दिल्लीशिक्षा

इंडिया गेट पर क्यों फिदा?

 ट्रंप दिल्ली के इंडिया गेट पर क्यों फिदा? 10 खूबियां जिसने इसे बनाया खास

Donald Trump praises India Gate: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दिल्ली के इंडिया गेट की तस्वीर शेयर करते हुए इसे शानदार बताया है. इसके साथ ही अमेरिका की आज़ादी की 250वीं वर्षगांठ के मौके पर वाशिंगटन में Independence Arch बनाने की बात भी लिखी. जानिए, आखिर ट्रंप को क्यों भाया इंडिया गेट, क्या हैं इसकी 10 खूबियां जिसने इसे बनाया खास.

नई दिल्ली का इंडिया गेट सिर्फ पत्थर का एक विशाल मेहराब नहीं, बल्कि भारत के सैन्य इतिहास, औपनिवेशिक दौर और आधुनिक राष्ट्र भावना, तीनों का प्रतीक है. हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इंडिया गेट की तस्वीर अपने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर शेयर करते हुए इसे बेहद शानदार बताया और घोषणा की कि वे वॉशिंगटन डी.सी. में इससे भी भव्य मेहराब बनवाना चाहते हैं.

उन्होंने अमेरिका की आज़ादी की 250वीं वर्षगांठ से जुड़े समारोह की तैयारियों के संदर्भ में बातचीत करते हुए वाशिंगटन में एक Independence Arch निर्माण की बात अपनों से की. इस चर्चा के बाद ट्रम्प ने इंडिया गेट की तस्वीर अपने सोशल मीडिया पर साझा की. इसकी शान में लिखा भी और फिर पीएम नरेंद्र मोदी से बातचीत भी की.

इंडिया गेट: औपनिवेशिक स्मारक से राष्ट्रीय प्रतीक तक

इंडिया गेट का मूल नाम ऑल इंडिया वॉर मेमोरियल था. यह प्रथम विश्व युद्ध (19141918) और 1919 के अफ़गान युद्ध में शहीद हुए ब्रिटिश भारतीय सैनिकों की याद में बनाया गया. 10 फरवरी 1921 को ड्यूक ऑफ कॉनॉट (रानी विक्टोरिया के पुत्र) ने इसका शिलान्यास किया. स्मारक के डिज़ाइनर थे सर एडविन लुटियंस, वही वास्तुकार जिन्होंने नई दिल्ली का मास्टर प्लान तैयार किया और यूरोप भर में कई युद्ध स्मारक बनाए. लगभग दस वर्ष बाद, 12 फरवरी 1931 को तत्कालीन वॉयसराय लॉर्ड इरविन ने इसे जनता के लिए आधिकारिक रूप से समर्पित किया. उसी वर्ष जब नई दिल्ली को भारत की राजधानी के रूप में औपचारिक मान्यता मिली.

ब्रिटिश साम्राज्य के आधिकारिक युद्ध स्मारक के रूप में बना यह स्मारक आज स्वतंत्र भारत की राष्ट्रीय अस्मिता से जुड़ चुका है. स्वतंत्रता के बाद इसे अनाम शहीद के प्रतीक के रूप में भी देखा जाने लगा और 1971 के बाद इसकी पहचान और गहरी हो गई.

डिज़ाइन, बनावट और प्रेरणा

इंडिया गेट एक विशाल सैंडस्टोन (बालू पत्थर) का मेहराब है, जिसकी कुल ऊंचाई लगभग 42 मीटर (लगभग 138 फीट) है. इसका स्थापत्य कई स्रोतों से प्रेरित माना जाता है. समग्र रूप में यह पेरिस के Arc de Triomphe जैसा दिखता है, जहां से विजय तोरण शैली की प्रेरणा स्पष्ट झलकती है. कुछ विद्वान इसे महाबलीपुरम के मंडपों और दक्षिण भारतीय पवेलियनों की प्रेरणा से भी जोड़ते हैं, जो भारत की प्राचीन स्थापत्य परंपरा का सूक्ष्म संकेत है.

