नई दिल्ली। नागरिक चार्टर (1997), सार्वजनिक सेवा अधिकार अधिनियम (2011) और मैसूर घोषणा-पत्र (2021) जैसे सुधारों ने ग्राम पंचायत स्तर पर नागरिकों को आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराई हैं, लेकिन बदलते वक्त के साथ अब इनके विस्तार की जरूरत महसूस की जा रही है।

खास तौर पर जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2047 तक भारत को विकसित बनाने का लक्ष्य तय किया है तो गांवों में ईज आफ लि¨वग बढ़ाने को बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दिशा में प्रयासरत पंचायतीराज मंत्रालय ने जब राज्यों की भागीदारी रखते हुए एक केंद्रीय समिति गठित की तो विमर्श-परामर्श की प्रक्रिया में सुधारों को लेकर राज्य काफी उत्सुक नजर आए।

समिति की गठितसमिति ने कोर कामन सर्विस (अनिवार्य सेवाएं) की सूची को जहां 50 तक करने की सिफारिश की है, वहीं राज्यों ने सेवाओं की संख्या 70 से अधिक करने का सुझाव दिया है। पंचायतीराज मंत्रालय इन सिफारिशों-सुझावों के आधार पर ब्लूप्रिंट तैयार कर अब अधिक नागरिक सेवाओं को ग्राम पंचायत स्तर पर अनिवार्य कर सकता है।

पंचायतीराज मंत्रालय ने कर्नाटक सरकार के पंचायतीराज विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव उमा महादेवन की अध्यक्षता में समिति गठित की, जिसमें सदस्य संयोजक के रूप में पंचायतीराज मंत्रालय भारत सरकार के संयुक्त सचिव आलोक प्रेम नागर के अतिरिक्त हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और त्रिपुरा के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।

समिति ने सभी राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों में ग्राम पंचायत स्तर पर नागरिकों को दी जा रही सेवाओं का ब्योरा एकत्र किया। ग्रामरूट लेवल पर सर्विस डिलीवरी का आकलन किया। इसमें पाया गया कि वर्तमान में राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा ग्राम पंचायत स्तर पर कुल 6,600 से अधिक सेवाएं प्रदान की जा रही हैं, लेकिन सेवा कवरेज, डिजिटल ट्रैकिंग और शिकायत निवारण में महत्वपूर्ण भिन्नताएं भी पाई गईं।

इन सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने, एकरूपता लाने और नागरिक-केंद्रित आधारभूत ढांचे की आवश्यकता समझी गई है। प्रदेशों में समिति को राष्ट्रीय आधारभूत मानकों में शामिल करने के लिए राज्य सरकारों से 70 से अधिक सेवा प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिन्हें कोर कामन सर्विसेज शामिल किया जाना चाहिए।

समिति ने दिए सुझाव

इसके आधार पर ही समिति ने सरकार को सौंपी अपनी रिपोर्ट में सिफारिश की है कि नागरिकों की सभी आवश्यकताओं को शामिल करने के लिए कोर कामन सर्विस की सूची सात से बढ़ाकर 50 कर दी जाए।

विस्तारित सूची में प्रमाण पत्र (जन्म, मृत्यु, निवास, जाति, आय, विकलांगता आदि), मनरेगा (अब वीबी-जीरामजी) संबंधी सेवाएं, राशन कार्ड सेवाएं, पंजीकरण परिवर्तन, जल आपूर्ति कनेक्शन, पेंशन, संपत्ति कर, श्रमिक पंजीकरण और चुनिंदा सार्वजनिक अवसंरचना रखरखाव संबंधी विभिन्न प्रमाण-पत्रों या अनुमतियों के अनुरोध शामिल हैं।

इसके साथ ही समिति ने सुझाव दिया है कि सेवाओं को दो भागों में बांटा जाए। एक कोर कामन सर्विसेज, जो कि अनिवार्य, आवश्यक, समयबद्ध और राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हों। दूसरी आकांक्षी सेवाएं हों।

यह ऐसी सेवाएं हों, जिन्हें पंचायतें क्षमता वृद्धि के रूप में अपना सकती हैं, जैसे कि व्यापार लाइसेंस जारी करना, स्वयं सहायता समूह-सहकारी समिति का पंजीकरण, प्रधानमंत्री विश्वकर्मा आइडी, कृषि संबंधी लाइसेंस, आंगनबाड़ी नामांकन आदि।

इन सेवाओं पर अधिक जोरनिवास प्रमाण पत्र- नागरिकों की पहचान और निवास सत्यापन को सुव्यवस्थित करने के लिए।व्यापार लाइसेंस- उद्यमिता और स्थानीय व्यापार अनुपालन को बढ़ावा देने के लिए।भूमि अभिलेखों का परिवर्तन- संपत्ति संबंधी सेवाओं में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने के लिए।

जल आपूर्ति कनेक्शन- बुनियादी ढांचे को बेहतर करने और जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए।सामाजिक सुरक्षा एवं पेंशन योजनाएं- बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांग नागरिकों जैसे कमजोर समूहों की जरूरतों को पूरा करने के लिए।