मध्य प्रदेश

जनगणना…:हर व्यक्ति को जानकारी देना अनिवार्य…गलत सूचना देने पर तीन साल तक सजा का प्रावधान

जनगणना…:हर व्यक्ति को जानकारी देना अनिवार्य, गलत सूचना देने पर तीन साल तक सजा का प्रावधान

राजधानी सहित पूरे प्रदेश में 1 मई से शुरू हो रही डिजिटल जनगणना में हिस्सा लेना आपके लिए सिर्फ जरूरी नहीं, बल्कि कानूनी अनिवार्यता है। यदि कोई व्यक्ति जानकारी देने से इनकार करता है या गलत तथ्य लिखवाता है, तो जनगणना अधिनियम के तहत उसे 3 साल की जेल या जुर्माना हो सकता है।

पहली बार होने जा रही इस पूरी तरह पेपरलेस गणना के लिए भोपाल में अफसरों की ट्रेनिंग 16 फरवरी से शुरू होगी। भोपाल में डिप्टी कलेक्टर भुवन गुप्ता को इस महाभियान की जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रगणक (सरकारी कर्मचारी) मोबाइल ऐप के जरिए तीन चरणों में मकान, परिवार और व्यक्तिगत जानकारी जुटाएंगे। डेटा रियल-टाइम में सुरक्षित पोर्टल्स पर अपलोड होगा।

जनगणना के दौरान हर 1000 लोगों पर एक प्रगणक तैनात रहेगा, जो घर-घर जाकर जानकारी जुटाएगा। एक मई से प्रगणक पहले मकान की जानकारी दर्ज करेगा। इसके बाद परिवार से जुड़ी जानकारी ली जाएगी। अंत में व्यक्तिगत विवरण दर्ज होगा।

इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी। प्रगणक मोबाइल ऐप के जरिए जानकारी दर्ज करेंगे। डेटा रियल-टाइम में पोर्टल पर अपलोड होगा और प्रक्रिया लगभग पेपरलेस रहेगी। जाति से जुड़ा डेटा भी ऐसे ही अपडेट किया जाएगा।

जनगणना की पूरी ए-बी-सी-डी… जो आपको जानना जरूरी है

1- जनगणना किस तरह और कब से होगी?

जवाब: 1 मई 2026 से डिजिटल जनगणना शुरू होगी। प्रगणक मोबाइल एप से घर-घर जाकर डेटा इकट्ठा करेंगे। ऑफलाइन यह डेटा कलेक्शन किया जाएगा। ऑनलाइन एप के माध्यम से रियल टाइम यह डाटा अपलोड किया जाएगा।

2- मुझे कैसे पता होगा कौन प्रगणक है ?

जवाब: ये सरकारी कर्मचारी होंगे। इनकी पहचान के लिए संबंधित क्षेत्र के तहसीलदार द्वारा तय फॉर्मेट का आईडी कार्ड जारी किया जाएगा। इससे पहचान में आसानी होगी। जनगणना के काम में लगे कर्मचारियों को अलग से मानदेय भी दिया जाएगा।

3- मैं अपनी सभी जानकारी क्यों दूं ? कानून क्या कहता है?

जवाब: जनगणना के लिए जरूरी 33 सवालों के जवाब लिए जाएंगे। साथ ही मकान के सूचीकरण को लेकर जो सवाल-जवाब किए जाएंगे। हर व्यक्ति को जानकारी देना अनिवार्य है। जनगणना अधिनियम 1948 के नियम 1990 की धारा-11 के तहत सभी को जानकारी देना अनिवार्य है।

4- कोई गलत जानकारी दे तो?

जवाब: यदि कोई व्यक्ति गलत जानकारी देता है तो उसके खिलाफ जनगणना अधिनियम 1990 के तहत दंड का प्रावधान किया गया है। गलत जानकारी देने वाले व्यक्ति को 3 साल की कैद या एक हजार रुपए जुर्माना या फिर दोनों ही सजा मिल सकती है।

5- डिजिटल डेटा कितना सुरक्षित रहेगा?

जवाब: आपसे जो भी जानकारी ली जाएगी, वह पूरी तरह से सुरक्षित रहेगी। आपकी जानकारी को किसी व्यक्ति से साझा नहीं किया जाएगा। इसके लिए तीन जगह पर डेटा सेंटर देश में बनाए गए हैं। एक बेंगलुरु, दूसरा लखनऊ और तीसरा नई दिल्ली में।

6- यह डेटा कौन देख सकता है?

जवाब: यह डेटा संबंधित क्षेत्र के अफसर ही देख सकते हैं। बाकी आम लोगों को इसका एक्सेस नहीं दिया जाएगा।

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