India Gate 10 Point To Know

लुटियंस ने इसे लाल भरतपुर पत्थर के मज़बूत आधार पर चरणबद्ध तरीके से ऊपर उठता हुआ डिज़ाइन किया है, जो धीरे धीरे पतली होती मेहराब में बदलता है. स्मारक की दीवारों पर भारतीय सैनिकों के नाम उकेरे गए हैं, जिन्होंने प्रथम विश्व युद्ध और 1919 के अफ़गान युद्ध में प्राण न्यौछावर किए. अनुमानित रूप से लगभग 70 हजार भारतीय सैनिकों को यह स्मारक समर्पित है. इनमें से 13 हजार से अधिक के नाम मेहराब पर खुदे हैं.

अमर जवान ज्योति भारत के वीरों को आधुनिक श्रद्धांजलि

इंडिया गेट के ठीक नीचे स्थित अमर जवान ज्योति ने इस स्मारक को नए भारत की सैन्य परंपरा से जोड़ दिया. 1971 के भारत पाक युद्ध और बांग्लादेश की मुक्ति के बाद, शहीद भारतीय सैनिकों की स्मृति में यह स्थायी ज्योति 26 जनवरी 1972 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा राष्ट्र को समर्पित की गई. काली संगमरमर की चबूतरे पर उल्टी रखी राइफल (L1A1 सेल्फ लोडिंग राइफल) और उसके ऊपर सैनिक का हेलमेटयह दृश्य अनाम शहीद की सार्वभौमिक छवि बन चुका है.

चबूतरे के चारों तरफ़ ज्वाला से भरे कलश (अब पर्यावरण हितैषी गैस से संचालित) जलते रहते हैं और हर दिशा में सुनहरे अक्षरों में अमर जवान लिखा है. यहीं पर गणतंत्र दिवस और अन्य राष्ट्रीय अवसरों पर प्रधानमंत्री और सैन्य प्रमुख श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं. इससे इंडिया गेट सिर्फ औपनिवेशिक स्मारक न रहकर स्वतंत्र भारत के शहीदों का तीर्थ बन गया है.

Amar Jawan Jyoti

अमर जवान ज्योति.

इंडिया गेट ने ट्रंप को क्यों आकर्षित किया?

डोनाल्ड ट्रंप ने इंडिया गेट की तस्वीर साझा करते हुए लिखा कि यह बहुत सुंदर विजय मेहराब है और वे अमेरिका में इससे भी भव्य संरचना बनवाना चाहते हैं. इसके पीछे कई कारण दिखते हैं.

  • भव्यता और स्केल: खुले कर्तव्य पथ (राजपथ) के बीच, हरे भरे लॉन और दूर तक जाती सीधी सड़क के बीच खड़ा 42 मीटर ऊँचा यह स्मारक किसी भी नेता या वास्तुकार को भव्य राष्ट्रीय प्रतीक की प्रेरणा देता है.
  • राष्ट्रीय उत्सव से जुड़ाव: इंडिया गेट के सामने होने वाली गणतंत्र दिवस परेड अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जानी पहचानी छवि है. ट्रंप इसी तरह अमेरिका की 250वीं स्वतंत्रता वर्षगांठ के लिए एक स्थायी प्रतीक देखना चाहते हैं.
  • विजय तोरण की अंतरराष्ट्रीय परंपरा: रोम, पेरिस, बर्लिन जैसे शहरों में भी विजय मेहराब हैं. इंडिया गेट इस परंपरा की आधुनिक कड़ी है. ट्रंप जिस Independence Arch की परिकल्पना कर रहे हैं, वह इसी वैश्विक श्रेणी में शामिल होना चाहता है.
  • राजनयिक संदेश: भारत के एक लोकप्रिय और पहचाने जाने वाले स्मारक की प्रशंसा कर के ट्रंप, भारत अमेरिका संबंधों की निकटता और प्रधानमंत्री मोदी के साथ निजी रिश्तों का राजनीतिक संदेश भी देते हैं.

यही कारण है कि भारत की राजधानी के इस स्मारक ने अमेरिका की राजधानी के लिए बनने वाले प्रस्तावित स्मारक की कल्पना को दिशा दी.

