कश्मीर में आतंक की रीपैकेजिंग है पाकिस्तान का नया पैंतरा, आतंकी गुटों ने नाम बदले; पुलवामा के बाद सबसे बड़ा हमला
13 दिसंबर, संसद पर हुए आतंकी हमले की बरसी का दिन। जम्मू कश्मीर आर्म्ड पुलिस नौवीं बटालियन के 25 जवान अपनी ड्यूटी खत्म कर श्रीनगर के जेवन स्थित कैंप को लौट रहे थे। शाम करीब 6 बजे ‘कश्मीर टाइगर्स’ नाम के नए आतंकी गुट के 3 आतंकी आए और बस को तीन तरफ से घेरकर तड़ातड़ फायरिंग शुरू कर दी। आतंकियों की प्लानिंग थी कि वो बस में मौजूद जवानों के हथियार छीनेंगे, लेकिन पुलिस की जवाबी कार्रवाई की वजह से आतंकी अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो सके। ये आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद आतंकियों का सबसे बड़ा हमला था, जिसमें 3 पुलिसकर्मी शहीद हो गए और 11 पुलिसवाले घायल हुए।
कश्मीर में अक्टूबर में हुई नागरिक और अल्पसंख्यक हत्याओं के पीछे भी नए उभरते आतंकी गुट द रजिस्टेंस फ्रंट (TRF) का नाम आया था। इसके अलावा पीपल अगेंन्सट फासिस्ट फोर्सेज (PAFF), यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट (ULF), कश्मीर टाइगर्स जैसे आतंकी गुट भी कश्मीर में एक्टिव नजर आते हैं। एक्सपर्ट्स बताते हैं कि इन आतंकी गुटों में नया सिर्फ और सिर्फ इनका नाम है, इनके आका, फंडिंग और गुट अभी भी पुराने ही हैं। आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा, हिजबुल मुजाहिद्दीन जैसे संगठनों ने ही इन नए नामों से आतंकी गतिविधियों को हवा दी है और ये पाकिस्तान की रणनीति के तहत किया जा रहा है। पुराने आतंकी संगठनों की वजह से पाकिस्तान फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) के दबाव का सामना कर रहा था।
कश्मीर में आतंक के बदल रहे चेहरे, चरित्र और चाल को लेकर हमने कश्मीर में सर्विस दे चुके आर्मी और पुलिस के अधिकारियों और सिक्योरिटी एक्सपर्ट से बात की है। हमने उनसे पूछा-
- हाल में कश्मीर में पुलिस और सुरक्षाबलों पर हमले क्यों बढ़ गए हैं?
- आतंकी संगठनों ने अपनी रणनीति में क्या बदलाव किए हैं?
- कश्मीर टाइगर्स, TRF, ULF जैसे आतंकी संगठन कहां से आ गए हैं?
- हाल में हो रहे एनकाउंटर्स तेजी से क्यों खत्म हो जाते हैं? क्या ये शूटआउट हो रहे हैं?
- क्या पुलिस और सुरक्षाबल ठीक रणनीति पर काम रहे हैं?
सतीश दुआ
रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल
आर्टिकल 370 हटने के 2 साल बाद आतंकी गतिविधियां कम हुईं, पत्थरबाजी खत्म हो गई और बेहतरी का माहौल बनने लगा, ये सब देखकर आतंकी संगठन और उनके सरगना परेशान हो रहे हैं। वो चाहते हैं कि उनका कैडर फिर से आतंकी गतिविधियां बढ़ाए। इसके लिए ये अब सामान्य आतंकी की जगह हाइब्रिड टेररिस्ट का इस्तेमाल करते हैं। ये हाइब्रिड आतंकी फुलटाइम टेररिस्ट नहीं होते, बल्कि ये समाज रहकर ही काम करते हैं। एक दो छोटी-मोटी आतंकी गतिविधि को अंजाम देने के बाद ये फिर रोजमर्रे की जिंदगी जीने लगते हैं। हाल में हुए नागरिकों और पुलिस पर हुए टारगेडेट अटैक इन्हीं आतंकियों ने अंजाम दिए हैं।
अभी जो नए-नए आतंकी संगठन आए हैं वो उनकी ऑनलाइन एक्टिविटी ज्यादा हैं। सोशल मीडिया का भी ये काफी इस्तेमाल करते हैं और वहीं पर युवाओं को भटकाने की कोशिश कर करते हैं। नए आतंकी गुटों के सारे नाम अंग्रेजी में हैं और प्रकृति से ये सेक्युलर दिखते हैं। पाकिस्तान और उसका डीप स्टेट ये सोची समझी रणनीति के तहत कह रहा हैं और लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, हिजबुल मुजाहिद्दीन के पुराने कैडर के जरिए आतंक के नए चेहरे तैयार कर रहा है।
अभी जो एनकाउंटर हो रहे हैं वो बहुत तेजी से खत्म हो जाते हैं। इसकी वजह ये है कि जो नए आतंकी बढ़ रहे हैं वो उनके पास ट्रेनिंग नहीं है, उनको वेपन देकर आतंकी गतिविधि में शामिल होने के लिए कहा जाता है और वो मारे जाते हैं। पहले जो आतंकी हुआ करते थे वो सरहद पार पाकिस्तान जाकर ट्रेनिंग लिया करते थे, लेकिन अब जो लोग भर्ती हो रहे हैं उनके पास ट्रेनिंग नहीं है।
आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद लोगों और सुरक्षाबलों के बीच तालमेल बेहतर हुआ है। आतंकी गुटों का पैंतरा है कि वो ह्यूमन राइट्स की आड़ में अपनी आतंकी गतिविधियों को चलाते रहें और लोगों की भावनाओं को अपने हित में इस्तेमाल कर सकें। सुरक्षाबल अपना काम मुस्तैदी के साथ कर रहे हैं, लेकिन सुरक्षाबलों की सीमाएं हैं कि वो सिर्फ हिंसा को कम कर सकती हैं। सरकार को भी चाहिए कि वो सभी को साथ लेकर विकास के काम करें, दूर-दराज के इलाकों में लोगों तक पहुंच बनाएं और एक राजनीतिक गतिविधियों का माहौल बनाएं। सुरक्षाबलों को मुस्तैदी बनाए रखनी है।
एसपी वेद-
पूर्व DGP, जम्मू कश्मीर पुलिस
कश्मीर में जो हो रहा है उसमें अफगानिस्तान इफेक्ट साफ दिखता है। पाकिस्तान आर्मी, ISI और कश्मीर में ऑपरेट करने वाले आतंकी गुटों का मनोबल बढ़ चुका है। इन्होंने अपनी रणनीति में भी बदलाव किया है। आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद से आतंकी गतिविधियां कम हो गई हैं, युवाओं ने आतंकी गुटों में शामिल होना कम कर दिया है, माहौल बेहतर हो रहा है। पाकिस्तान का डीप स्टेट ISI को ये अच्छा माहौल हजम नहीं हो रहा है, उनकी टेटर इंडस्ट्री बंद हो गई।
पाकिस्तान और आतंकी गुटों ने हाइब्रिड टेररिस्ट को बढ़ावा देना शुरू किया। छोटे हथियार देकर लोगों को टारगेटेड अटैक करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। आतंकी गुटों ने टारगेटेड सिविलियन किलिंग से ये संदेश देने की कोशिश की है कि बाहरी लोगों का यहां स्वागत नहीं किया जाएगा। ISI ने जो अफगानिस्तान वही ये कश्मीर में भी करना चाहते हैं। विकास कार्यों को बाधित करने के लिए दिहाड़ी मजदूरों को निशाना बना रहे हैं। जम्मू कश्मीर पुलिस पर हमला इसलिए हो रहा है क्योंकि इन्हीं के पास आतंकी गतिविधियों की सबसे ज्यादा जानकारी होती है।
कश्मीर में जैश और लश्कर ही दो बड़े आतंकी गुट कश्मीर में ऑपरेट करते हैं, लेकिन पाकिस्तान को लगता है कि अगर जैश और लश्कर का नाम आएगा तो उन पर FATF की सख्ती बढ़ती है। पाकिस्तान चाहता है कि दुनिया को ऐसा दिखाई दे कि जो भी आतंकी गतिविधियां हो रही हैं वो आर्टिकल 370 के विरोध के तौर पर कश्मीर के आम लोग कर रहे हैं।
जम्मू कश्मीर पुलिस सही रणनीति पर काम कर रही है। आतंक के खिलाफ ऑपरेशन में जम्मू कश्मीर पुलिस का काम सबसे अहम है। आतंकी गतिविधियों की 90% से ज्यादा खबरें पुलिस के पास ही आती हैं, इसकी वजह ये है कि ये लोगों के बीच ही रहते हैं। आतंकी इसलिए पुलिस को खासतौर पर टारगेट कर रहे हैं। पुलिस आतंकियों को सरेंडर करने का मौका देती है, अगर सामने से फायरिंग होती है तो पुलिस जवाबी फायरिंग करती है। सुरक्षाबलों को लोगों से अच्छा संबंध बनाकर रखना चाहिए। समाज से ज्यादा मेलजोल बढ़ेगा तभी पुलिस का कम्यूनिकेशन नेटवर्क अच्छा होगा।
कमल माडीशेट्टी
PhD रिसर्च स्कॉलर JNU, सुरक्षा विशेषज्ञ
कश्मीर की आतंकी गतिविधियों में साफ बदलाव देखने को मिल रहा है। कश्मीर टाइगर्स, TRF, PAFF, ULF जैसे नए-नए आतंकी गुटों के नाम सामने आ रहे हैं। ये पाकिस्तानी आतंक पर पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बन रहे दबाव का ही नतीजा है। पाकिस्तान FATF के दबाव में खुद को आतंकवाद से दूर दिखाना चाहता है, इसलिए ये पूरी रणनीति के तहत हो रहा है। कश्मीर में आतंकी गुटों की रीपैकेजिंग की जा रही है।
कश्मीर में 2017 से 2019 के बीच 1394 आतंक की घटनाएं हुई थीं, लेकिन ये 2019 से 2021 के बीच घटकर 380 के करीब हो गईं। आतंकियों की भर्तियां भी कम हुई हैं और वहां पर विकास के कामों में भी तेजी आई है। कश्मीर में ये जो बदलाव हो रहा है, आतंकी गुटों को ये परेशान कर रहा है।