अब एपस्टीन रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से बात करना चाहता था। 24 जून 2018 को एपस्टीन ने नॉर्वे के नेता थोरब्योर्न जगलैंड को ईमेल किया और लिखा कि आप पुतिन से कह सकते हैं कि लावरोव मुझसे बात कर सकते हैं, क्योंकि पहले यह काम विटाली चुर्किन किया करते थे, लेकिन अब वह मर गए हैं। जगलैंड ने जवाब दिया कि वह अगले सोमवार लावरोव के सहायक से मिलेंगे और यह सुझाव देंगे।
एपस्टीन ने जवाब दिया, ‘चुर्किन बहुत अच्छे थे। हमारी बातचीत के बाद उन्होंने ट्रंप को समझ लिया था। इसमें कोई जटिलता नहीं है। उन्हें दिखना चाहिए कि उन्होंने कुछ हासिल किया, बस इतनी सी बात है।’
जारी किए गए नए दस्तावेजों में क्या है?
पहले पता चला था कि एपस्टीन रूस और पूर्वी यूरोप के अन्य हिस्सों से मॉडल खोजने में रुचि रखते थे। वहीं अब हाल ही में जारी हुए दस्तावेज बताते हैं कि उन्होंने रूस के उच्च अधिकारियों से कई बार मिलने या बात करने की कोशिश की, जिनमें पुतिन भी शामिल हैं। हाल ही में जारी हुए नए दस्तावेजों ने उनके इरादों पर नई अटकलें पैदा कर दी हैं। इन नए दस्तावेजों में एपस्टीन की अंतरराष्ट्रीय नेताओं और रूस के अधिकारियों से बातचीत दिखाई गई है।
पोलैंड के प्रधानमंत्री टस्क ने क्या कहा?
पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने इस हफ्ते कैबिनेट बैठक में कहा कि उनका देश एपस्टीन के रूस की खुफिया एजेंसियों से संभावित संबंधों की जांच करेगा। टस्क ने कहा, ज्यादा सुराग, ज्यादा जानकारी और वैश्विक मीडिया में ज्यादा टिप्पणियां इस शक से जुड़ी हैं कि यह अभूतपूर्व बाल यौन शोषण घोटाला रूस की खुफिया सेवाओं के सहयोग से किया गया था।
टस्क ने कहा, मुझे आपको यह बताने की जरूरत नहीं कि रूस की खुफिया एजेंसियों द्वारा इस ऑपरेशन में संभावित भागीदारी पोलैंड की सुरक्षा के लिए कितनी गंभीर हो सकती है। इसका केवल यही मतलब है कि उनके पास आज भी कई सक्रिय नेताओं के खिलाफ संवेदनशील जानकारी हो सकती है।
क्रेमलिन ने क्या कहा?
क्रेमलिन ने इस दावे को खारिज कर दिया कि एपस्टीन रूस के लिए जासूस था। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा, एपस्टीन को रूस की खुफिया एजेंसियों के नियंत्रण में था, इस तरह के अटकलों को किसी भी तरह से लिया जा सकता है। लेकिन इसे गंभीरता से नहीं लेना चाहिए। पेस्कोव ने यह भी कहा कि पत्रकारों को एपस्टीन के रूस की खुफिया एजेंसियों से जुड़े होने के आरोपों की जांच में अपना समय बर्बाद नहीं करना चाहिए।
विश्लेषकों ने सीएनएन को बताया कि ये दस्तावेज बस यही दिखाते हैं कि एपस्टीन प्रभावशाली लोगों से घुलने-मिलने और खुद को एक तरह का वैश्विक ताकतवर खिलाड़ी साबित करने की कोशिश कर रहा था। दस्तावेजों में यह नहीं बताया गया है कि एपस्टीन आखिरकार रूसी नेता से मिल पाया या नहीं।
दस्तावेजों के अनुसार, 9 मई 2013 को एपस्टीन ने इस्राइल के पूर्व प्रधानमंत्री एहूद बराक को एक ईमेल लिखा। इसमें उसने बताया कि थोरब्योर्न जगलैंड 20 मई को सोची में पुतिन से मिलने जा रहे हैं और जगलैंड ने उससे पूछा है कि क्या वह रूसी राष्ट्रपति से मिलने के लिए उपलब्ध रहेगा। इस मुलाकात का मकसद यह बताना था कि रूस पश्चिमी निवेश को बढ़ावा देने के लिए सौदों को किस तरह से तैयार कर सकता है। एपस्टीन ने उसी ईमेल में बराक को यह भी लिखा, मैं उनसे कभी नहीं मिला, आपको यह बताना चाहता था।
कुछ दिनों बाद 14 मई 2013 को जगलैंड ने एपस्टीन से कहा कि वह उनकी ओर से राष्ट्रपति पुतिन तक यह संदेश पहुंचाने की योजना बना रहे हैं कि एपस्टीन उपयोगी साबित हो सकते हैं। जगलैंड ने एपस्टीन को ईमेल में लिखा, मेरा एक दोस्त है, जो जरूरी कदम उठाने में आपकी मदद कर सकता है और फिर आपको उनसे मिलवाने की बात रख सकता है, ताकि पूछा जा सके कि क्या वह आपसे मिलना चाहेंगे।