ग्वालियर-इटावा हाईवे पर इस दौरान 2700 हादसे और 857 की मौत ?
ग्वालियर के पुरानी छावनी (अटल गेट) से गोले का मंदिर होते हुए भिंड-इटावा तक जाने वाला हाईवे अब राहगीरों के लिए ‘यमराज का रास्ता’ बन चुका है। जिस सड़क को फोरलेन करने की घोषणा केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने 2022 में की थी, वह चार साल बाद भी सरकारी दफ्तरों की एक टेबल से दूसरी टेबल तक झूला झूल रही हैं। नतीजा यह है कि इस दौरान 2706 हादसे हुए और 857 परिवारों के चिराग बुझ गए और 3 हजार से ज्यादा राहगीर घायल हुए हैं। इस हाइवे पर हाल ही में शुक्रवार को ग्वालियर के बरेठा में एक हादसे में 4 लोगों की मौत हुई है।
अफसोस की बात यह है कि जब भी काम शुरू होने की उम्मीद जगती है, कोई न कोई नया पेंच फंस जाता है। ताजा अपडेट यह है कि अब इस प्रोजेक्ट से एमपीआरडीसी को हटाकर एनएचएआई को काम सौंपा गया है। यानी अब तक की सारी कागजी कार्यवाही शून्य हो गई है और नई एजेंसी फिर से नए सिरे से प्रक्रिया शुरू करेगी।
4 साल… नेता व अफसरों के अड़ंगों के कारण ऐसे उलझता गया प्रोजेक्ट
- 2022 (उम्मीद): केंद्रीय मंत्री गडकरी ने ग्वालियर में घोषणा की- ‘जल्द बनेगा इटावा हाइवे’।
- 2023 (सुस्ती): मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) के अफसर समय पर DPR नहीं बना पाए। काम ठंडे बस्ते में चला गया।
- 2024 (ब्रेक): मंत्रालय ने पुराने चौड़ीकरण को रोककर ‘नया हाइवे’ (बरेठा से) बनाने का प्रस्ताव मांगा। जिससे काम शुरू ही नहीं हो पाया।
- 2025 (सियासत): भिंड के नेताओं (सांसद और मंत्री) ने नए हाइवे का विरोध किया। भारी रस्साकशी के बाद नया प्रस्ताव फाड़कर रद्दी में डाल दिया गया।
- 2026 (शून्य): एमपीआरडीसी को प्रोजेक्ट से बाहर किया गया, अब जिम्मेदारी एनएचएआई को मिली।

प्रोजेक्ट NHAI को दे दिया है
ग्वालियर-इटावा हाइवे को लेकर हमारी प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी। जिसे केंद्र ने अब एनएचएआई से कराने का निर्णय लिया है। आदेश मिलने के बाद हमने प्रोजेक्ट एनएचएआई को सौंप दिया है। -आरके मेहरा, ENC/MPRDC
विभागीय प्रक्रिया चल रही है
ग्वालियर-इटावा हाइवे को एनएचएआई द्वारा तैयार किया जाएगा। हमें इसकी अधिकृत सूचना मिल गई है। विभागीय प्रक्रिया पूरी होते ही हम प्रोजेक्ट पर काम करेंगे। – प्रशांत मीणा, मैनेजर NHAI

