:जल्दबाजी में सरकार गंवा बैठे कमलनाथ… बसपा MLA ने कांग्रेस के दो विधायकों को बताया उतावला

क्या विधायकों के गायब होने की खबर सुनकर कांग्रेसी नेताओं ने बयानबाजी में उतावलापन दिखा दिया? या भाजपा के बुने सियासी चक्रव्यूह में कांग्रेस फंसती गई? क्या दिग्विजय सिंह की अगुआई में सरकार बचाने की कोशिश में विधायक जीतू पटवारी व जयवर्धन सिंह की कोशिश जल्दबाजी साबित हुई और खरीद फरोख्त के आरोपों ने उपेक्षित विधायकों को पार्टी छोड़ने पर मजबूर कर दिया? BSP विधायक संजीव कुशवाहा ने ऐसे कई राज खोले।

कुशवाहा ने बताया कि BJP ने कमलनाथ सरकार को नहीं गिराया, बल्कि कांग्रेस नेताओं की जल्दबाजी के चलते शिवराज को सरकार बनाने का मौका दिया। कांग्रेस नेताओं ने बिना किसी प्रमाण के विधायकों की खरीद-फरोख्त के आरोप लगा दिए। छपास के चक्कर में कांग्रेस नेता जीतू पटवारी और जयवर्धन सिंह ने गुरुग्राम के होटल में बेवजह हंगामा किया था। इस होटल में वे विधायक थे, जिनके समर्थन से ही 15 साल का वनवास काटने के बाद कांग्रेस सत्ता में आई थी।

कुशवाहा ने दावा किया कि जब विधायक दिल्ली में जमा हुए थे, तब और उसके बाद कमलनाथ ने हमसे (बसपा, सपा व निर्दलीय विधायक) संपर्क तक नहीं किया था। कांग्रेस के किसी वरिष्ठ नेता ने हमने बातचीत तक नहीं की थी। वे इतने उतावले थे कि उन्होंने छपने के लिए मीडिया के सामने आरोप लगा दिए। उन्होंने ही BJP को सत्ता में आने का मौका दिया था।

BJP में शामिल होने के चंद घंटों बाद राज्यसभा उम्मीदवार बने सिंधिया

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 11 मार्च 2020 को BJP जॉइन कर ली। 17 साल तक कांग्रेस से राजनीति करने वाले सिंधिया को BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पार्टी की सदस्यता दिलाई। इसके चंद घंटों बाद ही BJP ने सिंधिया को मध्यप्रदेश से राज्यसभा उम्मीदवार घोषित कर दिया। इधर, शिवराज सिंह दिल्ली में BJP के दिग्गजों से आगे के सियासी समीकरणों पर चर्चा कर रहे थे। जबकि सिंधिया समर्थक 22 विधायक बेंगलुरु में जमे थे।

सिंधिया के BJP में शामिल होने के बाद इसी दिन शाम होते-होते भोपाल में CM हाउस में कांग्रेस विधायक दल की बैठक हुई। इसमें सिर्फ 93 विधायक पहुंचे। इससे साफ हो गया कि कमलनाथ सरकार खतरे में है। इसके बाद सरकार गिराने और बचाने की लड़ाई विधानसभा अध्यक्ष बनाम राज्यपाल के बीच पहुंच गई।

कांग्रेस और BJP विधायकों की बाड़ाबंदी

12 मार्च 2020 को कांग्रेस ने अपने सभी विधायकों को बसों से जयपुर रवाना कर दिया। कांग्रेस का दावा था कि उनकी सरकार सुरक्षित है। इसी दौरान भोपाल में BJP के बड़े नेताओं की भी बैठक हुई। बैठक के बाद BJP ने भी अपने सभी विधायकों को हरियाणा के मानेसर होटल में शिफ्ट कर दिया। इधर, 12 मार्च को ही बेंगलुरु पहुंचे जीतू पटवारी को पुलिस ने कांग्रेस विधायकों से मिलने से रोका। इस दौरान खूब सियासी ड्रामा हुआ। पटवारी को पुलिस ने हिरासत में लिया।

12 मार्च को भोपाल पहुंचे सिंधिया

BJP में शामिल होने के बाद सिंधिया पहली बार भोपाल पहुंचे, जहां उनका भाजपा नेताओं व कार्यकर्ताओं ने जोरदार स्वागत किया। सिंधिया इस दौरान भाजपा प्रदेश कार्यालय पहुंचे, जहां शिवराज सिंह चौहान, नरेंद्र सिंह तोमर, नरोत्तम मिश्रा और गोपाल भार्गव सहित BJP के तमाम दिग्गजों ने उनका स्वागत किया। इसके बाद उन्होंने राज्यसभा के लिए नामांकन भी भरा।

सिंधिया समर्थक सभी विधायक हुए बर्खास्त, सियासी जंग राजभवन पहुंची

13 मार्च को कमलनाथ ने अपने मंत्रिमंडल से सिंधिया समर्थक सभी विधायकों को बर्खास्त कर दिया, जबकि मध्यप्रदेश के इस सियासी ड्रामे में अब तक किसी भी विधायक का इस्तीफा उस वक्त के विधानसभा अध्यक्ष डाॅ. एनपी प्रजापति ने स्वीकार नहीं किया था। 14 मार्च को पहली बार डाॅ. प्रजापति ने मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, प्रद्युम्न सिंह तोमर, इमरती देवी, तुलसी सिलावट, प्रभुराम चौधरी और महेंद्र सिंह सिसौदिया का इस्तीफा स्वीकार कर लिया। इस्तीफा स्वीकार होने के बाद मध्यप्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल लालजी टंडन ने मुख्यमंत्री कमलनाथ को फ्लोर टेस्ट कराने के निर्देश देते हुए विधानसभा में बहुमत साबित करने को कहा, लेकिन कांग्रेस ने इसे मानने से इंकार कर दिया। उनका कहना था कि सदन में क्या होगा यह विधानसभा अध्यक्ष तय करेंगे न कि राज्यपाल।

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