केस डायरी में पेज कम निकले, जांच अधिकारी ने मानी गलती, कोर्ट ने दिए जांच के आदेश

जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की कोलारस शाखा में कर्मचारियों ने पांच करोड़ का गबन किया था …

शिवपुरी जिले के पोहरी सब डिविजन आफिसर पुलिस (एसडीओपी) सय्यद सुहेल मुमताज की मुश्किल बढ़ सकती है। हाई कोर्ट की एकल पीठ ने डीजीपी को उनके खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं। यह जांच पुलिस महानिरीक्षक स्तर के अधिकारी से कराई जाए। केस डायरी में पेज कम निकले थे। कोर्ट में उन्होंने अपनी गलती भी स्वीकार की। कोर्ट ने कहा कि यह जांच अधिकारी ने जानबुझकर किया है, किसी को फायदा पहुंचाने के लिए।

जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की कोलारस शाखा में कर्मचारियों ने पांच करोड़ का गबन किया था। गबन के पैसे पिंकी यादव, रवि रजक, पवन यादव के खाते में गए थे। कोलारस थाने में गबन करने वालों के खिलाफ केस दर्ज किया गया। जांच के बाद कोर्ट में चालान पेश किया गया। पवन यादव ने हाई कोर्ट में जमानत याचिका दायर की। कोर्ट में जो केस डायरी भेजी गई, केस डायरी में पेज कम थे। इसको लेकर जांच अधिकारी काे तलब किया था। एसडीओपी ने कोर्ट में अपनी गलती मानी। इसे ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने जांच के आदेश दिए हैं।

तिघरा की नहर नहीं तोड़ी जाएगी, नहर में सिंचाई के लिए देने के प्रयास किए जाएंगेः अब तिघरा बांध पर बनी नहर को नहीं तोड़ा जाएगा। हाई कोर्ट की युगल पीठ में राज्य शासन ने यह जानकारी दी है। उप महाधिवक्ता ने कहा कि नहर में सिंचाई के लिए भी पानी देने के प्रयास किए जाएंगे। मास्टर प्लान के अनुसार नहर को यथावत रखा जाएगा। नगर निगम ने पानी की पाइप लाइन बिछाने के लिए तिघरा की नहर को तोड़ना शुरू कर दिया है। नहर को तोड़े जाने के खिलाफ राकेश सिंह व अन्य ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की। याचिका में तर्क दिया गया कि स्टेट काल में नहर को बनाया गया। इस नहर से सिंचाई होती थी, लेकिन नगर निगम इसे तोड़ रही है। दाेबारा इस तरह की नहर बनाना संभव नहीं है। हाईकोर्ट ने नहर को तोड़ने पर रोक लगा दी थी। राज्य शासन से जवाब मांगा था। राज्य शासन ने अपना फैसला बदल लिया। नहर को नहीं तोड़ गया। जो हिस्सा तोड़ गया था, उसको भी सुधार दिया। राज्य शासन ने जवाब पेश कर बताया कि तिघरा के पानी का उपयोग सिंचाई, पेयजल व उद्योग के लिए किया जाता था। पेयजल की आपूर्ति बढ़ने से सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है। पेयजल आपूर्ति होने के बाद पानी बचता है, तो सिंचाई के लिए देने के भी प्रयास किए जाएंगे। हाई कोर्ट ने याचिका का निराकरण कर दिया।

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