चले थे शहरी बनने गांव से बूरा हाल हो गया ….. लखनऊ नगर निगम की सीमा में शामिल 88 गांव की स्थिति पहले भी ज्यादा खराब हो गई, 2500 सफाई कर्मचारी की जरूरत
नगर निगम की सीमा में 88 गांव को शामिल किया गया था। करीब एक साल होने को है लेकिन इन गावों की स्थिति पहले से भी ज्यादा खराब हो चली है। यहां सफाई, सीवर, जल निकासी, स्ट्रीट लाइट और सड़क संबंधित सभी काम नहीं हो पाया है। नगर निगम की सीमा में आने के बाद अब यहां पंचायतीराज विभाग भी काम नहीं करवा रहा है। इसकी वजह से करीब ढ़ाई लाख से ज्यादा की आबादी का जीना दूभर हो गया है।
यहां के लोगों का कहना है कि अब वह लोग न शहर के रहे न पंचायत के। ऐसे में कोई भी सुविधा उनको नहीं मिल रही है। सिकरौरी गांव के रहने वाले वसी अहमद बताते है कि उनके गांव में चारों तरफ गंदगी पड़ी है। पहले कम से कम सफाई तो हो जाती थी लेकिन अब ऐसा कुछ नहीं हो रहा है। उन्होंने गांव में 6000 की आबादी है। 500 सौ से ज्यादा परिवार है। हर परिवार अभी परेशान है। दिक्कत यह है कि इन गांवों में कोई जनप्रतिनिधि भी नहीं रह गया है। इसकी वजह से इनकी बात भी उचित मंच तक नहीं पहुंच पा रही है।
लाइट और हाई मास्ट तक नहीं लग पाए
तय हुआ था कि हर गांव में नगर निगम की ओर से 10 स्ट्रीट लाइट लगाया जाएगा। इस दौरान हर गांव में एक हाई मास्ट भी लगना था। लेकिन यह काम भी शुरू नहीं हो पाया। भुगताान न होने की वजह से शहर में पहले से शामिल इलाकों को ईईएसएल ने लाइट देने से मना कर दिया। ऐसे में इन 88 गांव में कोई सुनवाई नहीं हो पाई। इन गांवों में 20 हजार से ज्यादा स्ट्रीट लाइट लगाने की जरूरत है। लेकिन फिलहाल के 880 भी नहीं मिल पा रहा है। स्ट्रीट लाइटों के लिए छह करोड़ रुपए का बजट मांगा गया था। जानकारों का कहना है कि वह अभी तक नहीं मिल पाया है। हर गांव में बड़े चौराहे पर एक हाईमास्ट लगाने की तैयारी थी। स्ट्रीट लाइटों की देखभाल के लिए नियुक्त किए जाने वाले कर्मचारियों के वेतन पर प्रतिवर्ष 2.33 करोड़ रुपए खर्च होना था। इसके अलावा स्ट्रीट लाइट व हाईमास्ट की फिटिंग पर 3.75 करोड़ व बिजली के कनेक्शन पर 12 लाख रुपए खर्च होने का प्रस्ताव बना। लेकिन मामला प्रस्ताव से आगे नहीं बढ़ पाया।
नगर आयुक्त से लेकर मेयर तक कोई नहीं सुनता
लखनऊ जनकल्याण महासमिति इसको लेकर संघर्ष कर रही है। समिति के उमाशंकर दुबे ने बताया कि 88 गांव के लिए 2,500 कर्मचारी होने की बात की जा रही है। लेकिन सप्ताह गुजरने के बाद भी गांव में कोई झाड़ू लगाने के लिए नहीं आ रहा है। ऐसे में यह एक बड़े स्तर का भ्रष्टाचार है। कागजों में 2500 सफाई कर्मी लगाकर सफाई का दावा किया जा रहा लेकिन नगर निगम से किसी गांव में कोई सफाई कर्मचारी नहीं आता। उन्होंने कहा कि इसको लेकर नगर आयुक्त से लेकर मेयर तक से गुहार लगाई गई लेकिन कोई सुनता नहीं है। अब इन गांव के लोग कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं।
इन गांवों का करना था विकास, यह गांव शामिल हुए
मौरा, जेहटा, सैंथा, अलीनगर, धैला, अल्लूनगर डिगुरिया, मुतक्कीपुर, रायपुर, नौबस्ता कलां, धावा, गणेशपुर रहमानपुर, सेमरा, उत्तरधौना, शाहपुर, सरायशेख, टेरा खास, निजामपुर मल्हौर, लौलाई, हासेमऊ, भरवारा (अवशेष), खरगापुर, भैसोरा, लानापुर, चन्दियामऊ, मकदूमपुर, मलेसेमऊ, बाघामऊ, नरौना, सलेमपुर पतौरा, सिकरौरी, लालनगर, सराय प्रेमराज, महिपतमऊ, ककौली, हुसेड़िया (अवशेष), सरसवां, अरदौनामऊ, अहमामऊ, हरिहरपुर, मलाक, मुजफ्फरपुर घुसवल, यूसुफनगर उर्फ बगियामऊ, निजामपुर मझिगवां, देवामऊ, सेवई, घुसवल कलां, बरौली खलीलाबाद (अवशेष), कल्ली पश्चिम, अशरफनगर, रसूलपुर इठुरिया, बिजनौर, नटकुर, मीरानपुर पिवट, अनौरा (अवशेष), कलिया खेड़ा, सदरौना, अमौसी (अवशेष), अलीनगर सुनहरा (अवशेष), सरोसा भरोसा, हसनपुर खेवली, अलीनगर खुर्द, बिरूरा, बरौना, नरहरपुर, तिवारीपुर, भिठौली खुर्द, मोहिद्दीनपुर, खरगपुर जागीर, सैदपुर जागीर, मिर्जापुर, सरूलपुर कायस्थ, अजनहर कलां, मिश्रपुर, गुडम्बा, बरखुरदारपुर, अधारखेड़ा, बसहा, दसौली, मोहम्मदपुर मजरा, रसूलपुर सादात, गोयला, चक कजेहरा, माढ़रमऊ कलां, माढ़रमऊ खुर्द, सोनई कजेहरा, हरिकशगढ़ी, पुरसेनी, मस्तेमऊ।
यह भी जाने
– 310 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र वाले नगर निगम का दायरा बढ़कर 568 वर्ग किलोमीटर हो गया है।
– गांवों की आबादी 2,69,464 है। इसमें 588 से लेकर 15658 आबादी वाले गांव शामिल है।