इंडिया गेट से जुड़ी 10 रोचक बातें

  1. मूल नाम और प्रयोजन: पहले इसे All India War Memorial कहा जाता था और इसका उद्देश्य ब्रिटिश भारतीय सेना के उन सैनिकों को याद करना था जो प्रथम विश्व युद्ध और 1919 के अफ़गान युद्ध में मारे गए.
  2. डिज़ाइनर सर एडविन लुटियंस: इंडिया गेट के वास्तुकार लुटियंस न सिर्फ़ नई दिल्ली के प्रमुख नियोजक थे, बल्कि उन्होंने यूरोप में लगभग 66 युद्ध स्मारक भी डिज़ाइन किए, जिनमें लंदन का प्रसिद्ध Cenotaph शामिल है.
  3. ऊंचाई और संरचना: यह स्मारक लगभग 42 मीटर (138 फ़ीट) ऊंचा है. लाल और हल्के भूरे सैंडस्टोन से बनी यह मेहराब एक मजबूत चौकोर आधार से ऊपर उठती हुई पतले होते आर्च में बदलती है, जिससे दूर से देखने पर यह अत्यंत संतुलित व आकर्षक दिखती है.
  4. शहीदों के नामों की अमर गूंज: इंडिया गेट की दीवारों पर लगभग 13 हजार से ज्यादा भारतीय सैनिकों के नाम अंकित हैं. ये वे जवान हैं जो फ्रांस, मेसोपोटामिया, फारस, पूर्वी अफ्रीका, गैलीपोली और अफ़गान सीमा पर विभिन्न मोर्चों पर शहीद हुए.
  5. ब्रिटिश सूर्य की प्रतीकात्मकता: इंडिया गेट की कंगूरों (Cornices) पर उकेरे गए सूर्य के चिह्न ब्रिटिश साम्राज्य के उस दावे का प्रतीक माने जाते थे कि सूरज कभी ब्रिटिश साम्राज्य पर अस्त नहीं होता. आज वही प्रतीक स्वतंत्र भारत के आकाश तले खड़ा है, जो इतिहास के बदलते पहियों की याद दिलाता है.
  6. राजपथ से कर्तव्य पथ तक: इंडिया गेट जिस Ceremonial Axis के पूर्वी सिरे पर स्थित है, उसे पहले किंग्सवे और फिर राजपथ कहा जाता था. अब इसका नाम कर्तव्य पथ है. इस परिवर्तन ने स्मारक की पहचान को और अधिक जनतांत्रिक और नागरिक कर्तव्य से जोड़ दिया है.
  7. इंडिया गेट के नीचे कभी खड़ी थी राजा की मूर्ति: इंडिया गेट के समीप स्थित छतरी (Canopy) में कभी किंग जॉर्ज पंचम की विशाल प्रतिमा थी, जिसे स्वतंत्रता के बाद हटा दिया गया. यह छतरी अब खाली खड़ी है और औपनिवेशिक से स्वदेशी परिवर्तन की मूक गवाह है.
  8. अमर जवान ज्योति की निरंतर लौ: साल 1972 से दशकों तक यहां लगातार जलती रही ज्योति ने इसे सैनिकों के तीर्थ के रूप में स्थापित कर दिया. गणतंत्र दिवस परेड से पहले यहीं शहीदों को सलामी दी जाती है, जिसे देश दुनिया देखती है.
  9. तीनों सेनाओं के ध्वज: इंडिया गेट परिसर में थल सेना, वायु सेना और नौसेना के झंडे प्रमुखता से दिखाई देते हैं. यह स्थान सशस्त्र बलों की संयुक्त भावना और इंटर सर्विस एकता का प्रतीक भी है.
  10. दिल्ली वालों का पसंदीदा पिकनिक स्पॉट: गंभीर ऐतिहासिकता के साथ साथ इंडिया गेट आम लोगों के लिए खुशी, मेल मिलाप और सैर सपाटे की जगह है. आसपास के हरे भरे लॉन, शाम को जगमगाती रोशनी, ठंडी हवा और गर्मियों में खुली हवा में बैठने के लिए यह दिल्ली के सबसे लोकप्रिय स्थलों में से एक है.

एक स्मारक, कई परतें

इंडिया गेट का सफ़र औपनिवेशिक युद्ध स्मारक से शुरू होकर आज स्वतंत्र भारत के गौरव, शहीदों की अमर गाथा और लोकतांत्रिक उत्सवों के केंद्र तक आ पहुंचा है. डोनाल्ड ट्रंप द्वारा इसकी प्रशंसा और इससे प्रेरित Independence Arch की कल्पना यह दिखाती है कि यह स्मारक अब सिर्फ़ भारत की नहीं, बल्कि वैश्विक स्थापत्य और स्मृति संस्कृति का भी हिस्सा बन चुका है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *