूक्लियोसिस नाम की बीमारी पैदा करता है, जिसमें तेज थकान, बुखार और गले में खराश होती है।
डॉ. गुजराल के अनुसार, EBV शरीर में जीवन भर बना रह सकता है। कुछ मामलों में यही वायरस हॉजकिन लिंफोमा, बर्किट लिंफोमा और पेट के कैंसर (गैस्ट्रिक कैंसर) का कारण बन सकता है, खासकर तब जब इम्यून सिस्टम कमजोर हो।

मल्टीपल सेक्स पार्टनर से सर्वाइकल कैंसर
एचपीवी यानी ह्यूमन पैपिलोमा वायरस सबसे ज्यादा यौन संपर्क के जरिए फैलता है। मल्टीपल सेक्स पार्टनर होने पर इस वायरस के संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। डॉ. सुमीत गुजराल बताते हैं कि एचपीवी खासतौर पर महिलाओं में सर्विक्स कैंसर का सबसे बड़ा कारण है। इसके अलावा यह गले, मुंह और जननांगों के कैंसर से भी जुड़ा हुआ है।
अच्छी बात यह है कि एचपीवी से बचाव के लिए वैक्सीन उपलब्ध है। समय पर टीकाकरण और सुरक्षित यौन व्यवहार से इस कैंसर को काफी हद तक रोका जा सकता है।
हेपेटाइटिस से लिवर कैंसर का साइलेंट खतरा
हेपेटाइटिस वायरस खासतौर पर लिवर को नुकसान पहुंचाता है। इसके पांच प्रकार होते हैं, जिनमें हेपेटाइटिस B और C सबसे खतरनाक माने जाते हैं। ये वायरस संक्रमित खून, असुरक्षित इंजेक्शन और यौन संपर्क से फैलते हैं।
डॉ. गुजराल बताते हैं कि लंबे समय तक हेपेटाइटिस B या C से संक्रमित रहने पर लिवर सिरोसिस और बाद में लिवर कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। कई बार मरीज को शुरुआत में कोई लक्षण नहीं दिखते, इसलिए यह बीमारी साइलेंट किलर बन जाती है। हेपेटाइटिस B के लिए वैक्सीन उपलब्ध है, जबकि C के लिए आधुनिक इलाज मौजूद है।
एच पाइलोरी से पेट का कैंसर
एच पाइलोरी एक बैक्टीरिया है, जिसे आम तौर पर वायरस कहा जाता है, और यह पेट में संक्रमण पैदा करता है। यह दूषित भोजन और पानी के जरिए शरीर में प्रवेश करता है। लंबे समय तक यह संक्रमण रहने पर पेट में सूजन, अल्सर और गैस्ट्रिक कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
डॉ. गुजराल के अनुसार, समय पर जांच और एंटीबायोटिक इलाज से इस संक्रमण को खत्म किया जा सकता है और कैंसर के खतरे को कम किया जा सकता है।
लेट शादी और लेट बच्चे करना बढ़ाता है खतरा
डॉ. सुमीत गुजराल का कहना है कि लेट शादी करना और लेट बच्चे करना शरीर की प्राकृतिक फिजियोलॉजी के खिलाफ जाता है। महिलाओं में लंबे समय तक हार्मोनल बदलाव होते रहते हैं, जिससे ब्रेस्ट और ओवरी कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।
अगर महिला ने बच्चे को जन्म नहीं दिया या ब्रेस्टफीडिंग नहीं की, तो कैंसर का रिस्क बाकी आबादी की तुलना में अधिक देखा गया है। यही वजह है कि आज शहरी जीवनशैली में कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं।
आगे बुजुर्गों को होने वाले कैंसर ज्यादा होंगे
डॉ. गुजराल बताते हैं कि आने वाले समय में ओल्ड एज कैंसर बढ़ेंगे, जिनमें प्रोस्टेट और लिवर कैंसर प्रमुख होंगे। इन कैंसरों को कंट्रोल किया जा सकता है, लेकिन पूरी तरह ठीक करना मुश्किल होता है। वहीं बच्चों में कैंसर का इलाज अब काफी हद तक संभव हो गया है, बशर्ते बीमारी समय पर पकड़ में आ जाए।

एमपी के इन जिलों से सबसे ज्यादा मरीज
एम्स भोपाल के आंकड़ों के अनुसार, हर साल 36 हजार से ज्यादा कैंसर मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। इनमें से करीब 60% मरीज भोपाल के बाहर के हैं। सबसे ज्यादा केस आगर मालवा (3664), रायसेन (1776), विदिशा (1536), नर्मदापुरम (1216), सागर (1072), रीवा (944) जैसे जिले टॉप पर हैं।

