अपने ही वजन से क्यों नहीं डूबती पनडुब्बी, जानें क्या है इसके पीछे का साइंस !!!
अपने ही वजन से क्यों नहीं डूबती पनडुब्बी, जानें क्या है इसके पीछे का साइंस
पनडुब्बियां काफी भारी होती हैं लेकिन इसके बावजूद भी वह पानी के अंदर नहीं डूबती. आइए जानते हैं क्या है इसके पीछे की वजह.
पहली नजर में ऐसा लगभग नामुमकिन लग सकता है कि जब एक छोटी सी लोहे की सुई भी पानी में डूब जाती है तो हजारों टन वजन वाली पनडुब्बी आराम से सतह पर कैसे तैर सकती है. इसके पीछे का कारण सिर्फ जादू या फिर एडवांस्ड मटीरियल नहीं है बल्कि एक बेसिक फिजिक्स है.
पनडुब्बी क्यों तैर सकती है
इसके पीछे आर्किमिडीज का सिद्धांत है. यह सिद्धांत कहता है कि पानी में रखी किसी भी वस्तु पर ऊपर की तरफ एक बल लगता है जो उसके द्वारा विस्थापित पानी के वजन के बराबर होता है. जब एक पनडुब्बी सतह पर होती है तो उसकी कुल डेंसिटी समुद्री पानी की डेंसिटी से कम रखी जाती है.
हालांकि पनडुब्बी काफी भारी होती है लेकिन इसकी खोखली संरचना और अंदर हवा भरे डिब्बे इसके आयतन को काफी बढ़ा देते हैं. क्योंकि यह बड़ी मात्रा में पानी विस्थापित करती है इस वजह से ऊपर की तरफ लगने वाला उत्प्लावन बल इसके वजन को संतुलित करता है. यही वजह है कि यह डूबने के बजाय तैरती रहती है.
पनडुब्बी लोहे की तरह अपने आप क्यों नहीं डूबती
लोहे की सुई इस वजह से डूब जाती है क्योंकि उसकी डेंसिटी पानी से कहीं ज्यादा होती है और वह अपने वजन के हिसाब से काफी कम पानी विस्थापित करती है. दूसरी तरफ एक पनडुब्बी अपने मास यानी द्रव्यमान को काफी बड़े आयतन में फैलाती है. जब तक पनडुब्बी की औसत डेंसिटी पानी से कम रहती है तब तक वह अपने भारी वजन के बावजूद तैरती रहती है.
गोता लगाने और सतह पर आने का रहस्य
एक पनडुब्बी का असली कंट्रोल सिस्टम उसके बैलास्ट टैंक में होता है. यह टैंक तय करता है कि पनडुब्बी डूबेगी, तैरेगी या फिर एक निश्चित गहराई पर रहेगी. जब तक पनडुब्बी को गोता लगाना होता है तो इस टैंक के वाल्व खोल दिया जाते हैं. इससे समुद्री पानी अंदर आ जाता है. इससे पनडुब्बी का कुल वजन और डेंसिटी बढ़ जाती है. जब सतह पर आने का समय होता है तो इस टैंक में कंप्रेस्ड हवा पंप की जाती है. इससे पानी बाहर निकल जाता है. जैसे ही टैंक हवा से भर जाते हैं पनडुब्बी फिर से हल्की हो जाती है और सतह पर वापस आ जाती है.
इसी के साथ पनडुब्बी हमेशा डूबना या ऊपर आना नहीं चाहती. अक्सर उन्हें नेविगेशन या फिर छिपने के लिए एक खास गहराई पर रहने की जरूरत होती है. ऐसे मामले में पनडुब्बी का वजन ठीक उतना ही होता है जितना कि उसके द्वारा विस्थापित पानी का वजन. टैंक में पानी और हवा की मात्रा को ध्यान से एडजस्ट करके इंजीनियर यह पक्का करते हैं कि पनडुब्बी ना तो डूबे और ना ही तैरे.

